तो भारतवर्ष का सबसे विद्रोही गाना. सबसे क्रांतिकारी और सबसे फेमिनिस्ट गाना अवतरित हो चुका है. लड़कियों का
द ब्रेकअप सांग. 'आज मैंने ब्रेकअप की पार्टी रख ली है' ये गाना तो सुना ही होगा? दुत्कार कर गई युवतियों को जितना सुनाया गया. उन सबको जवाब आ चुका है. पहली लाइन ही स्टीरियोटाइप तोड़ती है.
दिल पर पत्थर रखकर मुंह पर मेकअप कर लिया. युवती मेकअप के पीछे नहीं भागती. चेहरे का सौन्दर्य उसके लिए सब कुछ नहीं है. 'सजना है मुझे सजना के लिए' वाला काल गया-बीता. वो जो कहते हैं, हंसते हैं, औरतें मेकअप में घंटों लगाती हैं. वैसा भी कुछ नहीं है. युवती कहती है 'दिल पर पत्थर रखकर'.
अनिच्छा से. अब आप सोचें कि युवती जब अनिच्छा से मेकअप कर रही है तो क्या वो दबाव में है. तो जवाब सुनिए. नहीं! मेकअप उसने सैंया को रोकने के लिए नहीं किया. ब्रेकअप हेतु किया. बॉलीवुड मुस्कुरा सकता है. 'न जाओ सैंया छुड़ाकर बैंया, कसम तुम्हारी मैं रो पडूंगी' से वो 'सैंया से ब्रेकअप' तक आ पहुंचा है. ब्रेकपोपरांत भी सुन्दर नजर आना है. यही तो
रिवेंज बॉडी का मूल है. देह को अल्कोहल में डुबाना और खुद गल जाना तो बहुत 'मीना कुमारी' हो जाता है.
युवती का दावा है. सुबह-सवेरे उठकर उसने ये सब कर लिया. मनुष्य को प्राथमिकताएं तय करनी होती हैं. युवती की प्राथमिकता है. ब्रेकअप. एक संदेश भी है. आप स्वतंत्र हैं, कॉंफिडेंट हैं. अपने फैसले खुद ले सकते हैं. तो सुबह-सवेरे उठिए. आपके लिए ही बेहतर है.
सैंया से ब्रेकअप एक नई बहस को भी जन्म देता है. सैंया को पति मानें या प्रेमी. इस गाने ने कई रास्ते खोल दिए हैं. 'सैंया' को एक बार फिर परिभाषित किया जाना चाहिए. आम चलन में ब्रेकअप बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप होता है. सैंया से नहीं. जब बहस ट्रिपल तलाक पर चल रही हो ऐसे में 'सैंया से ब्रेकअप' बहुत क्रांतिकारी लगता है. वो भी तब जब युवती ने फैसला लिया हो.
इस गाने में सिर्फ मोहित करके रख देने वाला नारीवाद ही नहीं दिखता. हिंदी और अंग्रेजी के प्रति जो दुराग्रह लोगों ने पाल रखे हैं. हिंदी के शुद्धतावादी लोगों को इस गाने ने नई राह दिखाई है. युवक कहता है. 'भूतकाल को भूल जा अब तू, आने वाला फ्यूचर वेरी वेरी ब्राईट है'. अहो! लगता है हिंदी-अंग्रेजी नहीं, दही में लिपटी जलेबी साथ मिल गई हो. किसी भी फ़िल्मी गाने में भूतकाल शब्द का इतना अच्छा प्रयोग आपने कभी न देखा होगा.
ऐसा एक बार नहीं हुआ. कई-कई बार होता है. आगे सुनिए. 'कल्टी हुया जो सैंया स्टूपिड तेरा, जीवित हुआ है फिर से क्यूपिड तेरा' लड़का भले उसे स्टूपिड कहे, इसी गाने में 'सैंया की मां की आंख' उचारे, युवती उसे सैंया जी ही कहती है. पूर्व सैंया को भी जी कहना दिखाता है. युवती भले प्रोग्रेसिव है, लेकिन संस्कारी भी साथ-साथ है. अनर्गल बातें नहीं कहती. 'छोड़कर आगे बढ़ने' में विश्वास रखती है. इस गाने में बहुत कुछ सीखने को है. https://www.youtube.com/watch?v=CvPdtf8Ijj4