फिल्म- नई नवेली
डायरेक्टर- बालाजी मोहन
एक्टर्स- यामी गौतम, आदिनाथ कोठारे, अनुराग ठाकुर, मीता वशिष्ठ, प्रतीक पचौरी, सुष्मिता मुखर्जी
रेटिंग- 2 स्टार
फिल्म रिव्यू- नई नवेली
कैसी है यामी गौतम की नई फिल्म 'नई नवेली' जानने के लिए पढ़ें ये रिव्यू

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'नई नवेली' नाम की एक फिल्म आई है. इसे आप हॉरर कॉमेडी, फैमिली एंटरटेनर, मायथोलॉजी या सुपरहीरो फिल्म, कुछ भी कह सकते हैं. क्योंकि इस फिल्म में वाकई ये सारे एलिमेंट्स हैं. और यही चीज़ इस फिल्म को हर्ट करती है. जिस तरह से इसकी शुरुआत हुई थी, उसे 'स्त्री' कोडेड सिनेमा माना जा सकता है. क्योंकि ये हॉरर के पुट के साथ जेंडर के टॉपिक पर बात करती है. मगर इससे पहले कि आप किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाते, ये कहानी कहीं और ही निकल जाती है. जिसके बाद ये ऐसी बेस्वाद खिचड़ी बन जाती है, जो न निगली जाती है, न पचाई!
'नई नवेली' की कहानी मेरठ में रहने वाले अवस्थी फैमिली की है. घर का बड़ा बेटा है राजा अवस्थी. उसकी शादी मोहिनी नाम की लड़की से होती है. मोहिनी उस कंपनी की ग्रुप हेड है, जहां राजा नौकरी करता है. शादी के बाद पूरे घर में खुशहाली आ जाती है. सबकी दिक्कतें दूर हो जाती हैं. जिसकी वजह से राजा के छोटे भाई बंटू को मोहिनी पर शक़ हो जाता है. उसका मानना है कि मोहिनी डायन है. वो अपने पूरे परिवार को ये बात बताता है. बाकायदा सबूत और उदाहरण के साथ. यहां आपको लगता है कि शायद ये फिल्म विच हंटिंग के ट्रेंड पर टिप्पणी करना चाहती है. जेंडर सेंसिटिविटी जैसे ज़रूरी मुद्दे पर बात करना चाहती है. मगर फिर इस कहानी में रामायण से लेकर दशहरा और गुड वर्सेज ईविल वाला पूरा कॉन्सेप्ट ठेल दिया जाता है.
जिस तरीके से इस कहानी को कहना चुना गया है, वो बहुत कॉम्प्लिकेटेड है. इस फिल्म में रामायण के एक सब प्लॉट को एक्सप्लोर किया गया है. काल शील नाम का एक पत्थर है, वो जिसके पास जाता है उसकी बुद्धि हर लेता है. मगर त्रेता युग का ये पत्थर आज के समय में मेरठ कैसे पहुंचा? उस पत्थर का अवस्थी परिवार से क्या लेना-देना? इस सबका एक 'हिस्टॉरिकल' कारण बताया जाता है. जो कि अव्वल तो एक्यूरेट नहीं लगता. साथ ही आज के समय में उसकी प्रासंगिकता भी सवालों के घेरे में आ जाती है. तीसरी चीज़ ये है कि फिल्म उस सब्जेक्ट को हैंडल नहीं कर पाती.
'नई नवेली' में मोहिनी एक ऐसी महिला है, जो प्रोफेशनली अपने पति से बड़े ओहदे पर है. अच्छी दिखती है. पूरे परिवार के सामने अपनी बात खुलकर रखती है. घर की महिलाओं के लिए खड़ी होती है. एक स्ट्रॉन्ग इंडीपेंडेंट वुमन है, जो उसे अपने मेल काउंटपार्ट राजा से सुपीरियर है. राजा के घरवालों को लगता है कि इतनी अच्छी लड़की ने राजा से शादी क्यों की. इसके पीछे ज़रूर उसकी कोई चाल है. अगर ये फिल्म इस द्वंद को थोड़ा और खोलकर समझने की कोशिश करती है, तो शायद ये उससे फार बेटर फिल्म बनकर निकलती है, जो ये अभी है. मगर मेकर्स ने चुना सेफ रास्ता.
आज के समय में मायथोलॉजिकल फिल्में पसंद की जा रही हैं. हाल ही में 'लालो', 'देऊळ बंद', 'हनुमान अंश' जैसी फिल्में आईं और खूब पसंद की गईं. इसलिए मेकर्स ने 'नई नवेली' की कहानी को भी उसी तरफ मोड़ दिया. प्लस इसे दशहरा वीक में रिलीज़ किया गया है, इसलिए फिल्म का एक बड़ा चंक उसे जस्टिफाई करने में खर्च होता है. कुछ सिरे ऐसे भी हैं, जिन्हें खुला ही छोड़ दिया गया है. मसलन, मोहिनी के पात्र के पास वो सुपरपावर कैसे आया? क्या वाकई जो इंसान राणव वाले नक्षत्र में पैदा होगा, तो उसके अंदर रावण वाली शक्तियां आ जाएंगी? लेकिन आप एक बेहतर पे-ऑफ के इंतज़ार में इन बातों को नज़रअंदाज़ करते हैं. मगर पे-ऑफ जैसी कोई चीज़ इस फिल्म में एग्जिस्ट ही नहीं करती. ये फिल्म खत्म हो जाए, वही काफी है. क्योंकि कई सारे फाइट सीक्वंस को अलग-अलग पर्सपेक्टिव से दिखाने के लिए रिपीट किया जाता है. जो नैरेटिव में तो कुछ खास नहीं जोड़ता. मगर फिल्म की लंबाई में कुछ एक्स्ट्रा मिनट तो जोड़ ही जाता है.
मोहिनी का रोल करने वाली यामी गौतम इस फिल्म की हीरो हैं. उनके कई स्लो-मो इंट्रो शॉट्स आपको फिल्म में मिलेंगे. फिल्म में उनके हिस्से ढेर सारे एक्शन सीक्वेंस भी आए हैं. उन्होंने अपने हिस्से को सब दिया है, जिसकी ज़रूरत उस किरदार को थी. अगर पौराणिक पार्ट हटा दें, तो मोहिनी एक मजबूत कैरेक्टर है. मगर उसका आर्क ऐसा नहीं है, जिसे समझा या रिलेट किया जा सके. अनुराग ठाकुर ने बंटू का रोल किया है. फिल्म में सबसे ज़्यादा स्क्रीनटाइम उनके पास है. क्योंकि वो फिल्म के अंदर नैरेटर की भूमिका में हैं. जब भी फिल्म थोड़ी टेंस और हेवी होने लगती है अनुराग अपनी कॉमेडी से उसे बचाने की कोशिश करते हैं. मीता वशिष्ठ ने पिंकी का रोल किया है. जो काफी हद तक 'विकी विद्या का वो वाला वीडियो' में मल्लिका शेरावत के कैरेक्टर से मिलता-जुलता है. काम फिल्म में किसी का बुरा नहीं है. मगर ये फिल्म ऐसी है कि आप इसमें कितना भी अच्छा परफॉर्म कर लें, वो फिल्म को बेहतर बनाने में मदद नहीं कर सकता.
'नई नवेली' के पास एक बहुत ही उम्दा प्रेमाइस था खेलने के लिए. कुछ मज़ेदार करने के साथ विमर्षधर्मी सिनेमा बनने का. मगर ऐसा हो नहीं पाता और ये एक गड्डमड्ड फिल्म बनकर रह जाती है.
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