The Lallantop

वो 8 मौके, जब फिसल गई पीएम मोदी की जुबान

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी कई बार जुबान फिसली है.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
तारीख- 23 जनवरी 2018. जगह- दाओस मौका- वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम वक्ता-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक नेता के तौर पर आमद दर्ज करवाने पहुंचे थे. इस मंच से उन्होंने 52 मिनट लंबा भाषण दिया, लेकिन कुछ देर के लिए उनकी जुबान फिसल गई. उन्होंने कहा-
'भारत के 600 करोड़ मतदाताओं ने 2014 में 30 साल बाद पहली बार किसी एक राजनीतिक पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत दिया'
इस दावे की हकीकत ये है कि देश की कुल आबादी करीब 130 करोड़ है, जिसनें तकरीबन 80 करोड़ वोटर हैं. ये पहला मौका नहीं है, जब बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुबान फिसली है. इससे पहले भी पीएम मोदी कई बार सार्वजनिक मंचों पर गलतियां कर चुके हैं, जिसके लिए उन्हें ट्रोल होना पड़ा है.
davos modi
दाओस में पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें 600 करोड़ लोगों ने वोट देकर जिताया है.

# मेट्रो में यात्रा करने वाले पहले प्रधानमंत्री थे वाजपेयी
25 दिसंबर 2017 को पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो की मेजेंटा लाइन का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कहा-
'पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 2002 में मेट्रो की यात्रा की थी.'
इसकी हकीकत ये है कि देश में पहली बार 1972 में मेट्रो की नींव रखी गई थी. ये मेट्रो कोलकाता में बननी थी, जिसे 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शुरू किया था. दिल्ली मेट्रो कोलकाता के बाद दूसरी मेट्रो थी.
# तक्षशिला बिहार का गौरव है
23 अक्टूबर 2013 को जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बने थे, तो उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में हुंकार रैली को संबोधित किया था. इस दौरान उन्होंने कहा था-
'सम्राट अशोक बिहार के गौरव थे. नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षण संस्थान बिहार के गौरव रहे हैं.'
इसकी हकीकत ये है कि तक्षशिला बिहार तो छोड़िए, भारत में ही नहीं है. तक्षशिला फिलहाल पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिण्डी जिले की एक तहसील है. ये एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जो प्राचीन भारत में गांधार की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख स्थल था.
# सिकंदर ने पूरी दुनिया जीत ली थी. जब उसने बिहारियों से पंगा लिया तो क्या हश्र हुआ. यहां आकर वो हार गया.
23 अक्टूबर 2013 को नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे. इस दौरान वो बिहार की राजधानी पटना में हुंकार रैली को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने बिहार के गौरव का जिक्र करते हुए कहा-
'बिहार इतना गौरवशाली है कि उसने सिकंदर महान की सेना को भी हरा दिया था. सिकंदर ने पूरी दुनिया जीत ली थी. लेकिन जब वो बिहार पहुंचा और बिहारियों से पंगा लिया तो उसका क्या हश्र हुआ. वो यहां आकर हार गया.'
इसकी हकीकत ये है कि 326 ई.पू. में सिकंदर तक्षशिला से होते हुए से पुरु के राज्य की तरफ जा रहा था, जो जो झेलम और चेनाब नदी के बीच बसा हुआ था. आगे बढ़ते हुए वो व्यास नदी तक पहुंचा था और उसके बाद वो वापस लौट गया. यानि सिकंदर कभी बिहार नहीं गया और पंजाब से ही उसे वापस लौटना पड़ा, जहां लौटते वक्त उसकी मौत हो गई थी.

बीजेपी की ओर से पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जब बिहार में हुंकार रैली की, तो उस दौरान कई बार जुबान लड़खड़ा गई.

# चंद्रगुप्त गुप्त राजवंश के थे 
23 अक्टूबर 2013 को हुंकार रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा था-
'जब हम गुप्त साम्राज्य की बात करते हैं तो हमें चंद्रगुप्त की राजनीति की याद आती है.'
इसकी हकीकत ये है कि चंद्रगुप्त गुप्त वंश के नहीं मौर्य वंश के संस्थापक थे. उन्होंने 322 ईसा पूर्व में मौर्य वंश की स्थापना की थी. इन्होंने ही मगध साम्राज्य के राजा घनानंद, जिसे महापद्मनंद भी कहा जाता है, के शासन को खत्म किया था. इस काम में चाणक्य ने उनकी सहायता की थी.
# श्यामा प्रसाद मुखर्जी गुजरात के बेटे थे
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2013 में खेड़ा में एक सभा को संबोधित किया था. इस दौरान उन्होंने कहा था-
'श्यामा प्रसाद मुखर्जी गुजरात के बेटे थे. उन्होंने लंदन में इंडिया हाउस का गठन किया था. 1930 में उनकी मौत हो गई थी.'
हकीकत ये है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ था. उनकी मौत 1953 में हुई थी. मोदी जिस शख्स की बात कर रहे थे उनका नाम श्यामी कृष्ण वर्मा था. उन्होंने लंदन में इंडिया हाउस का गठन किया था.
# श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवेकानंद के संपर्क में थे
10 नवंबर 2013 को उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी गुजरात के बालासिनोर में एक अस्पताल के उद्घाटन में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा-
'डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वामी विवेकानंद और स्वामी दयानंद सरस्वती के संपर्क में रहते थे.'
इसकी हकीकत ये है कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 1901 में हुआ था. वहीं विवेकानंद का जन्म 1863 में हुआ था. जब मुखर्जी एक साल के थे, यानि 1902 में तो स्वामी विवेकानंद की मौत हो गई थी. इसी तरह से दयानंद सरस्वती का जन्म 1824 में हुआ था. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्म से काफी पहले 1883 में ही दयानंद सरस्वती की मौत हो चुकी थी.

गुजरात में बतौर मुख्यमंत्री भाषण देते हुए भी कई बार गलती हो चुकी है.

# कांग्रेस ने आजादी की पहली लड़ाई को कम करके आंका था
फरवरी 2014 में नरेंद्र मोदी बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी मेरठ में चुनाव प्रचार कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा था-
'भारत में आजादी की जो पहली लड़ाई हुई थी, उसे कांग्रेस ने कम करके आंका था.'
इसकी हकीकत ये है कि भारत में आजादी की पहली लड़ाई 1857 में शुरू हुई थी. लड़ाई मेरठ से शुरू हुई, जबकि कांग्रेस का गठन 1885 में एओ ह्यूम ने किया था. यानि आजादी की लड़ाई के 18 साल बाद कांग्रेस का गठन हुआ था. ऐसे में कांग्रेस उस लड़ाई को कम करके कैसे आंक सकती थी.

अमेरिका में भी पीएम मोदी से उस मंदिर के बारे में गलत तथ्य निकल गया, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया है.

# कोणार्क का सूर्यमंदिर 2000 साल पुराना है
नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री 8 जून 2016 को अमेरिका के दौरे पर थे. उस वक्त अमेरिका ने भारत से चोरी गईं 200 से ज्यादा कलाकृतियां लौटा दी थीं. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा था-
'जब हम कोणार्क के सूर्य मंदिर में इन मूर्तियों को देखते हैं तो लगता है कि हमारे पूर्वज साइंस और आर्ट में मास्टर थे. किसी मॉडर्न फैशनेबल गर्ल को स्कर्ट पहने और हाथ में पर्स लिए ये मूर्तियां 2000 साल पुरानी हैं.इसका मतलब है कि शायद ये चलन उस वक्त रहा होगा.'
इस दावे की हकीकत ये है कि कोणार्क के सूर्य मंदिर को गंग वंश के राजाओं ने 13वीं शताब्दी में बनवाया था. कोणार्क का सूर्य मन्दिर ओडिशा के पुरी जिले में है. इस मंदिर को 1984 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी थी.


ये भी पढ़ें:
इस आदमी की 'मन की बात' सुन के मजा आ जाएगा!

-6 डिग्री में मोदी जी को पसीना लाने वाली खबर आई है

क्यों प्रकाश राज नरेंद्र मोदी और अमित शाह को हिंदू नहीं मानते

पीएम मोदी के दोस्त नेतन्याहू को बस ये एक काम नहीं करना चाहिए था

ये पहली बार नहीं है, जब नरेंद्र मोदी ने किसी 'खास' के लिए प्रोटोकॉल तोड़ा

वीडियो में देखिए, जब पीएम मोदी की जुबान फिसल गई

Advertisement
Advertisement