हमने उन तेरह के बारे में आपको विस्तार से बताया था. 3 जनवरी को आम आदमी पार्टी ने बता दिया कि वो तीन खुशनसीब कौन होंगे जो राज्यसभा जाएंगे. तो अब आप भी जान लीजिए कि ये तीन हैं कौन-
#1. संजय सिंह

संजय सिंह का नाम ही सबसे पहले फाइनल हुआ था.
सुल्तानपुर के रहने वाले. कोई कहता है कि मकैनिकल इंजीनियरिंग की, कोई कहता है कि माइनिंग में डिप्लोमा किया. NGO सेक्टर के जरिए राजनीति बनाई. गोमती नदी को श्रमदान के ज़रिए साफ करने की पहल में संजय भी थे. फिर इंडिया अगेंस्ट करप्शन के दौरान अन्ना हजारे से जुड़े. फिर वहां से अरविंद केजरीवाल की तरफ सरक लिए. कभी चुनाव नहीं लड़े और संगठन का काम करने के नाम पर बॉस के खास हो गए. कितने खास? PAC में हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार के मामले AAP में संजय ही देखते हैं. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं. पंजाब के प्रभारी रहे हैं और अब सबसे पहला नाम उन्हीं का फाइनल हुआ बताया जा रहा है.
संजय हमेशा फुल टाइम राजनीति करना चाहते थे और यह उनके लिए बड़ी सफलता है. तमाम इल्ज़ाम एक तरफ, केजरीवाल का साथ एक तरफ. कभी सपा के सुल्तानपुर से विधायक रहे अनूप संडा के खास थे. संडा अब विधायक भी नहीं और उनका पूर्व चेला सांसदी की तैयारी में है.
एक बात और- दिल्ली के सुरगेबाज कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल से संजय सिंह को कुमार विश्वास ने मिलवाया था. मनोज तिवारी की गाड़ी में बिठाकर रामलीला मैदान ले गए थे संजय को अरविंद. आज देखिए वक्त का सितम.
#2. नारायण दास गुप्ता

नवीन गुप्ता ICAI के वाइस प्रेसिडेंट हैं.
दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC)से B.Com करने वाले गुप्ता CA हैं. CA लोगों के नेता भी हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के वाइस चेयरमैन. अमरीका स्थित बोर्ड ऑफ इंटरनैशनल फेडेरेशन ऑफ अकाउंटेंट्स के लिए चुने गए पहले भारतीय है.
कई किताबें भी लिखीं. अपने ही ट्रेड में. GST के बड़े जानकार माने जाते हैं एनडी गुप्ता. 68 साल के हैं. अरविंद केजरीवाल के साथ NGO परिवर्तन के वक्त से जुड़े हुए हैं. दो साल से AAP का खाता-बही देख रहे हैं. आर्थिक मामलों वाली लिस्ट में ये नया नाम उछला है, 3 जनवरी की मीटिंग से 24 घंटे पहले. खासी जोरदारी से.
#3. सुशील गुप्ता

सुशील गुप्ता कभी कांग्रेसी थे, अप AAP मैं हैं.
दिल्ली छाप समाजसेवी. स्कूल-अस्पताल चलाते हैं. बिरादरी वाले संगठनों में भी सक्रिय हैं. ये पूर्व कांग्रेसी हैं. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हार चुके हैं. दिल्ली में इनके करीब 10 चैरिटेबल हॉस्पिटल चलते हैं. कहा ये भी जा रहा है कि इन्हें 2013 में AAP ने मोतीनगर सीट से टिकट का ऑफर दिया था, जिसे इन्होंने मना कर दिया था. इनका नाम भी इधर 24 घंटे में ही आया. और आए ट्विटर पर पुराने फोटो. जिसमें वह ‘केजरीवाल हिसाब दो’ वाले बैनर में बतौर निवेदक दर्ज हैं.
इन तीन नामों के ऐलान के बाद आम आदमी पार्टी के कही नेताओं का मन खट्टा हो गया है. कोई पार्टी छोड़ रहा है, कोई पत्रकारों को बता रहा है कि मैं नाराज़ हूं. कुछ विधायक भी नाराज हैं. लेकिन वो कुछ न कबाड़ पाएंगे, क्योंकि व्हिप मने चाबुक की चुस्की उनको भी चखनी होगी.
जिन तेरह नामों की चर्चा कल तक थी, उसमें हमने RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर का नाम नहीं रखा था. क्योंकि वो लोग पहले केजरीवाल को ‘थैंक्यू वेरी मच, एम नॉट इंटरेस्टेड’ कह चुके थे.












