
अपने टाइटल को जस्टीफाइ करती हुई दिख रही है फिल्म. फोटो - ट्रेलर
मुख्य किरदार है तारा. एक पिछड़े समाज की लड़की. डॉ. भीमराव आंबेडकर से प्रेरित. पूरी तरह परिवर्तन पार्टी ऑफ इंडिया को समर्पित. मास्टर जी इस पार्टी के सीनियर हैं. तारा भी इन्हीं की बात मानकर अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओ को पूरा करना चाहती है. सिर्फ चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहती. बल्कि, सही मायनों में बदलाव लाना चाहती है. माइनॉरिटी कम्यूनिटी को समाज में उसकी सही जगह दिलाना चाहती है. पर अकेले चुनाव लड़कर जीतना भी संभव नहीं. गठबंधन की जरूरत तो पड़ेगी ही. यहीं शुरू होता है राजनीति का असली खेल. कौन बाहर से कैसा और अंदर से कैसा, समझ आने लगता है. एक अकेली औरत और ऊपर से दलित. ज़्यादा लोगों को तो यही हज़म नहीं हो पाता. ‘पॉलिटिक्स इज़ ए मैन्ज़ वर्ल्ड’ को मानने वाले आगे क्या करते हैं, यही फिल्म की कहानी है.
सोमवार को फिल्म का पोस्टर रिलीज़ हुआ था. जिसके बाद लोग इसे उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती की बायोपिक समझ बैठे. इस चक्कर में फिल्म को ट्रोल भी किया गया. यही कारण है कि ट्रेलर शुरू होने से पहले एक डिसक्लेमर आता है. कि कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं. # ट्रेलर कैसा है Madam Chief Minister का? जैसा वादा किया, ठीक वैसा. कहानी का केंद्र बिंदु एक औरत है. ज़्यादातर औरतों पर फोकस्ड फिल्में जल्द ही पटरी से उतर जाती हैं. यानि मेन किरदार को ही कम फुटेज देती हैं. पर यहां ऐसा नहीं है. यहां कहानी की पकड़ पूरी तरह से तारा के हाथ में है. उसकी प्रेरणा, उसके स्ट्रगल से लेकर उसका उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलेगा. ट्रेलर की एक और बात बड़ी खास है. यहां राजनीति को सजा कर नहीं दिखाया. जैसी ज़मीनी हकीकत, वैसा पर्दे पर दिखेगा. और ज़मीनी हकीकत हमेशा खूबसूरत भी नहीं होती. ट्रेलर से ही एक उदाहरण. शुरू में तारा को दिखाया जाता है. मास्टर जी की बात को आंख बंद कर माननेवाली. अपनी पार्टी को लीड भी करने लगती है. एक जगह मीटिंग के लिए जाती है. विपक्ष के नेता को ऑफर देती है कि उसकी पार्टी ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. नेता मुड़कर पूछता है कि कौन है बे? जवाब आता है,
सुना था एक दिन घर से भाग आई थी. तभी से मास्टर जी ने अपने पास रख ली. रख ली भाईसाहब, तो रख ली.

डॉ. अंबेडकर से प्रेरणा लेता है तारा का किरदार. फोटो - ट्रेलर
बिना कुछ बोले भी बहुत कुछ कह दिया. कैसे हम लड़कों के घर से भागकर कामयाब होने को ही अच्छी कहानी मानते हैं. लड़की भागी तो कुछ गलत ही होगा. और कोई उसे रखेगा ही, जैसे कोई चीज़ हो. ये तो हुई समाज की हकीकत. अगला उदाहरण है राजनीति की वास्तविकता से. एक समय बीजेपी के सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बयान दिया था. कि कैसे विकास से नहीं बल्कि मंदिर-मस्जिद की राजनीति से ही चुनाव जीते जा सकते हैं. यहां भी इसे यूज़ किया गया. एक डायलॉग है,
ये वो प्रदेश है, जहां जो मेट्रो बनाता है वो चुनाव हारता है. जो मंदिर बनवाता है, वही जीतता है.बस ट्रेलर से एक छोटी सी शिकायत है. कहानी का काफी कुछ हिस्सा दिखा दिया. ये जानबूझकर किया गया है या नहीं, ये फिल्म आने पर ही पता चलेगा. बाकी सारी चीजों में मामला कड़क है.

फिल्म को अपने कुछ प्लॉट ट्विस्ट बचा लेने चाहिए थे. फोटो - ट्रेलर
# Madam Chief Minister में कौन-कौन हैं? ऋचा चड्ढा – मुख्य किरदार तारा का रोल निभा रही हैं. इनकी पर्सनैलिटी की बेबाकी किरदार पर काफी जम रही है. हमेशा अलग किस्म की फिल्में चुनती हैं. इनकी आखिरी फिल्म ‘शकीला’ में भी इनके काम की तारीफ हुई थी.

तारा: एक जिद्दी और अखड़ नेता जो हाथ में सलमान खान जैसा ब्रेस्लेट पहनती है. फोटो - ट्रेलर
सौरभ शुक्ला – यहां ये मास्टर जी का किरदार निभा रहे हैं. लोगों के बीच इनकी काफी रिस्पेक्ट है. कम से कम ट्रेलर देखकर तो यही लग रहा है. इन्हें आप ‘जॉली एलएलबी’ और ‘सत्या’ जैसी फिल्मों में भी देख चुके हैं.

सौरभ शुक्ल यहां एक सीनियर नेता बने हैं. फोटो - ट्रेलर
मानव कौल – एक और मंझे हुए एक्टर. फिल्म और थिएटर में लगातार एक्टिव रहते हैं. यहां तारा के पति बने हैं. इनके राजनैतिक मंसूबे क्या हैं, फिल्म आने पर ही साफ होगा.

मानव कौल यहां मुख्यमंत्री तारा के पति बने हैं. फोटो - ट्रेलर
अक्षय ओबरॉय – पिछले साल आई स्वरा भास्कर की सीरीज़ ‘फ्लेश’ का हिस्सा थे. यहां तारा के ओपोज़िशन में खड़े नज़र आ रहे हैं. ज़ाहिर है नेगेटिव किरदार निभाएंगे.

अक्षय नेगेटिव किरदार में प्रॉमिसिंग लग रहे हैं. फोटो - ट्रेलर
# कौन बना रहा है? फिल्म लिखी और डायरेक्ट की है सुभाष कपूर ने. जो इससे पहले ‘जॉली एलएलबी’ फ्रैन्चाइज़ बना चुके हैं. 90 के दशक में इन्होंने बतौर पॉलिटिकल रिपोर्टर काम किया था. बस अपना वही अनुभव और रिसर्च यहां यूज़ किया है.

फिल्म में आपको TVF के जाने-माने एक्टर निखिल विजय भी दिखेंगे. फोटो - ट्रेलर
# कब आ रही है Madam Chief Minister? जवाब है 22 जनवरी. वो भी किसी OTT प्लेटफॉर्म पर नहीं. बल्कि, आपके नज़दीकी सिनेमाघर में. कोरोना काल में जब ज़्यादातर फिल्में OTT का रुख कर रही हैं, तो इस फिल्म के मेकर्स ने थिएटर के पुराने रास्ते पर जाना सही समझा. ये स्टेप कितना सही साबित होता, 22 जनवरी को ही पता चलेगा.
अगर अब तक आपने ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ का ट्रेलर नहीं देखा है, तो यहां देख सकते हैं -
























