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13 दिन में 1500 किमी चलकर मुंबई से गांव पहुंचे, कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई

पॉस्टमॉर्टम के लिए कोरोना के टेस्ट रिजल्ट का इंतजार.

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CMIE ये हर हफ्ते देश में बेरोजगारी के आंकड़े जारी करता है. CMIE के 23 जून को जारी डेटा के मुताबिक अब देश में सिर्फ उतनी ही बेरोजगारी रह गई है जितनी कोरोना संकट से पहले थी.
इंसाफ अली. मुंबई से श्रावस्ती की 1500 किलोमीटर यात्रा तय कर गांव पहुंचे. अली 13 अप्रैल को मुंबई से चले थे. 27 अप्रैल को अपने गांव पहुंचे. जैसे ही वो अपने गांव मटखनवा के बाहरी इलाके में पहुंचे, उन्हें क्वारंटीन सेंटर ले जाया गया. कुछ घंटे बाद दोपहर में उनकी मौत हो गई. 'इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक, 35 साल के इंसाफ अली मुंबई के वसई में रहते थे. उनकी कोरोना वायरस टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. अगर रिपोर्ट निगेटिव आती है, तभी पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. उनकी पत्नी सलमा बेगम और परिवार सिर्फ अटकलें लगा रहा है कि अली की मौत कैसे हुई. पत्नी ने बताई आपबीती सलमा बेगम ने 'इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि फोन की बैटरी डाउन होने से पहले उन्होंने कहा था कि सिर्फ बिस्कुट खाकर जिंदा हैं. सलमा ने बताया कि वो अपने पति को देख भी नहीं पाईं, क्योंकि वो अपने माता-पिता के घर पर थीं. उन्होंने बताया कि उनके पहुंचने से पहले ही बॉडी जा चुकी थी. अली का पुरा परिवार क्वारंटीन में है. अली के दो बड़े भाई भी माइग्रेंट लेबर हैं. इस समय पंजाब में हैं. अली का छह साल का बेटा है. सलमा ने 'इंडियन एक्सप्रेस' को बताया,
अली 13 अप्रैल को मुंबई से निकले थे. उनके पास पैसे नहीं थे. उन्हें हफ्तों तक कोई काम नहीं मिला था. उन्होंने कहा कि गांव में कम से कम अपनों के पास रहेंगे. कोई न कोई जुगाड़ कर ही लेंगे. वह रास्ते भर मुझसे बात करते रहे. वो 10 अन्य लोगों के साथ झांसी तक आए. कभी पैदल, तो कभी ट्रक में छिपते-छिपाते. उन्होंने ड्राइवर को तीन हजार रुपए दिए. वहां से वो पैदल ही बहराइच आए. रविवार की रात पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया. लेकिन किसी तरह वो घाट के पास छिप गए. इसके बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया और हमारी कोई बात नहीं हुई.
सलमा का कहना है कि वो जिन लोगों के साथ यात्रा कर रहे थे, उन्होंने सभी को कॉल किया. लेकिन किसी को कुछ नहीं पता था. इसके बाद उन्होंने सोमवार, 27 अप्रैल को कॉल किया और मटखनवा बुलाया. जब तक वे पहुंचतीं, उससे पहले ही अली ने दम तोड़ दिया. सलमा का कहना है कि गांव वाले उनका बहिष्कार कर रहे हैं. उन्हें डर है कि मुझे कोरोना है. घर में अकेली सलमा का कहना है कि उन्हें अपने बच्चे की फिक्र हो रही है. पैसे नहीं हैं. वह बिस्कुट मांग रहा है. उसके साथ क्या होगा? पुलिस का क्या कहना है? श्रावस्ती के पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार सिंह ने बताया कि अली सुबह सात बजे के करीब मटखनवा पहुंचे. स्थानीय स्कूल में शुरुआती जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. उन्हें नाश्ता भी दिया गया, जिसके बाद उन्होंने आराम किया. लेकिन पांच घंटे के बाद उन्हें पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द की शिकायत शुरू हुई और तीन बार उल्टी भी हुई. इससे पहले कि डॉक्टरों को बुलाया जाता, अली की मौत हो गई, क्या बोले डॉक्टर? मुख्य चिकित्सा अधिकारी ए.पी.भार्गव ने बताया कि उन्होंने अली के कोरोना के सैंपल ले लिए थे. लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में टेस्ट के लिए भेज दिया था. रिपोर्ट सामने आने के बाद ही वे अली की मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए उसके शव का पोस्टमार्टम करेंगे.
जर्मनी के अस्पतालों में डॉक्टर्स अपनी किस मांग को पूरा करवाने के लिए इतनी मशक्कत कर रहे हैं?

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