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चेन्नई में डॉक्टर की डेडबॉडी के साथ जो हुआ, वो इंसानियत से भरोसा उठाने वाला है

साथी डॉक्टर ने इंटरव्यू में जो कहा वो हम सबको सुनना चाहिए.

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कोरोना संक्रमण की वजह से जिनकी मौत हुई बाएं डॉक्टर साइमन और दाएं वो एम्बुलेंस जिसपर भीड़ ने पत्थर चलाए (तस्वीरें इंडिया टुडे)

चेन्नई में एक डॉक्टर की COVID-19 से मौत हुई. जब शव को दफनाने के लिए उनके साथी और परिजन कब्रिस्तान पहुंचे, तो भीड़ ने एम्बुलेंस पर पत्थरों और लाठी से हमला कर दिया. मौक़े से डॉक्टर की पत्नी और बेटे को भागना पड़ा. तीसरी कोशिश में डॉक्टर के शव को दफनाया जा सका.

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एम्बुलेंस पर भीड़ के पथराव से इसके शीशे टूट गए और ड्राइवर को काफ़ी चोट आई (तस्वीर साभार इंडिया टुडे)
एम्बुलेंस पर भीड़ के पथराव से इसके शीशे टूट गए और ड्राइवर को काफ़ी चोट आई (तस्वीर साभार इंडिया टुडे)

# विस्तार में जानते हैं कि क्या हुआ

55 साल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर साइमन हरक्युलिस. अप्रैल की शुरुआत में कोरोना पॉजिटिव पाए गए. उनकी हालत ख़राब होती गई और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया. 19 अप्रैल को डॉक्टर साइमन की हार्ट अटैक की वजह से मौत हो गई.

डॉक्टर साइमन का शव उनके परिवार को दे दिया गया. शव दफनाने के लिए परिवार के लोग किल्पौक सिमेट्री गए. यहां इन्हें बताया गया कि सिमेट्री के पास काफी लोग जमा हो गए हैं, इसलिए उन्हें दूसरे कब्रिस्तान जाना चाहिए. यहां से परिवार एम्बुलेंस में वेलंगडू के एक कब्रिस्तान आया. यहां पहले से 70-80 लोग जमा थे. भीड़ ने एम्बुलेंस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. एम्बुलेंस स्टाफ़ को ये लोग डंडों से पीटने लगे. एम्बुलेंस का शीशा पूरी तरह से टूट गया और दोनों ड्राइवरों को काफ़ी चोटें आईं. एम्बुलेंस के पीछे अपनी कार से आए डॉक्टर प्रदीप एम्बुलेंस को वापस अस्पताल लेकर गए.

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इंडिया टुडे टीवी को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर प्रदीप कुमार ने जनता के बीच जागरुकता की कमी बताई (तस्वीर इंडिया टुडे)
इंडिया टुडे टीवी को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर प्रदीप कुमार ने कहा कि जनता में जागरूकता की कमी है (तस्वीर इंडिया टुडे)

इसके बाद डॉक्टर प्रदीप दूसरे कब्रिस्तान गए. इस बार पुलिस के साथ. ड्राइवर जख्मी थे, इसलिए डॉक्टर प्रदीप ने ख़ुद PPE किट पहनी और दो वॉर्ड बॉय साथ लिए. कब्रिस्तान के आस-पास भीड़ थी. लेकिन पुलिस ने मामला संभाल लिया. डॉक्टर प्रदीप ने बताया कि एक ही फावड़ा होने की वजह से उन लोगों को घंटे भर खुदाई करनी पड़ी. भीड़ के दोबारा हमले का भी डर था. इसलिए डॉक्टर साइमन का शव दफनाते ही वो लोग वहां से निकल गए.


# और क्या कहा साथी डॉक्टर ने?

डॉक्टर प्रदीप कुमार ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि डॉक्टर साइमन बेहद भले और ईमानदार डॉक्टर थे. वो इतने सज्जन व्यक्ति थे कि उनसे ऐसे नफ़रत कोई भी नहीं कर सकता था. उन्होंने पूरी घटना बताने के बाद हाथ जोड़कर कहा,

"हम डॉक्टर भी आपकी तरह ही कोरोना वायरस से डरे हुए हैं. अगर हम इस डर की वजह से आपका इलाज करना बंद कर देंगे तो और मौतें होंगी. और लाशें मिलेंगी. और तब आपके अपने लोग भी आपको दफनाने नहीं आएंगे. हम अपना काम कर रहे हैं, इसलिए प्लीज़ मेडिकल स्टाफ़ को सपोर्ट कीजिए. डॉक्टर साइमन रीति रिवाज़ से दफनाए जाने के हक़दार थे. उन्होंने अनगिनत लोगों की मदद की थी. उनके साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था."

आख़िरकार डॉक्टर प्रदीप कुमार को अस्पताल के दो लोगों को साथ लेकर ख़ुद एम्बुलेंस चलाकर कब्रिस्तान जाना पड़ा (तस्वीर इंडिया टुडे)
आख़िरकार डॉक्टर प्रदीप कुमार को अस्पताल के दो लोगों को साथ लेकर ख़ुद एम्बुलेंस चलाकर कब्रिस्तान जाना पड़ा (तस्वीर इंडिया टुडे)

# किसे मानते हैं ज़िम्मेदार?

डॉक्टर प्रदीप ने इस घटना के लिए अफ़वाहों को ज़िम्मेदार बताया. उन्होंने कहा,


"मैं इसके लिए लोगों को दोष नहीं देता. सोशल मीडिया समेत हर जगह बहुत सी ग़लत जानकारियां घूम रही हैं. लोगों के बीच जागरूकता नहीं है. लोग मोमबत्ती जला रहे हैं. थाली बजा रहे हैं लेकिन उन्हें पता नहीं कि वो ये किसलिए कर रहे हैं. मेरी अपनी मां को लगता है कि 9 बजे 9 मोमबत्ती जलाने से कोरोना मर जाएगा. सोचिए कि एक डॉक्टर की मां होकर ऐसा सोचती हैं वो. अगर मैं अपनी मां को नहीं समझा पा रहा तो बाक़ी लोगों को क्या समझाऊंगा. लोग ये जानते भी नहीं कि दफनाने से कोरोना का संक्रमण नहीं फैलता. वहां भीड़ हमें पीट रही थी. शव के साथ वापस जाने को कह रही थी. और आख़िरकार हमें वहां से भागना ही पड़ा."

# डॉक्टरों के संगठनों ने विरोध जताया

इस घटना पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन वेल्लोर ने भी अपील जारी की है. सरकार से अपील में कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं फिर से न हों ये सुनिश्चित करना चाहिए. साथ ही ये भी अपील की गई है कि लोगों को इस बारे में जागरूक करना चाहिए कि संक्रमित व्यक्ति के शव को दफनाने या जलाने से कोरोना संक्रमण का ख़तरा नहीं होता है. दफनाते या जलाते हुए WHO की जारी गाइडलाइन का पालन हो रहा है तो ख़तरे की कोई बात नहीं.

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# पुलिस क्या कहती है?

चेन्नई सिटी पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से मामले में गिरफ़्तारी की सूचना दी. लिखा कि 19 अप्रैल की रात अन्ना नगर में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन्होंने डॉक्टर साइमन के शव को दफनाने के दौरान पुलिस को ड्यूटी से रोका था.




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