1. पैसों का काम पति का है, शॉपिंग का पत्नी का
तो पति किसी के साथ मीटिंग कर रहा है. जाहिर है, वो ऑफिस में बैठा है. यानी पैसे कमाना उसका काम है. पत्नी शॉपिंग कर रही है. जाहिर है, वो ऑफिस नहीं जाती. जाती तो ऑफिस में होती. हो सकता है, जाती भी हो, लेकिन उसका कोई पर्सनल अकाउंट नहीं है. जो पैसे वो खर्च कर रही है वो या तो पति के अकाउंट से हैं. या फिर दोनों के जॉइंट अकाउंट से है. औरत काम करे, उड़ाए, अपने ऊपर. लेकिन यहां पति से पैसे लेने पड़ते हैं.2. पत्नी आपकी मजबूरियां नहीं समझती, केवल शॉपिंग करना चाहती है
पत्नी पैसे ट्रांसफर होने की कोई वजह नहीं जानना चाहती. नहीं जानना चाहती कि पति की कोई मजबूरी हो सकती है. पत्नी को बस अपने गहने चाहिए. क्योंकि वो तो केवल सजने-संवरने का काम करती है. दिमाग से काम नहीं लेती.3. पत्नी को डायमंड चाहिए हर हाल में, वो खुश हो जाएगी
डायमंड और औरत का तो मानो खून का रिश्ता हो. ये सिर्फ इस ऐड की बात नहीं. हर ऐड में देखा जाता है कि औरत को डायमंड मिल गया तो दुनिया मिल गई. डायमंड और गहनों के विज्ञापनों ने लोगों और खुद औरतों के दिमाग में ये भर दिया है कि हीरा औरतों के गर्व और आत्म-सम्मान को दिखाता है. जितना बड़ा हीरा, औरत उतनी ही खूबसूरत. औरतों की एलिगेंट और इंडिपेंडेंट छवि बनाने वाला यही हीरा ये भी सिखाता है कि औरतों की पहचान उनके गहने होते हैं. उस हिसाब से तो देश की 90 फीसदी महिलाओं का कोई आत्मसम्मान होगा ही नहीं. वो हीरे अफोर्ड जो नहीं कर पाएंगी.4. पत्नी को डायमंड देंगे तो बदले में वो आपको सेक्स देगी. यानी आपको काउच पर नहीं सोना पड़ेगा.
परोक्ष रूप से सेक्स का ज़िक्र आना मानो पति-पत्नी के प्यार पर मुहर सी है. सेक्स यहां पर एक इनाम की तरह है. जो पत्नी पति को तब देती है, जब वो गहने दिला देता है. वरना औरत 'हार्ड टु प्लीज' होती है. अगर उसे गहने दिला दो तो पिघल के सेक्स की इजाजत दे देती है. बैंकों में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी बहुत आगे निकल गई है. घर बैठे पैसों का ट्रांसफर, उनका लेन-देन कर सकते हैं. लेकिन जाने क्यों ये मानसिकता उस गति से नहीं बदल रही जिस गति से टेक्नोलॉजी बदल रही है. कब तक औरतें विज्ञापनों में पतियों के पैसों पर जीती रहेंगी? कब तक वो केवल गहने खरीदना, खाना बनाना और कपड़े धोने का काम करेंगी?ये भी पढ़ें:










