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ट्रेन, दफ्तर, स्कूल तो हॉस्पिटल बन गए, लेकिन अब बड़े हॉस्पिटलों के साथ ये क्या हो रहा है?

दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के हॉस्पिटलों में डॉक्टर-नर्स कोरोना पॉज़िटिव पाए जा रहे.

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बाईं ओर एक ट्रेन में बने आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टर्स. दाईं ओर मुंबई के बड़े अस्पतालों में से एक- लॉकहार्ट हॉस्पिटल, जहां से 26 नर्स और तीन डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. (फोटो- PTI और Business Today)
दिल्ली के पटपड़गंज इलाके में है मैक्स हॉस्पिटल. 27 अप्रैल की सुबह-सुबह ख़बर आई कि यहां के 33 हेल्थवर्कर कोरोना वायरस पॉज़िटिव पाए गए हैं. इन 33 में दो डॉक्टर हैं, 23 नर्स हैं और बाकी सपोर्ट स्टाफ. 145 नर्सों को ऐहतियातन क्वारंटीन किया गया है. अब लिमिटेड स्टाफ के साथ काम चलाया जा रहा है.
ये एक केस है. दिल्ली के कुछ और हॉस्पिटल के बारे में बताते हैं..
- बाबू जगजीवन राम अस्पताल से 50 हेल्थकेयर वर्कर कोरोना वायरस पॉज़िटिव. टेंपरेरी शटडाउन.
- बाबा साहब अंबेडकर हॉस्पिटल से 29. टेंपरेरी शटडाउन.
- दिल्ली स्टेट कैंसर हॉस्पिटल से 25. 7 अप्रैल को टेंपरेरी शटडाउन. अब कम स्टाफ के साथ काम शुरू.
- लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से 15. हॉस्पिटल स्टाफ की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग. फिलहाल शटडाउन नहीं.
- हिंदू राव हॉस्पिटल भी टेंपरेरी शटडाउन.
इसके अलावा एम्स से भी केस आ चुके हैं.
देश के तमाम दफ्तर, बड़ी बिल्डिंग, स्कूल और ट्रेनों तक को आइसोलेशन वॉर्ड में तब्दील किया जा रहा है. लेकिन दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई शहरों के हॉस्पिटल स्टाफ से ही लोग अब लगातार कोरोना पॉज़िटिव पाए जा रहे हैं. कई हॉस्पिटल ऐसे हैं, जहां से ज्यादा तादाद में स्टाफ क्वारंटीन किए जा रहे हैं. कई हॉस्पिटल को टेंपरेरी शटडाउन करने तक की नौबत आ रही है.
दिल्ली की ही तरह दो और जगहों का हाल बताते हैं.

महाराष्ट्र

- मार्च के अंत में सैफी हॉस्पिटल से पॉज़िटिव केस. ओटी और डायग्नोस्टिक्स यूनिट शटडाउन.
- वॉकहार्ट हॉस्पिटल. शहर के सबसे बड़े हॉस्पिटल में से एक. स्टाफ में से 29 लोग कोरोना पॉज़िटिव. टेंपरेरी शटडाउन. कंटेनमेंट ज़ोन घोषित.
इसी तरह चेन्नई में आंध्र महिला सभा हॉस्पिटल से तीन पॉज़िटिव केस आने के बाद हॉस्पिटल शटडाउन.
(हॉस्पिटल के डेटा का सोर्स – The Indian Express, India Today)
ये देश की तीन मेट्रो सिटी का हाल है- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई.
Lnjp 11 तस्वीर दिल्ली के LNJP हॉस्पिटल की है. यहां काफी संख्या में कोविड-19 पेशेंट ट्रीट किए जा रहे हैं. (फोटो- PTI)

हॉस्पिटल शटडाउन की दो संभावित वजहें
1 – टेस्ट में देरी. लगातार कहा गया है कि अस्पतालों में जो भी हेल्थकेयर वर्कर इस वक्त काम कर रहे हैं, उनका टेस्ट किया जाए. कितने टेस्ट हुए? सबके हुए, नहीं हुए, इसका कोई डेटा नहीं. देर से टेस्ट का नतीजा- इंफेक्शन.
2 – पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (PPE) की लगातार कमी. PPE किट्स का हाल इन दो ख़बरों से जानिए..
पहली – 26 अप्रैल को हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर
– गाज़ियाबाद के महिला हॉस्पिटल में कोरोना से बचाव की PPE किट्स नहीं थी, तो डॉक्टर ने HIV की PPE किट लगाकर एक कोरोना संदिग्ध महिला की डिलिवरी की.
दूसरी – 17 अप्रैल की बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर
– यूपी के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इतनी घटिया क्वालिटी की PPE किट्स पहुंचीं कि प्रदेश सरकार ने इन किट्स को लेने से ही इनकार कर दिया.
जो डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ 24 घंटे कोरोना सस्पेक्ट के बीच रह रहे हैं, उन्हें ऐसे लस्त-पस्त रवैये के साथ इंफेक्शन बचाना मुश्किल हो रहा है. नतीजा- इंफेक्शन और फिर हॉस्पिटल बंद करने तक की नौबत.
प्राइवेट हॉस्पिटल्स मरीज़ लेने से मना कर रहे
अमर उजाला
की एक ख़बर के मुताबिक- रोहतक के प्राइवेट हॉस्पिटल ने एक COVID-19 संदिग्ध मरीज को लेने से इनकार कर दिया था. वहीं दैनिक जागरण
की ख़बर के मुताबिक ऐसा ही केस लुधियाना से भी आया था, जहां मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, तो अस्पताल ने दूसरी जगह रेफर कर दिया.
शहर से लगातार कोरोना के केस आने के बाद यही हाल इंदौर में भी हो रहा था, जिसके बाद प्रशासन को कहना पड़ा था कि अगर किसी प्राइवेट हॉस्पिटल ने किसी मरीज को लेने से इनकार किया, तो FIR तक दर्ज़ हो सकती है.
क्यों टरका रहे हैं मरीज़ों को?
यानी एक दिक्कत ये भी आ रही है कि तमाम प्राइवेट हॉस्पिटल्स मरीज़ों को लेने में ही कतरा रहे हैं. ख़ासकर उनको, जिन्हें COVID-19 जैसे लक्षण हैं. मुमकिन है कि इसके पीछे डर हो कि कहीं उनके डॉक्टर्स या स्टाफ को भी इंफेक्शन न हो जाए. और ये इंफेक्शन बढ़ा तो शटडाउन भी हो सकता है.
लेकिन अगर अस्पताल ही मरीज़ को लेने में हील-हुज्जत करने लगे, तो वो जाएंगे कहां? बेड खाली छोड़ देना इंफेक्शन और शटडाउन से बचने का रास्ता तो नहीं है.



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