संक्षेप में उधम सिंह की कहानी
13 अप्रैल, 1919 को जब अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ, तब वहां कई जवान लड़के भी मौजूद थे. वो वहां बैसाखी मनाने और पंजाब के लोकल नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए जमा हुए तकरीबन 20, 000 लोगों को चाय-पानी पिलाने का काम कर रहे थे. इतने में ब्रिगेडियर जनरल डायर अपने जवानों के साथ वहां पहुंचा और भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलावानी शुरू कर दी. इसमें हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए और 1500 लोग घायल हो गए थे.
वहां चाय-पानी पिला रहे लड़कों में से एक उधम सिंह ने इस हत्याकांड का बदला लेने की बात अपने मन में ठान ली. वो इंडिया में बैन हो चुकी लेकिन बाहर से ऑपरेट हो रही गदर पार्टी से जुड़ गए. कुछ सालों बाद इंडिया लौटे और अवैध हथियार रखने के जुर्म में जेल चले गए. 1931 में जेल से निकलने के बाद अंग्रेज़ों की नज़र से दूर रहने के लिए कश्मीर गए और फिर वहां से जर्मनी होते हुए लंदन पहुंच गए. लंदन पहुंचकर उन्होंने इंजीनियर की नौकरी कर ली. साथ ही साथ वो जलियांवाला बाग हत्याकांड के दौरान पंजाब के गवर्नल रहे माइकल ओ ड्वेयर से बदला लेने की प्लानिंग भी करते रहे. 13 मार्च, 1940 को ईस्ट इंडिया असोसिएशन की मीटिंग थी, जहां ड्वेयर का भी भाषण होना था. उधम सिंह यहां पहुंचे और जैसे ही ड्वेयर बोलने के लिए स्टेज की ओर बढ़ा उधम सिंह ने उन्हें दो गोली मारी. और वहीं खड़े रहे.

उत्तराखंड में उधम सिंह के सम्मान में एक जिले का नाम उधम सिंह रखा गया है. साथ ही कई जगह पर उनकी हाथ में रिवॉल्वर ली हुई मूर्तियां भी लगी हुई हैं.
उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया गया. वहां उधम सिंह विरोध में खाना तक नहीं खा रहे थे. जेल के अधिकारी उन्हें जिंदा रखने के लिए जबरदस्ती खाना खिला रहे थे. 42 दिन के इंतज़ार के बाद उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया गया. यहां उन्होंने बताया कि जो उन्होंने किया, वो 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला था. माइकल ओ ड्वेयर को मारने के जुर्म में उन्हें लंदन के कोर्ट में मौत की सज़ा हुई. इसके बाद उन्होंने कोर्ट के सामने एक भाषण दिया, जिसे कोर्ट के आदेश पर कभी मीडिया में नहीं आने दिया गया. इतने सब के बाद 31 जुलाई, 1940 को उन्हें लंदन के पेंटनविल जेल में फांसी दे दी गई. हालांकि 1939-40 के बीच लिखी उधम सिंह की डायरी में कई जगह जनरल डायर और माइकल ओ ड्वेयर के नाम के साथ कंफ्यूज़न पाया गया है.
पहले ये फिल्म इरफान करने वाले थे
लेकिन वो बीमार हो गए. और ठीक होने के बाग उन्हें लगा कि रिकवरी के फौरन बाद उन्हें शारीरिक श्रम की दरकार रखने वाले किरदारों से बचना चाहिए. इसलिए उन्होंने ये फिल्म छोड़ दी. इसके बाद फिल्म में विकी कौशल को साइन कर लिया गया. फिलहाल तो फिल्म में विकी के ही होने की बात सामने आई है. लेकिन पीरियड ड्रामा होने की वजह से इसमें और भी कई ऐतिहासिक किरदारों के लिए जगह है. ये किरदार कौन लोग करते हैं, ये देखना इंट्रेस्टिंग रहेगा. शहीद उधम सिंह के किरदार में विकी कौशल का पहला लुक सामने आया है, जिसमें वो डायरेक्टर शूजीत सरकार और प्रोड्यूसर रॉनी लाहिड़ी के साथ नज़र आ रहे हैं:

शिउली खिलाने के सरकार ये फिल्म बना रहे हैं
सरकार माने शूजीत सरकार. वो पिछले 20 साल से उधम सिंह की कहानी पर फिल्म बनाना चाहते थे. वो अपने दिल्ली के दिनों में एक बार स्वर्ण मंदिर घूमने गए. यहां उन्होंने पास में ही बने जलियांवाला बाग भी देखा. उसे देखने के बाद वो इस फील में घुस गए कि यहां जो कुछ घटा, वो बहुत दर्दनाक रहा होगा. इसके बाद उन्हें उधम सिंह की कहानी पता चली. और उन्होंने तय कर लिया कि मुंबई जाते ही इस कहानी पर फिल्म बनाएंगे. मुंबई पहुंचने के बाद उनके पास संसाधनों की कमी ही रही, जिसकी वजह से ये फिल्म टलती रही. लेकिन अब वो फाइनली अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुके हैं. फिल्म की शूटिंग अभी बस शुरू ही हुई है. अगले साल यानी 2020 में इसके रिलीज़ होने के चांसेज़ हैं.
वीडियो देखें: विकी कौशल बनेंगे उधम सिंह और शूजीत सरकार होंगे डायरेक्टर














