ओडिशा में पिछले पांच साल में 3,565 लोगों की मौत सांप काटने के बाद उचित इलाज न मिलने के कारण हुई है. कोरोना वायरस के इलाज के लिए लाए गए वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल स्नेक बाइट के मामलों में हो सकेगा.
द हिंदू ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के साथ काम कर रहे वैज्ञानिक प्रत्यूष महापात्रा से इस पर बातचीत की. प्रत्यूष के अनुसार सांप के काटने पर जो टॉक्सिन शरीर में जाता है और नर्व सिस्टम को प्रभावित कर देता है. इस इलाके में मिलने वाला करैत सांप बेहद जहरीला और खतरनाक होता है.
सांप के काटने के बाद शरीर में क्या होता है? सांप काटने के ज्यादातर मामलों में पेट दर्द और उल्टी की शिकायत होती है. लेकिन यह जहर के शरीर के भीतर फैलने के लक्षण हैं. धीरे-धीरे शरीर में न्यूरोटॉक्सिन फैल जाता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. इसके चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. ऐसी स्थिति में वेंटिलेटर न होने पर जान भी जा सकती है.
ओडिशा में सांप के काटने को 2015 में राज्य-विशिष्ट आपदा (स्टेट स्पेस्फिक डिज़ास्टर) घोषित किया गया था. सांप काटने से इतनी मौतों और विशिष्ट आपदा घोषित होने के बावजूद अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं बढ़ाई गई.

एक अनुमान के मुताबिक ओडिशा में सांप काटने के बाद 85% से ज्यादा मौतें, मई से अक्टूबर के बीच में होती हैं.तस्वीर साभार PTI.
अब COVID-19 से निपटने के उपाय के तौर पर राज्य सरकार, सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर लगवा रही है. स्वास्थ्य विभाग के स्टेट डायरेक्टर बिजय महापात्रा ने द हिंदू को बताया,
COVID-19 से पहले हमारे पास 297 वेंटिलेटर थे. अब हमने 57 नए वेंटिलेटर लगवाए हैं जबकि प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों में भी वेंटिलेटर को लेकर काफी सुधार हुआ है.पिछले एक महीने में सरकार ने COVID-19 से निपटने के लिए 34 अस्पतालों में 5,486 बेड बनाये हैं. इन 34 अस्पतालों में सिर्फ COVID-19 से संक्रमित मरीजों का ही इलाज हो रहा है. इन में से कुल 352 ICU के बेड हैं. इनमें से अधिकतर पर वेंटिलेटर की सुविधा है. जिनका इस्तेमाल बाद में स्नेक बाइट के मामलों में हो सकेगा.
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