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दिलजीत दोसांझ स्टारर 'सतलुज' दिखाने वालों के खिलाफ सरकार लेगी लीगल एक्शन!

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू के कई गुरुद्वारों में फिल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग रखी गई थी.

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'सतलुज' को पिछले चार सालों से सेंसर बोर्ड की हरी झंडी नहीं मिली है.

Diljit Dosanjh स्टारर Satluj को रिलीज़ के 48 घंटे बाद Zee5 से हटा दिया गया. ऐसे में लोग बड़ी संख्या में इसकी पायरेसी करने लगे. कुछ राज्यों में तो गुरुद्वारा समिति की तरफ से ही इसकी पब्लिक स्क्रीनिंग रखी जाने लगी. मगर केंद्र सरकार ने उन सब पर लगाम कसने का फैसला किया है. खबर है कि सरकार 'सतलुज' की अवैध स्क्रीनिंग करने वालों के खिलाफ़ लीगल एक्शन लेने की तैयारी में है.

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'सतलुज' यानी 'पंजाब 95' साल 2022 से ही बनकर तैयार है. मगर सेंसर बोर्ड ने इसमें 127 कट्स लगाने के निर्देश दिए. इस कारण पिछले चार सालों से फिल्ममेकर हनी त्रेहान और सेंसर बोर्ड के बीच खींचतान चल रही थी. मेकर्स फिल्म में इतने कट्स लगाने को तैयार नहीं थे. मगर 03 जुलाई को मेकर्स ने अचानक इसे Zee5 पर 'सतलुज' नाम से रिलीज़ कर दिया. फिल्म दो दिनों तक वहां रही मगर 05 जुलाई को इसे वहां से ही हटा दिया गया. NDTV ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपने सूत्र के हवाले से बताया कि मेकर्स ने सेंसर बोर्ड की इजाज़त के बगैर ही फिल्म को OTT पर डाल दिया था. इसी वजह से उस पर रोक लगा दी गई है.

खैर, फिल्म हटने के बाद दिलजीत ने एक इंस्टाग्राम लाइव किया था. उसमें उन्होंने लोगों से कहा कि वो फिल्म को डाउनलोड करके देखें व अन्य लोगों से भी शेयर करें. दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने फिल्म पायरेसी की बात कही थी. उनके अलावा अनुराग कश्यप ने भी खुलेआम ऐसा करने को कहा था. इस वजह से फिल्म इल्लीगली इंटरनेट पर तैरने लगी. Zee5 ने तो ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर लोगों को फिल्म पायरेसी करने से मना किया. मगर लोगों ने एक न सुनी. मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक, बात तब और बढ़ गई, जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) ने ‘सतलुज’ की स्क्रीनिंग का फैसला किया. इसके बाद पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू के कई गुरुद्वारे ऐसा करने लगे. देखते-ही-देखते सैकड़ों-हजारों लोग मुफ़्त में इस फिल्म को देखने लगे.

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लेकिन इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया कि केंद्र सरकार इस तरह की स्क्रीनिंग के खिलाफ़ लीगल एक्शन लेने वाली है. चूंकि फिल्म को अब तक सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है, इसलिए उसकी ऐसा प्रदर्शनी गैर-कानूनी है. हालांकि यहां एक बात ग़ौरतलब है, वो ये कि ओटीटी पर रिलीज़ के लिए फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं होती. सेंसर सर्टिफिकेट सिर्फ थिएटर्स में रिलीज़ होने वाली फिल्मों को दिया जाता है. बावजूद इसके केंद्र की तरफ से राज्य सरकारों को ये आदेश दिया गया है कि जहां कहीं भी 'सतलुज' की स्क्रीनिंग हो रही, वहां कड़े एक्शन लिए जाएं. हालांकि उनके इस फैसले के पीछे पायरेसी से ज़्यादा फिल्म का विवादित कॉन्टेन्ट जिम्मेदार है. दूसरी तरफ, हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट में ‘सतलुज’ को दोबारा Zee5 पर लाने के लिए पिटीशन फ़ाइल कर दी गई है. केंद्र सरकार ने इस फिल्म के कॉन्टेंट की जांच के लिए हाई लेवल इंटरडिपार्टमेंटल कमिटी का गठन किया है. उसकी रिपोर्ट के आधार पर फिल्म का भविष्य तय होगा.

वीडियो: दिलजीत दोसांझ स्टारर 'सतलुज' OTT पर दोबारा रिलीज होगी?

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