Samay Raina के India's Got Latent का पहला सीजन विवादों से भरा था. उनमें एक विवाद दिव्यांगों से भी जुड़ा था. समय ने तब दो महीने के ऐसे बच्चे को लेकर जोक किया था, जो एक जानलेवा बीमारी से जूझ रहा था. इस बात के लिए उन्हें कई मेडिकल संस्थानों समेत सुप्रीम कोर्ट ने भी लताड़ा था. हालांकि कोर्ट ने तब सुधार की उम्मीद जताते हुए उन्हें कुछ गाइडलाइंस दिए थे. मगर समय ने उनका पालन नहीं किया. इस बात के लिए उन्हें जजों की फटकार के साथ 3 लाख का हर्जाना भरने का आदेश मिला है.
"समय कोर्ट को बेवकूफ बना रहे", कोर्ट ने समय रैना पर लगाया लाखों का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना उन्हें गुमराह कर रहे हैं. अगली बार सीधे 30 लाख का जुर्माना लगेगा.


सुप्रीम कोर्ट की नई सजा पर बात करने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर समय ने अपने शो पर कहा क्या था. दरअसल, एक एपिसोड के दौरान उन्होंने एक चैरिटी ड्राइव का जिक्र किया. उस ड्राइव के तहत Spinal Muscular Atrophy नाम की जानलेवा बीमारी से लड़ रहे एक दो महीने के बच्चे को इंजेक्शन दिलवाने की कोशिश की जा रही थी. उस इंजेक्शन का दाम 16 करोड़ रुपए था. इस बात का जिक्र करते हुए समय ने ऑडियंस में बैठी एक महिला से पूछा,
"मैम, मान लीजिए कि आप उस बच्चे की मां हैं और आपके खाते में 16 करोड़ रुपए आ जाएं. आपकी गोद में दो महीने का बच्चा भी होता. ऐसे में क्या आप एक बार अपने पति की तरफ देखकर ये नहीं सोचतीं कि महंगाई बहुत बढ़ गई है? ऐसा फैसला लेना आसान नहीं होता, क्योंकि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं कि बच्चा बच भी पाएगा या नहीं."
समय के इस इन्सेंसिटिव बयान पर तब CURE SMA ((Spinal Muscular Atrophy) Foundation of India ने एक पिटीशन फ़ाइल की थी. उसमें समय के साथ शो में मौजूद विपुल गोयल, बलराज सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर को भी लपेटे में लिया गया. तब सुप्रीम कोर्ट में समय ने खुद को जस्टीफाई करने की कोशिश की थी, जिस पर उन्हें खूब फटकार पड़ी. इसके अलावा उन्हें प्रायश्चित के लिए कुछ काम बताए गए. इनमें दिव्यांगों के लिए महीने में दो फंड रेज़िंग इवेंट रखने के अलावा उन्हें ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ में बुलाने का आदेश भी दिया गया था.
मगर बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, समय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया. कोर्ट का कहना है कि समय ने अदालत को गुमराह किया है. इस बात के लिए उन पर और पैनल के बाकी चारों लोगों पर तीन-तीन लाख का जुर्माना लगाया गया है. उन्हें ये जुर्माना दो हफ्तों के भीतर भरना होगा.
CURE SMA की तरफ से सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ये केस लड़ रही हैं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि समय ने किसी भी दिव्यांग को अपना शो जॉइन करने के लिए कॉन्टैक्ट नहीं किया है. इस बात ने जजों को और नाराज कर दिया. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के पास समय से बेहतर यूथ आइकन हैं. उन्होंने समय को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि वो समाज में रहने वाले लोगों की इज्जत नहीं करेंगे तो उन्हें इसका बुरा परिणाम झेलना पड़ेगा.
वैसे, बहस के दौरान समय के वकील ने बताया कि ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ में दिव्यांगों के लिए 9 लाख रुपए जुटाए गए थे. इस पर CURE SMA की वकील अपराजिता ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें किसी के पैसे नहीं चाहिए. जज भी इस बात से सहमत होते दिखे. उन्होंने कहा कि समय को एडवोकेट अपराजिता के क्लाइंट को 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट' पर बुलाना चाहिए था. जवाब में समय के वकील ने बताया कि उन्होंने दिव्यांगजनों को शो पर बुलाया था, जिनकी तस्वीरें उनके पास सुरक्षित हैं. पर यदि एडवोकेट अपराजिता के क्लाइंट वहां नहीं पहुंचे, तो ये उन्हें इस बात का खेद है.
सुनवाई के अंत में कोर्ट ने समय से कहा कि वो उन्हें लंबे समय से छूट देते आए हैं. वो भी इसलिए क्योंकि जज उन्हें अच्छे परिवार का समझते थे. बावजूद इसके, उनकी हरकतों में कोई सुधार नहीं आ रहा है. इतना कहकर कोर्ट ने उन पर 3 लाख का जुर्माना लगा दिया. वैसे, पहले जुर्माने की रकम 10 लाख थी. मगर फिर उसे घटा दिया गया. हालांकि अदालत ने साफ शब्दों में ये कहा कि यदि समय उनके आदेशों का पालन नहीं करते तो उन्हें 30 लाख रुपए चुकाने होंगे.
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