46 साल के जादव गोगोई असम के नगांव जिले के रहने वाले हैं. वे गुजरात के वापी शहर में काम करते थे. लेकिन लॉकडाउन के चलते उनका काम भी बंद हो गया. दो दिन तक तो वे वापी में ही रहे. लेकिन 27 मार्च को वहां से घर के लिए निकल पड़े. जिस समय रवाना हुए उस समय उनके पास केवल 4000 रुपये थे.
उन्होंने हाइवे पकड़ा. इसके सहारे आगे बढ़ते गए. रास्ते में ट्रक वालों से लिफ्ट भी ली. और वे ऐसे करते-करते बिहार तक पहुंच गए. इस दौरान उनके पैसे, मोबाइल फोन और कुछ सामान चोरी हो गया. जादव के पास कुछ नहीं बचा. बिहार से उन्होंने फिर से पैदल यात्रा शुरू की. फिर बंगाल होते हुए 19 अप्रैल की रात में नगांव जिले के राहा पहुंच गए. रात में सड़क किनारे ही सो गए.

जादव गोगोई लॉकडाउन के बीच गुजरात से असम चले गए.
सुबह स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा. उन्होंने फौरन पुलिस को खबर दी. पुलिस ने उनसे खोज-खबर की. तो जादव ने बताया कि वह गढरिया करौनी गांव के रहने वाले हैं. और पैदल चलकर यहां तक पहुंचे हैं.
जादव ने कहा-
मैंने 27 मार्च को चलना शुरू किया. मैंने पुलिस और सरकारी विभाग से मदद मांगी. लेकिन उन्होंने मना कर दिया. यहां आने के लिए मैं बिहार से पैदल रवाना हुआ. लॉकडाउन की वजह से मुझे यह सफर करना पड़ा.
राहा के लोगों और पुलिस की मदद से जादव गोगोई को अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने बताया कि उनकी सेहत ठीक है. वे राज्य के बाहर से आए हैं. ऐसे में नियमों के तहत उन्हें14 दिन क्वारंटीन में रहना होगा.
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