बीते साल भारत के सबसे बड़े फ़िल्म पुरस्कार ‘दादासाहेब फाल्के’ से नवाज़ी गई एक्ट्रेस आशा पारेख (Asha Parekh) ने चर्चित फ़िल्म द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) और इसके मेकर्स पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोड्यूसर्स ने इतने पैसे कमाए हैं लेकिन उन कश्मीरी पंडितों को कुछ नहीं दिया, जिन पर ये फ़िल्म आधारित है. उन्होंने News18 को दिए इंटरव्यू में ऐसी बातें कहीं.
कश्मीरी पंडितों पर बनी फ़िल्म के मेकर्स से आशा पारेख ने पूछा-400 करोड़ कमाए, तो उन्हें कितने दिए?
आशा पारेख से 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी फ़िल्मों के बारे में सवाल किया गया था.


इस इंटरव्यू में आशा पारेख से पूछा गया कि 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी फ़िल्में जिन्हें लेकर बहुत विवाद हुआ, उन्हें लेकर वे क्या सोचती हैं? तो उन्होंने कहा -
"मैंने (ये) पिक्चर देखी नहीं हैं तो कॉन्ट्रोवर्सी के बारे में कैसे बात करूं."
उनसे पूछा गया कि क्या ऐसी फ़िल्में बननी और देखी जानी चाहिए? इस पर आशा का कहना था कि अगर लोगों को पसंद है तो देखनी चाहिए.
जब यह सवाल किया गया कि 'द कश्मीर फाइल्स' हिट भी हुई, और लोगों ने देखी भी, तो इस पर आशा पारेख ने तीखी टिप्पणी की.
उन्होंने कहा -
“हां देखी. और थोड़ा सा कॉन्ट्रोवर्शियल बयान मैं यहां देना चाहती हूं. फिल्म के प्रोड्यूसर ने 400 करोड़ रुपये कमाए, तो जो हिंदू कश्मीरी है, और जम्मू में रहते हैं, और जिनके पास पानी, बिजली नहीं है, उनको उन्होंने कितने पैसे दिए?”
इस पर फ़िल्म के प्रोड्यूसर के हवाले से एक बात कही गई जिसका लब्बोलुबाब यह था कि फिल्म बनाने वाले प्रोड्यूसर को ही कमाई का सारा पैसा नहीं मिल जाता है.
आशा जी ने इस पर कहा -
“फ़िल्म डिस्ट्रीब्यूटर का एक शेयर होगा. उनका (प्रोड्यूसर) का भी शेयर होगा. मान लीजिए कि उन्होंने फिल्म की 400 करोड़ की कमाई में से 200 करोड़ भी बनाए तो वो लोगों (कश्मीरी पंडितों) की मदद के लिए 50 करोड़ रुपये तो दे सकते थे न?”
2022 में रिलीज़ हुई 'द कश्मीर फाइल्स' बेहद चर्चित, बेहद कामयाब और डिबेट पैदा करने वाली फ़िल्म थी. इसे विवेक अग्निहोत्री और अभिषेक अग्रवाल ने मिलकर प्रोड्यूस किया था. अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार और चिन्मय मंडलेकर लीड रोल में थे. यह फ़िल्म 1990 के दौर के कश्मीर को वहां के पंडितों के नज़रिए से बताती है जिन्हें आतंकवाद का सामना करना पड़ा, जिनकी हत्याएं की गईं और जिन्हें जान बचाने के लिए अपने घर-बार छोड़कर भागना पड़ा. उन्हें अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर होना पड़ा. 'द कश्मीर फाइल्स' को नरगिस दत्त अवॉर्ड फॉर नेशनल इंटीग्रेशन का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था.
चार दशक से ज्यादा समय तक हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम रहीं आशा पारेख अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं. सीबीएफसी की पूर्व अध्यक्ष रहीं आशा पारेख ने इस साल के शुरू में शाहरुख़ ख़ान की ‘पठान’ के गाने ‘बेशरम रंग’ में दीपिका की ड्रेस के कलर को लेकर हुए विवाद पर भी बात की थी. उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड को यूं निशाना बनाया जाना गलत है. उन्होंने कहा था कि अगर यूं हर फ़िल्म के बैन की मांग होने लगी तो फ़िल्म इंडस्ट्री का क्या होगा. उन्होंने इस गाने का विरोध करने वाले लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आप ख़ुद सेंसरशिप करने लगे तो फिर सीबीएफसी की क्या ज़रूरत रह जाएगी.
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