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RRR की तरह अक्षय कुमार भी 'मिशन रानीगंज' को ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भेजेंगे

साल 2024 में होने वाले ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए इंडिया ने '2018' फिल्म को अपनी ऑफिशियल एंट्री बनाकर भेजा है. अब अक्षय कुमार ने स्वतंत्र रूप से 'मिशन रानीगंज' को ऑस्कर्स के लिए भेजने का फैसला किया है.

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साल 2023 वाले ऑस्कर्स के लिए इंडिया ने 'छेल्लो शो' को भेजा था. तब RRR वालों ने इंडिपेंडेंट रूप से अपनी फिल्म जमा की थी.

बीती 06 अक्टूबर को Akshay Kumar की फिल्म Mission Raniganj सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई. फिल्म को क्रिटिक्स की तरफ से अच्छे रिव्यूज़ मिले. वो बात दूसरी है कि फिल्म सिनेमाघर की कुर्सियां भरने के लिए स्ट्रगल कर रही है. ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के मुताबिक अक्षय की फिल्म ने पहले हफ्ते में 18.25 करोड़ रुपए कमाए. उनके डेटा के मुताबिक ‘मिशन रानीगंज’ का दूसरे शुक्रवार यानी 13 अक्टूबर का कलेक्शन करीब 4 करोड़ रुपए रहेगा. फिल्म भले ही सिनेमाघरों में नहीं चल रही लेकिन मेकर्स को उस पर बहुत भरोसा है. यही वजह है कि मेकर्स अपनी फिल्म को ऑस्कर अवॉर्ड के लिए जमा करेंगे. DNA में छपी खबर के मुताबिक ‘मिशन रानीगंज’ की टीम अपनी फिल्म को स्वतंत्र रूप से ऑस्कर्स में भेजने वाली है. 

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अमेरिका से बाहर वाले देशों के लिए अपनी फिल्म को ऑस्कर्स में सबमिट करवाने के दो रास्ते होते हैं. पहला तो देश की तरफ से ऑफिशियल एंट्री बनकर जाए. ये फिल्में बेस्ट फॉरेन फिल्म की कैटेगरी में नॉमिनेशन के लिए लड़ती हैं. इंडिया में फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया नाम की जूरी कुछ फिल्में देखती हैं और उसमें से एक का चुनाव किया जाता है. इस जूरी में सिनेमा के अलग-अलग डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट्स शामिल होते हैं. इंडिया की तरफ से साल 2024 में होने वाले ऑस्कर्स के लिए मलयालम फिल्म 2018 को ऑफिशियल एंट्री बनाकर भेजा है. ये साल 2018 में केरल राज्य में आई भयंकर बाढ़ की घटनाओं पर आधारित फिल्म है. 

दूसरा तरीका होता है ‘एकला चलो रे’ वाला. यानी आप स्वतंत्र ढंग से अपनी फिल्म को जमा करवाएं. इसमें फिर आपकी फिल्म बेस्ट फॉरन फिल्म के अलावा तमाम कैटेगरीज़ में नॉमिनेट हो सकती है. किसी भी फिल्म के प्रोड्यूसर इस रास्ते जाकर अपनी फिल्म जमा कर सकते हैं. हालांकि खेल सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता. अकैडमी अवॉर्ड्स की जूरी में 10,000 लोग शामिल हैं. वही लोग फिल्मों के लिए वोटिंग करते हैं. मसला है कि अकैडमी के मेम्बर्स की लिस्ट में ज़्यादातर अमेरिकी लोग हैं. वो उसी फिल्म के बारे में ज़्यादा अवेयर होते हैं, जिसने या तो अमेरिका में खूब धूम मचाई हो, या फिर उसका नाम दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल्स में चमका हो. 

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वोटिंग वाली जूरी के बीच अपनी फिल्म को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए मेकर्स कैम्पेन चलाते हैं. विदेशों में फिल्म को प्रमोट करते हैं. कई सारी स्क्रीनिंग रखी जाती हैं. ‘लगान’ के वक्त आमिर खान कई महीनों तक अमेरिका में रहे थे. फिल्म को जमकर प्रमोट किया. कुछ ऐसा ही एसएस राजामौली ने RRR के समय भी किया था. लॉस एंजिल्स में फिल्म के कई शोज़ रखे गए. उन स्क्रीनिंग से वीडियो वायरल हुए, जहां वो ‘नाटु नाटु’ पर नाचते दिखाई दे रहे थे. आगे नतीजा ये हुआ कि वो गाना बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग का ऑस्कर घर ले आया. इसी तरह फिल्म वाले हाइप बनाने की कोशिश करते हैं. अगर ‘मिशन रानीगंज’ के मेकर्स अपनी फिल्म को ऑस्कर्स में भेजते हैं, तो उनमें भी मैदान पर उतरकर प्रमोशन शुरू करना होगा.              

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