मध्य प्रदेश में फिर डॉक्टर और पुलिस टीम पर हमला, ASI घायल
डॉक्टरों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन के लिए सरकार ने कानून बदला है.
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डॉक्टर्स, मेडिकल टीम और पुलिस पर हमले रुक ही नहीं रहे हैं. हमले में घायल पुलिसवाला (दाएं)
मध्य प्रदेश में कोरोना वॉरियर्स पर हमले का एक और मामला सामने आया है. यहां श्योपुर जिले में पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर हमला किया गया. श्योपुर के गसवानी गांव में टीम पर उस वक्त हमला किया गया था, जब वे गोपाल शिवहरे के पास चेकअप करने गए थे, जो हाल ही में इंदौर से गांव आए थे. सब इंस्पेक्टर श्रीराम अवस्थी को पत्थर लगने से सिर में चोट आई है. गोपाल के पिता गंगाराम ने टीम को बताया कि उनका बेटा घर पर नहीं है और वो ठीक है. उन्होंने अपने बेटो को सामने लाने से इनकार कर दिया. टीम लीडर डॉक्टर पवन उपाध्याय ने मदद के लिए गसवानी थाने से हेल्प मांगी. एसआई श्रीराम अवस्थी तीन पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और गंगाराम को अपने बेटे को चेकअप के लिए भेजने को कहा. इसके बाद विवाद हुआ. आरोप है कि गोपाल की मां, पिता और बड़े भाई ने पुलिस पर पत्थर बरसाए. एक अधिकारी ने कहा कि अवस्थी के सिर में चोट लगी, उसके बाद खून बहने लगा. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जबकि गोपाल समेत चार लोगों पर आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. आगे की जांच जारी है. पहले भी हुए हैं हमले इससे पहले इंदौर में 18 अप्रैल को मेडिकल टीम पर हमले का मामला सामने आया था. पुलिस ने बताया था कि गलतफहमी में मेडिकल टीम पर हमला हुआ था. इंदौर के डीआईजी एचएन मिश्रा ने बताया था कि झगड़े के समय मेडिकल टीम सर्वे कर रही थी. उसके सदस्य सर्वे के तहत रिकॉर्डिंग कर रहे थे. ऐसे में आरोपी पारस को लगा कि वे झगड़े को रिकॉर्ड कर रहे हैं. उसने एक महिला से फोन छीना और तोड़ दिया, पर उसने उस पर हमला नहीं किया. हालांकि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. एक अप्रैल को भी टाटपट्टी बाखल इलाके में कोरोना स्क्रीनिंग करने गयी टीम पर हमला किया गया था. इंदौर के अलावा बल्कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, मेरठ, राजस्थान के टोंक में भी स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले हुए हैं. सरकार ने कानून में किया बदलाव बता दें कि 22 अप्रैल को ही केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव किया है, जिससे डॉक्टरों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके. 123 साल पुराने Epidemic Diseases Act, 1897 में बदलाव किया है. डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने वालों को तीन महीने से सात साल तक की सजा हो सकती है. मेडिकल वर्कर्स पर हमला करने वालों को जमानत भी नहीं मिलेगी. 30 दिन के अंदर मामले की जांच पूरी होगी. एक साल के अंदर फैसला आएगा. गाड़ी या क्लीनिक का नुकसान करने पर बाजार रेट से दोगुना नुकसान हमला करने वालों से वसूल किया जाएगा.
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