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15 इंडियन फिल्में जो इस हफ्ते शुरू हो रहे मामी फिल्म फेस्ट में देखनी चाहिए

इनमें शाहरुख़ ख़ान की एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म भी है जो 1991 में आई और लोगों को पता भी नहीं.

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अहमक़, डंकी इन द ब्राह्मिन विलेज, वक्रतुंड महाकाय, अ डेथ इन द गंज, रेलवे चिल्ड्रेन और एनाटमी ऑफ वॉयलेंस फिल्मों के दृश्य.

1. Lipstick Under My Burkha

चार औरतों की कहानी है जो अपनी-अपनी आज़ादी की तलाश में हैं. एक है कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की जो अपनी cultural identity में फंसी है. उसे बुर्का पहनकर कॉलेज जाना पड़ता है लेकिन उसकी हसरत एक पॉप सिंगर बनने की है. एक लड़की है जो ब्यूटीशियन है. वो अपने छोटे शहर की दम घोंटू जिंदगी से दूर जाना चाहती है. तीसरी कैरेक्टर एक पीड़ित हाउसवाइफ है जिसके तीन बच्चे हैं. वो सेल्सवुमन होने की एक दूसरी ही दुनिया में भी जीती है. चौथी है एक 55 साल की विधवा जो टेलीफोन के रोमांस के जरिए अपनी यौनिकता को फिर से जिंदा पाती है. इस फिल्म का निर्देशन अलंकृता श्रीवास्तव ने किया है जिन्होंने 'गंगाजल', 'अपहरण' और 'राजनीति' जैसी फिल्मों में प्रकाश झा को असिस्ट किया है. प्रकाश इस फिल्म के निर्माता भी हैं. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=TKOjCP6mXWE&feature=youtu.be

2. An Insignificant Man

इस डॉक्यूमेंट्री के केंद्र में हैं अरविंद केजरीवाल. वे जब आम आदमी पार्टी बनाने जा रहे थे तब दो युवा निर्देशकों - खुशबू रांका और विनय शुक्ला ने उनकी तमाम गतिविधियों, बैठकों, प्रक्रियाओं को रिकॉर्ड किया. दो साल तक ये सिलसिला चला. फिर काफी समय इसकी एडिटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन पर बिताया गया. भारतीय राजनीति कैसे काम करती है इसका एक बहुत अंदरूनी पहलू इस फिल्म में देखने को मिलेगा जो पहले कभी नहीं देखा गया है. इस फिल्म का निर्माण 'शिप ऑफ थिसीयस' वाले आनंद गांधी ने किया है. इसका इंडिया प्रीमियर मामी फेस्ट में होने जा रहा है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=9iCWYwtyVy8

3. A Death in the Gunj

इस कहानी के केंद्र में श्यामल चैटर्जी नाम का शर्मीला लड़का है जिसका प्यार का नाम शूटु भी है. वो अपने सेमेस्टर एग्जाम में फेल हो गया है लेकिन परिवार में किसी को बताया नहीं है. स्थिति से बचने के चक्कर में वो परिवार के साथ रोड ट्रिप करते हुए मेकक्लोस्कीगंज (झारखंड) जाता है. उसके साथ उसकी कज़िन बॉनी की कुंआरी दोस्त भी है जिस पर शूटु का क्रश है. वह यहां लाइफ और नेचर को नए सिरे से अनुभव करता है. फिल्म के अंत तक रिश्तों में भीतरी धमाका हो चुका होता है जिसका किसी को भी अंदाजा नहीं होता. बात 1979 की है. ये मामी की ओपनिंग फिल्म है और इसका निर्देशन कोंकणा सेनशर्मा ने किया है. फिल्म में विक्रांत मेसी (लुटेरा, दिल धड़कने दो), रणवीर शौरी, कल्कि कोचलिन, तिलोतमा शोम (किस्सा), गुलशन दैवय्या (हंटर, द गर्ल इन यैलो बूट्स), तनुजा, ओम पुरी व अन्य एक्टर्स ने काम किया है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=CPfY8t0K_DI&feature=youtu.be

4. LOEV

वॉल स्ट्रीट के लेवल पर काम करने वाला तुर्रमखां आदमी है जय. वह दो दिन के लिए मुंबई आता है और इस ट्रिप को मज़े में तब्दील करना चाहता है. इसमें उसकी मदद करता है उसका म्यूजिक प्रोड्यूसर दोस्त साहिल. साहिल अपने बॉयफ्रेंड एलेक्स को भी पीछे छोड़कर जय के साथ महाराष्ट्र की पहाड़ियों, जंगलों में हाइकिंग पर चला जाता है. इस दौरान दोनों अपनी दोस्ती और प्रेम को डिस्कवर करते हैं. लेकिन कहानी में मोटा मोड़ आ जाता है जब एलेक्स भी पहुंच जाता है. रिश्ते और भी जटिल होते जाते हैं. ये फिल्म सुधांशु सरिया ने डायरेक्ट की है. इसमें शिव पंडित (शैतान), ध्रुव गणेश और सिद्धार्थ मेनन ने लीड रोल किए हैं. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=qLGmo6kc6LQ

5. Railway Children

राजू घर से भागा हुआ है. सिर्फ 12 साल का है. डर और असुरक्षाओं के बीच पहली बार वो रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजारा करने को मजबूर है. यहां वो गैर-कानूनी काम करने वाले एक गैंग के संपर्क में आता है. गैंग में उसी की उम्र का नशेड़ी लड़का जोल्लू है. वो राजू को सिखाता है कि प्लेटफॉर्म पर जिंदा कैसे रहा जाता है. यहां पानी बेचने का अलग ही धंधा होता है. फिर राजू, जोल्लू और एक तीसरा लड़का मिलकर बिना अपने बॉस को बताए खुद ही पानी बेचना शुरू कर देते हैं. लेकिन इससे उनकी जिंदगी ख़तरे में पड़ जाती है. कन्नड़ भाषा वाली इस फिल्म का निर्देशन पृथ्वी कोनानूर ने किया है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=dG03VdnWP2o&feature=youtu.be

6. Shree Devi Phataka

मुंबई की एक चॉल में रहने वाले पांच सीधे-सादे लोगों की ये कहानी 1984 के टाइम की है. अरुण नाम का 8 साल का बच्चा बाजार में आए एक बहुत महंगे और नए 'श्रीदेवी पटाखा' के पीछे पागल है और इसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार है. लेकिन उसके किए का असर बाकियों की जिंदगी पर भी पड़ता है. ये पांचों पात्रों के सपनों की बात भी है, कि क्या वे पूरे होंगे? क्या भाटकर काका अपना बिजनेस सेट कर पाएंगे? क्या मिथुन का फैन रमेश उनकी बेटी से शादी करने में उन्हें राज़ी कर पाएगा? क्या आजी को अपने मन की चीज़ मिलेगी? क्या मोहन अपने सालाना स्कूल पिकनिक पर जा सकेगा? और क्या अरुण अपनी चॉल का हीरो बन जाएगा? ये मुंबई के निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की कहानी है. उनकी चुनौतियों और उनकी छोटी-छोटी खुशियों की. इस मराठी फिल्म का निर्देशन नवीन वी. चपाड़े ने किया है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=nlbn2zEe64U&t=11s

7. Revelations

शोभा एक तमिल महिला है जो कोलकाता में अपने पति शेखर के साथ रहती है. शेखर एक अख़बार में रिपोर्टर है. चार साल की इसकी शादीशुदा जिंदगी में तनाव हैं. इस कारण शोभा का अपने अधेड़ तमिल पड़ोसी मनोहर से एक जटिल रिश्ता बन जाता है. मनोहर का एक रहस्यमय अतीत है. शेखर भी अपनी साथी रिपोर्टर दिव्या के प्रति आकृष्ट हो जाता है. वह बंगाली युवती है और जिंदगी से जो चाहती है उसे लेकर बहुत स्पष्ट और ओपन है. ये कहानी पछतावे, फीमेल सेक्सुएलिटी, शहरी जीवन, मानव जीवन की जटिलताओं और भारतीय शादियों के विषय को छूती है. इस तमिल फिल्म का निर्देशन विजय जयपाल ने किया है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=MBgUtRUFY_s&feature=youtu.be

8. India In A day

अक्टूबर 2015 में भारत के लोगों से कहा गया कि वे अपनी जिंदगी, आकांक्षाओं और सपनों को वीडियो में कैद करें और भेजें. जवाब में 16,000 से ज्यादा वीडियो भेजे गए जो 365 घंटों से ज्यादा लंबे थे. इनमें लोगों के बेहद निजी और ईमानदार क्षण कैद थे. राजस्थान, केरल, अंडमान देश के कोने कोने से लोगों ने अपनी वीडियो कहानियां भेजीं. इसी से ये फिल्म बनाई गई. ये इस सदी का ताज़ा-ताज़ा भारत है. डायरेक्टर ज़ोया अख्तर, आर. बाल्की और शेखर कपूर ने इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया. ऑस्कर विजेता स्टीफन वॉरबेक ने म्यूजिक कंपोज किया. 'इंडिया इन अ डे' को डायरेक्ट किया है रिची मेहता ने. हॉलीवुड दिग्गज रिडली स्कॉट, अनुराग कश्यप और गूगल ने मिलकर इसे प्रोड्यूस किया है. 2010 में भी इसी कॉन्सेप्ट पर इसी नाम वाली फिल्म बनाई गई थी जिसमें 192 देशों के लोगों की फुटेज इस्तेमाल की गई थी. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=Yca5n6mdOPI&feature=youtu.be पूर्व में आया एक लंबा ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=-0O11qq4j24

9. You Are My Sunday

पांच दोस्त हैं - अर्जुन, राशिद, डोमिनिक, मेहरनोश और जयेश. कंक्रीट, गाड़ियों और लोगों से भरे अपने शहर मुंबई में ये सुकून पाते हैं तो रविवार को जुहू बीच पर फुटबॉल खेलकर. एक दिन एक बुजुर्ग भी उनके साथ खेलने आ जाता है. वो बॉल को ऐसी किक मारता है कि एक सोशलाइट-पोलिटिशियन को जा लगती है जो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही होती है. इत्ते के बाद तट पर सभी खेल बंद करवा दिए जाते हैं. अब इन पांचों दोस्तों के लिए रविवार की बेहद आवश्यक प्रैक्टिस बंद हो जाती है. पांचों अपने-अपने काम और दुनिया में खो जाते हैं. उनका बचपना खो जाता है. उनकी दोस्ती की परीक्षा होती है. इसकी भी कि जीवन का मतलब क्या है, खुशी क्या है और इसे पाने के लिए वे किस हद तक जाएंगे. 'यू आर माई संडे' को डायरेक्ट किया है मिलिंद धायमडे ने जिन्होंने 2008 में आई बेहद अच्छी फिल्म 'हल्ला' के डायलॉग लिखे थे. फिल्म हिंदी, अंग्रेजी और कोंकणी में है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=lzsnTXd9zGk&feature=youtu.be

10. Vakratunda Mahakaaya

एक आतंकी ग्रुप ने गणेश जी के एक गुड्‌डे में बम लगा दिया है. किसी को पता नहीं. ये प्लान खराब होने लगता है जब अल्ताफ नाम का एक आवारा लड़का इसे उठा लेता है और भाग जाता है. वो गणेश के गुड्‌डे के प्रेम में पड़ जाता है. बाद में अल्ताफ को उसके चोर दोस्त पपलू के साथ पुलिस पकड़कर ले जाती है. गुड्‌डा पार्क की बेंच पर पीछे छूट जाता है और फिर कई लोगों के हाथों में आता-जाता है. सब इस गुड्‌डे को भगवान की तरह मानते हैं लेकिन इसका इस्तेमाल अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए करते हैं. लेकिन किसी को ये नहीं पता कि इसमें बम है. 'वक्रतुंड महाकाय' के निर्देशक पुनर्वसू नायक इससे पहले 'भूतनाथ रिटर्न्स' (2014) के एसोसिएट डायरेक्टर रहे हैं. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=2K9pbjFJXo0&feature=youtu.be पांच और फिल्में जो फेस्टिवल की हाइलाइट रहेंगी.

11. Idiot (अहमक़)

5624110AHMAQ_nastassya-roghozin meeta-shahrukh copy 1991 में आई इस फिल्म का निर्देशन आर्टहाउस सिनेमा के सेलेब्रिटी मणि कौल ने किया था. ख़ास बात ये है कि इसमें तब के नए एक्टर शाहरुख ख़ान ने प्रमुख रोल किया था. अपने पूरे करियर में उन्होंने इससे ज्यादा एक्सपेरिमेंटल फिल्म दूसरी नहीं की. ब्रिटिश पाकिस्तानी एक्टर अयूब ख़ान-दीन ने अन्य प्रमुख रोल किया था. हाल ही में एक न्यूज़ प्रोग्रैम के एंकर की बद्तमीजी के कारण शो छोड़ देने वाली मीता वशिष्ठ ने लीड रोल किया था. 1991 में इसे टीवी मिनी सीरीज के तौर पर दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था. ये कहानी दोस्तएवस्की के नॉवेल 'द इडियट' पर आधारित है. मुंबई और गोवा में ये कहानी घटती है. शुरू होती है मिस्किन से जो मिर्गी का इलाज करवाने के बाद लंदन से लौटा है. उसकी बीमारी के कारण लोग उसे इडियट समझ लेते हैं. उसकी मुलाकात खूबसूरत नस्तासिया से होती है जिसके पीछे रईस युवक पवन रघुजन और महत्वाकांक्षी गणेश पड़ा है. संघर्ष चलता है. कहानी का प्रस्तुतिकरण बहुत प्रयोगी तरीके से रखा गया है.

12. Kalpana

0hommage_KALPANA1.be662cd2fda0f214c0cc433e4ddb4532.b84331840fbcdaf8aac9955fa0394d75 मॉडर्न डांस की दुनिया के भारी आदमी उदय शंकर ने 1948 में ये फिल्म बनाई थी जिसकी रीलें बर्बाद हो गईं थीं लेकिन अब इसे शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर के वर्ल्ड सिनेमा फाउंडेशन द्वारा डिजिटल तौर पर रिस्टोर किया जा रहा है. पद्मविभूषण से सम्मानित उदय शंकर पहले थे जिन्होंने भारतीय डांस को पश्चिमी देशों में प्रचारित किया. उन्होंने साथ ही इंडियन डांस की टेक्नीक में यूरोप के डांस की टेक्नीक मिलाई. भारत रत्न सितार वादक रवि शंकर उनके छोटे भाई थे. कल्पना के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, राइटर, एक्टर ख़ुद उदय शंकर ही थे. उनकी पत्नी अमाला शंकर ने भी लीड रोल किया था. ये फैंटेसी वाले अंदाज में कही गई कहानी है. एक लेखक है जो एक प्रोड्यूसर को एक कहानी सुनाता है जिस पर अंत में प्रोड्यूसर फिल्म नहीं बनाता. इसमें कहानी में कहानी होती है उदयन और कामिनी की जो हिमालय में अपना कला केंद्र खोलना चाहते हैं. मद्रास के जेमिनी स्टूडियोज़ में इसकी शूटिंग की गई थी. भारत की आइकॉनिक फिल्मों में कल्पना को गिना जाता है.

13. Agraharathil Kazhutai (Donkey in the Brahmin Village)

Agraharathil-Kazhuthai0001_01 इंडिया के जीनियस फिल्मकार और लैजेंड डायरेक्टर जॉन अब्राहम ने 1977 में ये तमिल फिल्म बनाई थी जिसे नेशनल अवॉर्ड भी मिला. जॉन मलयालम में फिल्में बनाते थे, ये तमिल में बनाई. इस फिल्म को अपने समय में बैन कराने की पूरी कोशिश की गई क्योंकि इसमें ब्राम्हणवादी सोच पर व्यंग्य किया गया है. 1989 में दूरदर्शन ने तय प्रसारण होने के बावजूद इसे टीवी पर नहीं दिखाया. ये कहानी नारायण स्वामी नाम के प्रोफेसर की है जो ब्राह्मणों के एक गांव में रहता है. यहां लोगों की भीड़ एक गधी को मार देती है. ये प्रोफेसर उसके नवजात बच्चे को गोद लेता है. लेकिन गांव वालों को आपत्ति हो जाती है. बाद में कहानी बहुत विचित्र मोड़ों से गुजरती है.

14. Trapped

मामी में इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर होने जा रहा है. इसका निर्देशन किया है 'उड़ान' और 'लुटेरा' वाले विक्रमादित्य मोटवानी ने. पिछले साल सिर्फ एक महीने से कम समय में इसे शूट किया गया था. 'ट्रैप्ड' अगले साल फरवरी में रिलीज हो सकती है और उसके बाद इसे नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध करवाया जाएगा. इस फिल्म की पहली झलक अभी नहीं आई है. 'शाहिद' और 'अलीगढ़' फेम राजकुमार राव ने इसमें लीड रोल किया है. ये कहानी एक आदमी के बारे में है जो मुंबई के एक अपार्टमेंट में 25 दिनों तक कैद रहता है. ये उसके इस दौरान सरवाइव करने की कहानी है.

15. Maroon

ये कहानी है देहरादून की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले क्रिएटिव राइटिंग के प्रोफेसर की. उसकी पत्नी धोखा देती है जो एक म्यूजिक टीचर है. अब वो इस 'अपमान' के साथ जीने का संघर्ष कर रहा है. इस दर्द के परिणाम में उसे आत्मग्लानि और डर होने लगता है. उसे भ्रम होने लगता है. इसी भ्रम और सच्चाई के बीच उसकी व अन्य किरदारों की डर, थ्रिल भरी कहानी चलती है. इस फिल्म में मानव कौल ने लीड रोल किया है जो 'सिटी लाइट्स' और 'काई पो छे' जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं. 'मरून' का निर्देशन पुलकित ने किया है. उन्होंने 2013 में एक शॉर्ट फिल्म 'बॉम्बे 1992' बनाई थी. ये उनकी पहली फीचर है. ट्रेलर: https://www.youtube.com/watch?v=n2MLZJ77RNc

भारत से जुड़े विषय वाली तीन फिल्में भी हैं जो फेस्ट में दिखाई जाएंगी जिन्हें देखना चाहिए. पहली है, दीपा मेहता के डायरेक्शन वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म Anatomy Of Violence जो दिल्ली गैंगरेप के संदर्भ में बात करती है कि वो कौन सी परिस्थितियां हैं जिनसे अपराधियों का निर्माण होता है. ये उस समाज की बात करती है जहां से अपराधी आते हैं. दूसरी कैनेडियन डॉक्यूमेंट्री है Mostly Sunny. इसका निर्देशन दिलीप मेहता ने किया है. ये पूर्व एडल्ट-स्टार सनी लियोनी की लाइफ को फॉलो करती है. तीसरी डॉक्यूमेंट्री है ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह पर आधारित जिसका इंडिया प्रीमियर यहां होगा. फिल्म का नाम है 'काग़ज की कश्ती'.

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