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भारतीय सेना को 'मोदी की सेना' कहकर फंस गए योगी आदित्यनाथ

चुनाव आयोग में शिकायत करने की तैयारी हो गई है.

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योगी आदित्यान के बयान की शिकायत चुनाव आयोग से करेंगे पूर्व नेवी चीफ एल.रामदास
इंडियन आर्मी यानी कि भारतीय सेना. इनका एक सिद्धांत है ‘सेवा परमो धर्म:’ जिसका अंग्रेजी मतलब होता है ‘सर्विस इज़ आवर ड्यूटी’. संस्कृत और अंग्रेजी में बता दिए. अब हिंदी में जानिए. हिंदी में इसका मतलब होता है ‘देश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है’. तीन भाषाओं में ढूंढ लिया और हर जगह यही मिला कि भारतीय सेना, देश के लिए है, देश की सुरक्षा के लिए है. कहीं भी ढूंढने पर ‘मोदी जी’ का नाम नहीं मिला. जैसा कि योगी आदित्यनाथ दावा कर रहे हैं.
31 मार्च यानी कि रविवार को उनकी एक रैली थी. गाजियाबाद के बिसाहड़ा गांव में. वो वीके सिंह के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे. इस रैली में उन्होंने देश की सेना को ‘मोदी जी की सेना’ बता दिया. इस बात पर अब काफी विवाद बढ़ चुका है. आर्मी से रिटायर हो चुके कई लोग इस बयान का विरोध कर रहे हैं. दूसरी तरफ मीडिया में खबरें चलने पर चुनाव आयोग ने खुद ही इसका संज्ञान लिया है. आयोग ने इस मामले पर डिटेल रिपोर्ट मांगी है. जिस पर गाज़ियाबाद के जिलाधिकारी रिपोर्ट तैयार करेंगे. रविवार को हुई रैली के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा:
कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे और मोदी जी की सेना आतंकवादियों को गोली और गोला देती है.’
जब योगी आदित्यनाथ रैली कर रहे थे. तभी रैली में अखलाख हत्याकांड के आरोपी विशाल सिंह भी मौजूद थे. वे बीजेपी के पक्ष में नारे लगा रहे थे. ‘योगी-योगी’ कर रहे थे. हमलावर मोड में आ गए विपक्षी दल
योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद विपक्ष हमलावर मोड में आ गई. कांग्रेस ने योगी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय सेना को ‘मोदी की सेना’ बताकर जवानों के पराक्रम और शहीदों का अपमान किया है. ऐसा करके उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन किया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर सीपीआई नेता डी राजा तक ने योगी आदित्यनाथ के इस बयान की आलोचन की. डी राजा ने तो यहां तक कहा कि 'बीजेपी सेना के नाम का इस्तेमाल कर जनता को डराने की राजनीति कर रही है'. विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की. इस मामले में पूर्व नेवी चीफ एडमिरल एल रामदास ने भी आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने योदी आदित्यनाथ के बयान को निराशाजनक बताया है. साथ ही उन्होंने इस मामले को चुनाव आयोग के पास लेकर जाने की बात की है.
वैसे योगी आदित्यनाथ का बयान क्लियर कट चुनाव आयोग के आदेश का उल्लंघन है. चुनाव आयोग ने 19 मार्च को ही एक नोट जारी करके कहा था कि किसी भी हाल में कोई भी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के दौरान सैनिक या फिर सैन्य अभियानों का ज़िक्र नहीं करेंगे.
19 मार्च को चुनाव आयोग ने नोट जारी कर राजनीतिक पार्टियों को सेना के नाम का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी थी.
19 मार्च को चुनाव आयोग ने नोट जारी कर राजनीतिक पार्टियों को सेना के नाम का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी थी.

लेकिन इसके बावजूद सेना के नाम का इस्तेमाल जारी रहा. अब विपक्ष चुनाव आयोग के इसी नोट का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग कर रहा है.


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