31 मार्च यानी कि रविवार को उनकी एक रैली थी. गाजियाबाद के बिसाहड़ा गांव में. वो वीके सिंह के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे. इस रैली में उन्होंने देश की सेना को ‘मोदी जी की सेना’ बता दिया. इस बात पर अब काफी विवाद बढ़ चुका है. आर्मी से रिटायर हो चुके कई लोग इस बयान का विरोध कर रहे हैं. दूसरी तरफ मीडिया में खबरें चलने पर चुनाव आयोग ने खुद ही इसका संज्ञान लिया है. आयोग ने इस मामले पर डिटेल रिपोर्ट मांगी है. जिस पर गाज़ियाबाद के जिलाधिकारी रिपोर्ट तैयार करेंगे.
‘कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे और मोदी जी की सेना आतंकवादियों को गोली और गोला देती है.’
योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद विपक्ष हमलावर मोड में आ गई. कांग्रेस ने योगी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय सेना को ‘मोदी की सेना’ बताकर जवानों के पराक्रम और शहीदों का अपमान किया है. ऐसा करके उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन किया है.
वैसे योगी आदित्यनाथ का बयान क्लियर कट चुनाव आयोग के आदेश का उल्लंघन है. चुनाव आयोग ने 19 मार्च को ही एक नोट जारी करके कहा था कि किसी भी हाल में कोई भी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के दौरान सैनिक या फिर सैन्य अभियानों का ज़िक्र नहीं करेंगे.

19 मार्च को चुनाव आयोग ने नोट जारी कर राजनीतिक पार्टियों को सेना के नाम का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी थी.
लेकिन इसके बावजूद सेना के नाम का इस्तेमाल जारी रहा. अब विपक्ष चुनाव आयोग के इसी नोट का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग कर रहा है.












