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मुजफ्फरनगर दंगे का वो आरोपी, जिसे बीजेपी ने टिकट दिया है

दागी हर पार्टी में हैं, लेकिन बीजेपी का दावा है कि वो 'अलग चाल, चरित्र और चेहरे' वाली पार्टी है.

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बीजेपी कैंडिडेट सुरेश राणा

राष्ट्रीय राजधानी से सहारनपुर हाइवे पर 120 किलोमीटर चलने पर मिलता है शामली. इसका एक कस्बा है थाना भवन. ये शामली की तीन विधानसभाओं में से एक है. बाकी दो विधानसभाएं शामली और कैराना हैं. यहां की लोकसभा सीट शामली के सांसद बीजेपी के हुकुम सिंह हैं. बताते हैं कि इसका नाम स्थानीय मंदिर 'देवी भवन' की वजह से पड़ा है. 18वीं शताब्दी तक यहां हिंदू और मुस्लिम परिवारों की संख्या लगभग बराबर थी, लेकिन मौजूदा वक्त में मुस्लिमों की तादाद ज्यादा है.

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थाना भवन मौलाना अशरफ अली साहब की वजह से भी फेमस है, जो अपने जमाने के मशहूर स्कॉलर रहे हैं, लेकिन आज इस कस्बे में सिर्फ पांच इंटर कॉलेज हैं और एक डिग्री कॉलेज. इस डिग्री कॉलेज के खुलने से पहले लड़कों को पढ़ने दूसरे शहरों तक जाना पड़ता था. अशरफ अली के बारे में हजार से ज्यादा किताबें लिखने की बात कही जाती है. मौलाना साहब का घर, उनकी कब्र और खानका (मस्जिद, मदरसा और लाइब्रेरी) थाना भवन के लोगों के लिए गर्व की चीज है. यहीं के विधायक सुरेश राणा को मुजफ्फरनगर दंगे में आरोपी बनाया गया और नेशनल सिक्यॉरिटी एक्ट के तहत मुकदमा चलाया गया.


संगीत सोम के साथ सुरेश राणा
संगीत सोम के साथ सुरेश राणा

पिछले चुनाव का हाल

थाना भवन में 2012 में कुल 2,85,142 वोटर्स थे जिनमें 1,58,780 पुरुष और 1,26,356 महिलाएं थीं. इनमें से 96,483 पुरुषों और 78,462 महिलाओं ने वोट दिया था.

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2012 के विधानसभा चुनाव में थाना भवन से बीजेपी के सुरेश राणा को जीत मिली थी. उन्हें 53,719 (30.68%) वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे थे रालोद के प्रत्याशी अशरफ अली खान, जिन्हें 53,454 (30.52%) वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर बीएसपी के अब्दुल वारिस खान थे, जिन्हें 50,001 (28.55%) वोट मिले थे. चौथे नंबर पर सपा के किरन पाल कश्यप थे, जिन्हें 10,198 (5.82%) वोट मिले थे. कश्यप के बाद के सभी कैंडिडेट्स दो हजार से कम वोटों पर सिमट गए थे.

2012 के चुनाव में थाना भवन का हाल

ये चुनाव बहुत ही नजदीकी अंतर से जीता गया था. सुरेश राणा को अशरफ अली से महज 265 वोट (0.15%) ज्यादा मिले थे और 2007 के विजेता विधायक अब्दुल वारिस, सुरेश से महज 3,718 वोट पीछे थे. कह सकते हैं कि सुरेश किस्मत की वजह से चुनाव जीते थे.


2007 और उससे पहले के चुनाव: पार्टी बदली, तो कुर्सी गई

https://www.youtube.com/watch?v=VWIxUBCT9so

1993 में ये सीट बीजेपी के पास थी और विधायक थे जगत सिंह. 1996 के चुनाव में सपा के आमिर अलम खान बीजेपी के धरम पाल सिंह को हराकर विधायक बने थे. 2000 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ था, जिसमें सपा के जगत सिंह ने रालोद की राव मुसर्रत बेगम को हराया था. 2002 के विधानसभा चुनाव में जगत सिंह ने सपा छोड़ रालोद का दामन थाम लिया, जिसके बाद उन्हें सपा के किरन पाल के हाथों हार झेलनी पड़ी थी. 2007 के चुनाव में अब्दुल वारिस खान रालोद के टिकट पर बीएसपी के अनूप सिंह से जीते थे. 2012 के चुनाव में उन्होंने रालोद छोड़कर बीएसपी का हाथ थाम, तो बीजेपी के सुरेश कुमार से हार गए.


थाना भवन का अतीत: 10 हजार से बड़ी जीत नहीं

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थाना भवन की राजनीति में पार्टियां हमेशा से अपने जातीय गणित के मुताबिक ठाकुर, कश्यप, मुस्लिम और वैश्य कैंडिडेट्स को टिकट देती रही हैं. 1967 के चुनाव में जनसंघ ने यहां से जाट बिरादरी के ओमप्रकाश को प्रत्याशी बनाया था. उसके बाद से 2012 तक किसी पार्टी ने जाट कैंडिडेट नहीं खड़ा किया. इस बार सपा ने ये दांव खेला है. यहां हर चुनाव जीतने में जाट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वो कभी विधायक नहीं बने.

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1993 में बीजेपी के जगत सिंह यहां 12,000 से ज्यादा वोटों से जीते थे. उसके बाद से यहां का हर चुनाव 10,000 से कम वोटों के अंतर से जीता गया है. 1996 में सपा के आमिर अलम 2000 वोटों से जीते थे. साल 2000 में सपा के जगत सिंह करीब 1500 वोटों से जीते थे. 2002 में सपा के किरण पाल लगभग 9500 वोटों से जीते थे. 2007 में रालोद से अब्दुल वारिस कोई 5000 वोटों से जीते थे. 2012 में बीजेपी से सुरेश राणा 265 वोटों से जीते थे.

https://www.youtube.com/watch?v=qk0alksFn7o

शुरुआत से अब तक हमेशा जनरल रही इस सीट पर कांग्रेस-सपा तीन-तीन बार, बीजेपी दो बार और रालोद एक बार चुनाव जीत चुकी है. बीएसपी का यहां अभी तक खाता नहीं खुला है.


इस बार के कैंडिडेट

बीजेपी - सुरेश राणा


बीजेपी कैंडिडेट सुरेश राणा
द लल्लनटॉप से बात करते बीजेपी कैंडिडेट सुरेश राणा.

बीजेपी ने एक बार फिर मौजूदा विधायक सुरेश राणा पर भरोसा जताया है. पिछला चुनाव वो 265 वोटों से जीते थे और मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान बहुत एक्टिव रहे. दंगे के आरोपियों में इनका भी नाम था और इन्हें अरेस्ट भी किया गया था. अब जब बीजेपी ने इन्हें टिकट दिया, तो सोशल मीडिया पर पार्टी की खूब खिल्ला उड़ी, क्योंकि पार्टी परिवारवाद और दागी नेताओं से बचकर चलने की बात कह रही थी. आरोपों पर इनका कहना है कि सपा ने बदले की राजनीति की और शासन ने इन्हें आरोपी बना दिया. उनके एफिडेविट के मुताबिक वे सिर्फ 12वीं पास हैं और राजनीति में आने से पहले खेती करते थे. इन पर रासुका भी लग चुका है और चार आपराधिक मामले हैं. वैसे इन्हें बीजेपी के स्टार प्रचारकों में जगह नहीं मिली है.

बीएसपी -  राव अब्दुल वारिस


राव अब्दुल वारिस
राव अब्दुल वारिस

बीएसपी ने थाना भवन से एक बार फिर राव अब्दुल वारिस को खड़ा किया है. पिछले चुनाव में ये तीसरे नंबर पर थे और करीब 3500 वोटों से हार गए थे. इनके पिता राव अब्दुल राफे खां 1969 में थाना भवन सीट से ही बीकेडी के टिकट पर विधायक बने थे. 2000 में इनकी मां राव मुशर्रत बेगम ने रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सपा के जगत सिंह से हार गई थीं. वारिस 2007 में रालोद के टिकट पर जीतकर विधायक रह चुके हैं.

रालोद - जावेद राव

रालोद ने इस चुनाव में जावेद राव को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस चुनाव में दो हिंदू कैंडिडेट्स के सामने ये दूसरे मुस्लिम हैं. सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद की बात करते हैं. एफिडेविट के मुताबिक साक्षर हैं. इनके पास 20 लाख से ज्यादा की संपत्ति है. पत्नी शबनम के पास करीब 2.5 लाख की संपत्ति है. जावेद को कैंडिडेट बनाकर रालोद ने मुस्लिम-जाट गठजोड़ साधने का प्रयास किया है, जो सपा और बीजेपी, दोनों का नुकसान कर सकता है.

सपा-कांग्रेस - डॉ. सुधीर पंवार


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डॉ. सुधीर पंवार

सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ से यहां डॉ. सुधीर पंवार को टिकट दिया गया है. ये सपा नेता हैं. पंवार का टिकट फाइनल होने से पहले शामली के सपा अध्यक्ष किरणपाल कश्यप टिकट की उम्मीद में थे, लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. खबरें थीं कि सपा को नुकसान पहुंचाने के मकसद से वो रालोद से लड़ेंगे, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. कश्यप 1992 से सपा में हैं.

सपा ने पंवार के तौर पर जाट कैंडिडेट उतारकर नया समीकरण साधा है. 1967 के बाद से थाना भवन में पहली बार कोई जाट चुनाव में उतर रहा है. पंवार लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और यूपी योजना आयोग के सदस्य भी. उनके पास कोई कार नहीं है, लेकिन संपत्ति करीब 9 लाख रुपए है. पत्नी संगीता के पास करीब 2.5 लाख की संपत्ति है. पंवार पर कोई आपराधिक मामला नहीं है. सपा के अंदरूनी बवाल में ये खुलकर अखिलेश के साथ थे.

https://www.youtube.com/watch?v=t2BdhMwxz2U

थाना भवन के वोटर्स

कुल वोटर: 3,10,307 ब्राह्मण: 14 हजार ठाकुर: 20 हजार वैश्य: 4 हजार सैनी: 21 हजार मुस्लिम: 93 हजार जाट: 42 हजार एससी: 60 हजार कश्यप: 11 हजार


सहारनपुर के वोटर्स:

दलित: 25% मुस्लिम: 32% ब्राह्मण: 9% यादव: --




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