यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर उठापटक जारी है. कयास लग रहे हैं कि गठबंधन होगा या नहीं. होगा तो कांग्रेस को सपा कितनी सीटें देगी. ये कयास लगाना छोड़ो. ये जान लो कि ये सब जो कांग्रेस के साथ यूपी में हो रहा है, वो एक पुराना बदला चुकाया जा रहा है. अखिलेश यादव अपने पिता का बदला ले रहे हैं. और आप अब तक ये ही सोच रहे हैं कि बाप-बेटे में बन नहीं रही. झगड़ा हो रहा है. ये बात अखिलेश एक बार कह भी चुके हैं, 'वो पिता ही रहेंगे और मैं उनका बेटा. इस बात को कोई बदल नहीं सकता.' तो अखिलेश यादव ने कैसा बदला लिया है कांग्रेस से, ये जान लो.
आखिरकार अखिलेश यादव ने बाप की बेइज्जती का बदला ले ही लिया
'जो न हुआ बाप का, वो क्या होगा आप का' नारे लगाने से अब क्या हो, जब चिड़िया चुग गई खेत.
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फोटो - thelallantop
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बात ज्यादा पुरानी नहीं है. साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए. बीजेपी मजबूती से उभर रही थी. हौसले इसलिए बुलंद थे, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में जबरदस्त जीत दर्ज कर चुकी थी. बिहार में खुद को कमज़ोर देख कर भाजपा विरोधियों में एक महागठबंधन हुआ. नाम दिया गया जनता परिवार. आरजेडी, जदयू, कांग्रेस और सपा एक मंच पर आ गए. 243 सीटों पर चुनाव होने थे. कांग्रेस ने चाल खेली और जेडीयू-आरजेडी से मिलकर फटाफट सीटों का बंटवारा कर डाला. और मलाई समेट ली. समाजवादी पार्टी को इस बैठक में शामिल भी नहीं किया गया.
इसी बैठक में जेडीयू और आरजेडी ने 100-100 सीटें और कांग्रेस ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. बाकी बची तीन सीटें. लेकिन समाजवादी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि शरद पवार की पार्टी एनसीपी के लिए. 'जनता परिवार' ने इन तीन सीटों पर एनसीपी को चुनाव लड़ने के लिए न्योता दिया. लेकिन एनसीपी ने उनका ऑफ़र स्वीकार नहीं किया. फिर तय किया गया कि इन तीन सीटों में लालू यादव के हिस्से की दो सीटें जोड़कर मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को दे दी जाएं. तो अभी भी समाजवादी पार्टी के लिए बस पांच सीटें ही थीं. समाजवादी पार्टी के साथ ये धोखा था. ये उसके लिए अपमान की बात थी. सपा का दर्द सिर्फ इतना ही नहीं था कि उसे पांच सीटें ऑफर की गईं. उसकी बेइज्ज़ती ये भी थी कि ये सीटें भी तब ऑफर की गईं जब एनसीपी ने इंकार कर दिया. सबसे बड़ी बात तो ये थी कि उन्हें उस मीटिंग में भी शामिल नहीं किया गया, जिसमें कांग्रेस, राजद और जदयू ने सीटों का बंटवारा किया. बल्कि पांच सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कहकर समाजवादी को उसकी बिहार में औकात बताने की कोशिश की गई. किसी भी दल ने ये नहीं कहा कि सपा को भी इस बैठक में होना चाहिए था. इस बात का मलाल सपा को बहुत रहा. जो बाद में बयानबाज़ी में भी दिखाई दिया. गुस्साई सपा इस गठबंधन से अलग हो गई और उसी वक्त सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई और गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
इसी बैठक में जेडीयू और आरजेडी ने 100-100 सीटें और कांग्रेस ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. बाकी बची तीन सीटें. लेकिन समाजवादी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि शरद पवार की पार्टी एनसीपी के लिए. 'जनता परिवार' ने इन तीन सीटों पर एनसीपी को चुनाव लड़ने के लिए न्योता दिया. लेकिन एनसीपी ने उनका ऑफ़र स्वीकार नहीं किया. फिर तय किया गया कि इन तीन सीटों में लालू यादव के हिस्से की दो सीटें जोड़कर मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को दे दी जाएं. तो अभी भी समाजवादी पार्टी के लिए बस पांच सीटें ही थीं. समाजवादी पार्टी के साथ ये धोखा था. ये उसके लिए अपमान की बात थी. सपा का दर्द सिर्फ इतना ही नहीं था कि उसे पांच सीटें ऑफर की गईं. उसकी बेइज्ज़ती ये भी थी कि ये सीटें भी तब ऑफर की गईं जब एनसीपी ने इंकार कर दिया. सबसे बड़ी बात तो ये थी कि उन्हें उस मीटिंग में भी शामिल नहीं किया गया, जिसमें कांग्रेस, राजद और जदयू ने सीटों का बंटवारा किया. बल्कि पांच सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कहकर समाजवादी को उसकी बिहार में औकात बताने की कोशिश की गई. किसी भी दल ने ये नहीं कहा कि सपा को भी इस बैठक में होना चाहिए था. इस बात का मलाल सपा को बहुत रहा. जो बाद में बयानबाज़ी में भी दिखाई दिया. गुस्साई सपा इस गठबंधन से अलग हो गई और उसी वक्त सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई और गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
आज जिन रामगोपाल को मुलायम सिंह ने बार-बार पार्टी से निकाला, उस वक्त उन्हीं रामगोपाल ने कहा था, 'सपा बिहार विधानसभा चुनाव में दो से पांच सीटों का प्रस्ताव मिलने से अपमानित महसूस कर रही है. जनता परिवार के दलों का यह फर्ज था कि सीटों का बंटवारा करने से पहले सपा से बातचीत करते. हमें तो इस बारे की जानकारी मीडिया से मिली. यह गठबंधन धर्म नहीं. हमने इस गठबंधन से नाता तोड़ लिया. मैं जानता था चुनाव के वक्त ये नौबत आएगी, इसलिए मैंने कहा था मैं पार्टी के डेथ वारंट पर दस्तखत नहीं कर सकता.'
वक्त ने खुद को दोहराया है
आज फिर विधानसभा चुनाव हैं. लेकिन इस बार बिहार नहीं यूपी का मैदान है. बिसातें भी अलग हैं और मोहरे भी. बाप-बेटे के झगड़े में लोग लगे रहे. मगर अखिलेश यादव ने अपने पिता का बदला कांग्रेस से ऐसा लिया कि उसका यूपी में सांस लेना मुश्किल हो गया है. सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा का कहना है, 'कांग्रेस केवल 54 सीटों की हकदार है. गठबंधन को लेकर कांग्रेस का रुख पॉजिटिव नहीं है. इस हिसाब से कांग्रेस को 54 सीटें ही मिलनी चाहिए. हां अगर वो गंभीरता से बातचीत करे तो 25-30 सीटें और दी जा सकती हैं सपा कांग्रेस को अधिकतम 85 सीटें ही दे सकती है.' इस बयानबाज़ी का साफ़ मतलब है कि जिस तरह बिहार में समाजवादी पार्टी को उसकी औकात दिखाई गई उसी तरह समाजवादी पार्टी कांग्रेस को उसकी औकात बताकर बदला ले रही है.
गठबंधन की बातें करके समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस की यूपी में वो हालत कर दी कि कांग्रेस अगर अकेले चुनाव लड़ती है तो कुछ हाथ नहीं आने वाला. माहौल बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच का बना हुआ है. और अगर गठबंधन करके चुनाव लड़ते हैं. तो इतनी बड़ी पार्टी को इतनी कम सीटें सपा दे रही है कि कांग्रेस के लिए ये बड़ी ही शर्मनाक बात है. इससे ज्यादा सीटों पर तो रेप के आरोपी आसाराम के बेटे की पार्टी चुनाव लड़ने की तैयारी में है.जिस तरह बिहार में समाजवादी पार्टी को बिना बताए सीटों का बंटवारा कर लिया गया था, वैसा ही अब समाजवादी पार्टी ने किया है. एक तरफ कांग्रेस से गठबंधन की बातें करती रही और दूसरी तरफ अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी. उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतार दिए जिस पर कांग्रेस खुद के लिए टिकट की बात कर रही थी. कुल मिलकर समाजवादी पार्टी ने 208 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. इसमें वो सीटें भी शामिल हैं, जहां कांग्रेस विजयी रही है. समाजवादी पार्टी ने जब उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तो कांग्रेसी कार्यकर्ता खफा हो गए और राहुल के समर्थन में नारे लगाने लगे. नारे लगाए कि 'जो न हुआ बाप का, वो क्या होगा आप का.' तो भय्या बात ऐसी है ऐसे नारे लगाने से अब क्या हो, जब चिड़िया चुग गई खेत. आप ये ही समझते रहे कि बाप बेटे की नहीं बन रही, मगर कांग्रेस ने मुलायम सिंह के साथ गठबंधन में जो बिहार चुनाव में किया उसका बदला बेटे अखिलेश यादव ने ले लिया है. https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8
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