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फ्लोर टेस्ट से बाहर हुए TVK MLA, हाईकोर्ट के आदेश से विजय की मुश्किलें बढ़ीं, अब क्या होगा?

एक-एक वोट जोड़कर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे सीएम विजय के लिए ये अच्छी खबर नहीं है. उन्हें शायद बुधवार, 13 मई को तमिलनाडु की विधानसभा में अपनी सरकार के लिए बहुमत साबित करना है.

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विजय की पार्टी के विधायक फ्लोर टेस्ट में वोट नहीं डालेंगे. (फोटो- India Today)

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  • मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर सीट से एक वोट से जीते टीवीके विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को विधानसभा में शपथ लेने और फ्लोर टेस्ट में वोट देने से रोक दिया है।
  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन ने पोस्टल बैलट में वोट धांधली का आरोप लगाकर चुनावी नतीजों को चुनौती दी थी, जिससे हाईकोर्ट में मामला पहुंचा।
  • सेतुपति का वोट न देने पर भी सीएम जोसेफ विजय के पास तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत कायम है, और उनके लिए फ्लोर टेस्ट में संकट नजर नहीं आ रहा है।

मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश से तमिलनाडु के नए सीएम और टीवीके चीफ सी. जोसेफ विजय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. कोर्ट ने एक वोट से जीतने वाले टीवीके विधायक के विधानसभा में शपथ लेने पर रोक लगा दी है. आर श्रीनिवास सेतुपति ने डीएमके के उम्मीदवार को सिर्फ एक वोट से हराया था. इसका मतलब ये है कि विजय के इस विधायक को फ्लोर टेस्ट में वोट देने का अधिकार नहीं रहेगा. एक-एक वोट जोड़कर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे सीएम विजय के लिए ये अच्छी खबर नहीं है. उन्हें शायद बुधवार, 13 मई को तमिलनाडु की विधानसभा में अपनी सरकार के लिए बहुमत साबित करना है. 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 का होता है.  

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बता दें कि तमिलनाडु की तिरुपत्तूर सीट पर चुनाव काफी रोचक हो गया था. यहां तमिलगा वेट्ट्री कझगम यानी टीवीके के आर श्रीनिवास सेतुपति और द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के नेता पेरियाकरुप्पन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. आखिर में जब नतीजे आए तो सेतुपति को 83 हजार 365 वोट मिले. जबकि डीएमके के पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट हासिल हुए. यानी डीएमके के उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन सिर्फ एक वोट से चुनाव हार गए.

DMK कैंडिडेट ने हाईकोर्ट में लगाई अर्जी

हालांकि, इसके बाद भी पेरियाकरुप्पन ने हार नहीं मानी. उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टल बैलट से पड़ने वाले वोटों की गिनती में धांधली हुई है. इसके बाद चुनावी नतीजे को चुनौती देते हुए वह मद्रास हाईकोर्ट चले गए. इसी बीच मंगलवार, 12 मई को जब तमिलनाडु विधानसभा में सभी नए निर्वाचित विधायक पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई. हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने एक वोट से चुनाव जीते सेतुपति को शपथ लेने से रोक दिया है. 

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जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की पीठ ने एक अंतरिम आदेश जारी किया कि सेतुपति तमिलनाडु विधानसभा में किसी भी तरह के फ्लोर टेस्ट में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. यानी वह विश्वास मत, अविश्वास प्रस्ताव, ट्रस्ट वोट या ऐसी किसी भी वोटिंग में वोट नहीं डाल पाएंगे, जहां सरकार के बहुमत की परीक्षा होती है. कोर्ट का यह अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा. बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश को सेतुपति की जीत को रद्द करने वाला आदेश नहीं माना जाना चाहिए.

जोड़ तोड़ से बनी है सरकार, विजय की मुश्किल बढ़ेगी?

सेतुपति का फ्लोर टेस्ट में वोट न दे पाना सीएम विजय के लिए अच्छी खबर नहीं है. हालिया तमिलनाडु चुनाव में उन्हें 108 सीटों पर जीत मिली है, जिसमें असरदार वोट 107 है क्योंकि विजय दो सीटों से चुनाव लड़े थे. इसके अलावा, कांग्रेस के 5, वामपंथी दलों के 4, वीसीके और IUML के 2-2 विधायकों के समर्थन से विजय ने कुल 120 वोट जुटाए हैं. अब सेतुपति के वोट न देने की हालत में ये आंकड़ा 119 का हो जाता है. 

यह संख्या भी विजय सरकार के बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त है. यानी सेतुपति के वोट न डालने पर विजय की सरकार संकट में तो नहीं ही आएगी. उसके पास जरूरी बहुमत जुट गया है. एएमएमके के इकलौते विधायक ने भी विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है, जिसके बाद पार्टी के चीफ दिनाकरण ने उन्हें पार्टी से निकाल भी दिया है. इसके अलावा एआईएडीएमके में हुई टूट से भी विजय को फायदा मिला है. पार्टी के बागी विधायकों ने भी विजय को सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में नए सीएम जोसेफ विजय के लिए फ्लोर टेस्ट फिलहाल किसी मुश्किल में फंसता नहीं दिख रहा है. 

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