1971 के चुनाव में जबरदस्त जीत दर्जकर सत्ता में पहुंचीं इंदिरा गांधी ने संविधान में बदलाव कर राजों-रजवाड़ों को मिलने वाली प्रिवीपर्स खत्म करा दी, जिससे उन्हें सुविधाएं मिलना बंद हो गया. लेकिन सात दशक बाद भी राजशाही भारत के लोगों के जेहन में बसी हुई है. और इतने गहरे बसी हुई है कि राजाओं को आज भी उनके इलाकों में खास सुुविधाएं मिलती हैं. लोग उन्हें वैसे ही ट्रीट करते हैं, जैसे उनके राजा होने पर करते थे. आज वो चुनाव जीतकर गद्दी पर बैठते हैं. आइए कुछ और तहें खोलते हैं.
प्रतापगढ़ राजघराना

प्रतापगढ़ राजघराने की कहानी सबसे अलहदा है. इस राजघराने की सियासत से दोस्ती राजा बजरंग बहादुर सिंह से शुरू हुई थी, जो स्वतंत्रता सेनानी थे और बाद में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बने. रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया बजरंग बहादुर के पोते हैं. राजा भैया कि रिकॉर्ड ये है कि 1993 से 2012 तक वो निर्दलीय जीतकर सरकारों में मंत्री बनते रहे हैं.

बीजेपी की सरकार में मुख्यमंत्री चाहे कल्याण सिंह रहे हों, राजनाथ रहे हों या राम प्रकाश गुप्ता, राजा भैया हमेशा मंत्री रहे. मुलायम-अखिलेश की समाजवादी सरकार ने भी राजा भैया को मंत्री बनाया था. उनके लिए सिर्फ मायावती सरकार का दौर ही बुरा रहा, जब उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा. वो इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं.
अमेठी राजघराना

अपनी दूसरी पत्नी अमिता सिंह के साथ संजय सिंह
अमेठी रियासत के संजय सिंह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं. कांग्रेस के इस गढ़ में बीजेपी ने अपना मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है. बीजेपी ने संजय की पहली पत्नी गरिमा सिंह को अमेठी सीट से टिकट दिया है. हालांकि, गरिमा से पहले कुंवर राघवेंद्र प्रताप सिंह को टिकट मिलने की चर्चा थी.

संजय की पहली पत्नी गरिमा सिंह
संजय की दूसरी पत्नी अमिता सिंह अमेठी से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन सपा ने यहां से मुलायम के चहेते गायत्री प्रजापति को टिकट दिया है. गठबंधन की वजह से कांग्रेस यहां कैंडिडेट नहीं उतार सकती, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि रानी अमिता सिंह गायत्री के हक में चुनाव प्रचार कर सकती हैं. 2002, 2004 और 2007 में विधायक रह चुकीं अमिता अगर चुनाव प्रचार में उतरती हैं, तो ये रानी vs रानी की लड़ाई हो जाएगी.
राजा बुंदेला

ललितपुर के राजघराने के राजा बुंदेला सियासत से पहले सिनेमा में थे. इस बार वो बुंदेलखंड में झांसी या आसपास की किसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. इससे पहले वो अपनी पार्टी बुंदेलखंड कांग्रेस से एक बार अपनी किस्मत आजमा चुके हैं. उस चुनाव में वो हार गए थे.
भदावर राजघराना

महेंद्र अरिदमन सिंह
भदावर राजघराना है आगरा का, जहां के राजा महेंद्र अरिदमन सिंह तीन बार जनता दल के कैंडिडेट बनकर और दो बार बीजेपी के टिकट पर दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. पिछला चुनाव उन्होंने सपा के टिकट पर जीता था और अखिलेश कैबिनेट में मंत्री भी बने थे. इस चुनाव में वो सपा छोड़कर फिर से बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. अरिदमन अपनी पूर्व सीट बाह को पत्नी पक्षालिक के लिए छोड़कर नई सीट से उतरने की तैयारी में हैं.
परसपुर राजघराना
गोंडा के परसपुर राजघराने में दो राजा हैं. योगेश प्रताप सिंह और अजय प्रताप सिंह. पिछले चुनाव में ये दोनों आमने-सामने थे, लेकिन बाजी लगी थी योगेश के हाथ. वो सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे और जीतकर मंत्री बने थे. उससे पहले 2007 में अजय विधायक बने थे. हालांकि, बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और अपनी बहन बृजकुंवरी को बीएसपी के टिकट पर जीत दिलाई थी.ये भी पढ़ें:
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