नेताजी, आपको याद होगा कि साईकिल चलाते थे हम लोग. 1975 में जब आप जेल में थे तब मैं ही था. 77 के चुनाव में भी मैंने साईकिल चलाई. 3-3 महीने साईकिल पर घूमते थे हम लोग. 84 में भी चलाई. लखनऊ से शुरू कर साईकिल से पूरा राज्य नापा. गांव-गांव में बांटी चिट्टी मुलायम की चिट्ठियां. ऐसा नहीं है कि मैं अकेले था. साथियों का भी योगदान था. मैं मुख्यमंत्री से पूछूंगा कि क्या सरकार में मेरा योगदान नहीं था. मैंने नेताजी और मुख्यमंत्री का हर आदेश माना है. पर क्या हुआ मेरे साथ. मैं अध्यक्ष था. मेरे सारे विभाग ले लिये गये. मुझसे क्या झगड़ा था. मुख्यमंत्री मुझे नहीं बुलाते थे, फिर भी मैं जाता था मिलने. हम लोग उनके जन्म से काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री की शह पर अफसर मेरी बात नहीं मानते थे. क्या ऐसा होना था मेरे साथ. बात करते हैं अधिकारियों को ठीक करने की. मैं पूछता हूं गलती करने वाले किस अधिकारी को दंड मिला है. मैं कसम खा के कहता हूं कि अखिलेश ने कहा था कि मैं अलग पार्टी बनाऊंगा. मैं अपने बेटे की कसम खाता हूं. गंगाजल लेकर कह सकता हूं. अखिलेश ने ये कहा था. नेताजी आप तो गरीबों का लड़ाई लड़ रहे थे. आज आप देश के सबसे बड़े नेता हैं. पर क्या पार्टी नारा लगाने वाले चलायेंगे. हंगामा करने वालों का हटना जरूरी है नेताजी. नेताजी आपको पता है हम जनता के लिये मेहनत करते हैं. हम पार्टी बर्बाद होते नहीं देख सकते. पार्टी के झंडे के नाम पर नारे लगाने वाले चल रहे हैं. रागोपाल की दलाली नहीं चलेगी नेताजी. अमर सिंह की बात करते हैं ये लोग. पार्टी में बैठे ये लोग अमर सिंह के चरणों की धूल भी नहीं हैं. जब 2003 में सरकार बनी तो नेताजी आपको याद होगा कि अमर सिंह ने ही सहयोग किया था. नारेबाजी करने वाले अमर सिंह के बारे में क्या बात करेंगे. महागठबंधन किसने तुड़वाया था? कौन विरोध कर रहा था? भाजपा से कौन बात कर रहा था? ये नेताजी बतायेंगे. एक-एक का नाम लेकर पार्टी से बाहर करेंगे. चुनाव में तो मुख्यमंत्री किसी से बात भी नहीं कर रहे थे. मैंने हर विधायक से बात की. दूसरे दलों के लोगों से भी बात की थी. मुख्तार का इल्जाम लगता है मेरे ऊपर. मुख्तार को किसी ने जॉइन नहीं कराया. नेताजी बतायेंगे ये. गुंडे-मक्कार भरे पड़े हैं पार्टी में. ये लोग नहीं चलायेंगे पार्टी. आज जब हम यहां से निकलेंगे सब फैसला हो के रहेगा. मेरा कहना है नेताजी संभालें नेतृत्व. और मुझे पार्टी चलाने की छूट मिले. 5 नवंबर को मीटिंग है. चुनाव की तैयारी करनी है.
मुलायम के सामने शिवपाल ने अखिलेश को झपिलाया, आज निकाली सारी भड़ास
भरे बैठे थे, सब उगल दिया मीटिंग में.
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फोटो - thelallantop
कल अखिलेश और शिवपाल की तनातनी के बाद आज मुलायम के बुलावे पर मीटिंग हो रही है. अखिलेश तो रो -रो के बोल रहे थे. अखिलेश यादव के बोल लेने के बाद शिवपाल यादव ने बोलना शुरू किया. पूरा मूड बनाकर आये थे. गला भर आया पर रोये नहीं थे. अतीत के संघर्ष को याद करते हुये नेताजी को साथियों समेत अमर सिंह के योगदान की भी याद दिलाई. अखिलेश और उनके साथियों को एकदम नकार दिये. टफ गॉय बन के आये थे आज. मुलायम को नेतागिरी संभालने के लिये कई बार कहा. पढ़िये पूरी बात:
नेताजी, आपको याद होगा कि साईकिल चलाते थे हम लोग. 1975 में जब आप जेल में थे तब मैं ही था. 77 के चुनाव में भी मैंने साईकिल चलाई. 3-3 महीने साईकिल पर घूमते थे हम लोग. 84 में भी चलाई. लखनऊ से शुरू कर साईकिल से पूरा राज्य नापा. गांव-गांव में बांटी चिट्टी मुलायम की चिट्ठियां. ऐसा नहीं है कि मैं अकेले था. साथियों का भी योगदान था. मैं मुख्यमंत्री से पूछूंगा कि क्या सरकार में मेरा योगदान नहीं था. मैंने नेताजी और मुख्यमंत्री का हर आदेश माना है. पर क्या हुआ मेरे साथ. मैं अध्यक्ष था. मेरे सारे विभाग ले लिये गये. मुझसे क्या झगड़ा था. मुख्यमंत्री मुझे नहीं बुलाते थे, फिर भी मैं जाता था मिलने. हम लोग उनके जन्म से काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री की शह पर अफसर मेरी बात नहीं मानते थे. क्या ऐसा होना था मेरे साथ. बात करते हैं अधिकारियों को ठीक करने की. मैं पूछता हूं गलती करने वाले किस अधिकारी को दंड मिला है. मैं कसम खा के कहता हूं कि अखिलेश ने कहा था कि मैं अलग पार्टी बनाऊंगा. मैं अपने बेटे की कसम खाता हूं. गंगाजल लेकर कह सकता हूं. अखिलेश ने ये कहा था. नेताजी आप तो गरीबों का लड़ाई लड़ रहे थे. आज आप देश के सबसे बड़े नेता हैं. पर क्या पार्टी नारा लगाने वाले चलायेंगे. हंगामा करने वालों का हटना जरूरी है नेताजी. नेताजी आपको पता है हम जनता के लिये मेहनत करते हैं. हम पार्टी बर्बाद होते नहीं देख सकते. पार्टी के झंडे के नाम पर नारे लगाने वाले चल रहे हैं. रागोपाल की दलाली नहीं चलेगी नेताजी. अमर सिंह की बात करते हैं ये लोग. पार्टी में बैठे ये लोग अमर सिंह के चरणों की धूल भी नहीं हैं. जब 2003 में सरकार बनी तो नेताजी आपको याद होगा कि अमर सिंह ने ही सहयोग किया था. नारेबाजी करने वाले अमर सिंह के बारे में क्या बात करेंगे. महागठबंधन किसने तुड़वाया था? कौन विरोध कर रहा था? भाजपा से कौन बात कर रहा था? ये नेताजी बतायेंगे. एक-एक का नाम लेकर पार्टी से बाहर करेंगे. चुनाव में तो मुख्यमंत्री किसी से बात भी नहीं कर रहे थे. मैंने हर विधायक से बात की. दूसरे दलों के लोगों से भी बात की थी. मुख्तार का इल्जाम लगता है मेरे ऊपर. मुख्तार को किसी ने जॉइन नहीं कराया. नेताजी बतायेंगे ये. गुंडे-मक्कार भरे पड़े हैं पार्टी में. ये लोग नहीं चलायेंगे पार्टी. आज जब हम यहां से निकलेंगे सब फैसला हो के रहेगा. मेरा कहना है नेताजी संभालें नेतृत्व. और मुझे पार्टी चलाने की छूट मिले. 5 नवंबर को मीटिंग है. चुनाव की तैयारी करनी है.
नेताजी, आपको याद होगा कि साईकिल चलाते थे हम लोग. 1975 में जब आप जेल में थे तब मैं ही था. 77 के चुनाव में भी मैंने साईकिल चलाई. 3-3 महीने साईकिल पर घूमते थे हम लोग. 84 में भी चलाई. लखनऊ से शुरू कर साईकिल से पूरा राज्य नापा. गांव-गांव में बांटी चिट्टी मुलायम की चिट्ठियां. ऐसा नहीं है कि मैं अकेले था. साथियों का भी योगदान था. मैं मुख्यमंत्री से पूछूंगा कि क्या सरकार में मेरा योगदान नहीं था. मैंने नेताजी और मुख्यमंत्री का हर आदेश माना है. पर क्या हुआ मेरे साथ. मैं अध्यक्ष था. मेरे सारे विभाग ले लिये गये. मुझसे क्या झगड़ा था. मुख्यमंत्री मुझे नहीं बुलाते थे, फिर भी मैं जाता था मिलने. हम लोग उनके जन्म से काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री की शह पर अफसर मेरी बात नहीं मानते थे. क्या ऐसा होना था मेरे साथ. बात करते हैं अधिकारियों को ठीक करने की. मैं पूछता हूं गलती करने वाले किस अधिकारी को दंड मिला है. मैं कसम खा के कहता हूं कि अखिलेश ने कहा था कि मैं अलग पार्टी बनाऊंगा. मैं अपने बेटे की कसम खाता हूं. गंगाजल लेकर कह सकता हूं. अखिलेश ने ये कहा था. नेताजी आप तो गरीबों का लड़ाई लड़ रहे थे. आज आप देश के सबसे बड़े नेता हैं. पर क्या पार्टी नारा लगाने वाले चलायेंगे. हंगामा करने वालों का हटना जरूरी है नेताजी. नेताजी आपको पता है हम जनता के लिये मेहनत करते हैं. हम पार्टी बर्बाद होते नहीं देख सकते. पार्टी के झंडे के नाम पर नारे लगाने वाले चल रहे हैं. रागोपाल की दलाली नहीं चलेगी नेताजी. अमर सिंह की बात करते हैं ये लोग. पार्टी में बैठे ये लोग अमर सिंह के चरणों की धूल भी नहीं हैं. जब 2003 में सरकार बनी तो नेताजी आपको याद होगा कि अमर सिंह ने ही सहयोग किया था. नारेबाजी करने वाले अमर सिंह के बारे में क्या बात करेंगे. महागठबंधन किसने तुड़वाया था? कौन विरोध कर रहा था? भाजपा से कौन बात कर रहा था? ये नेताजी बतायेंगे. एक-एक का नाम लेकर पार्टी से बाहर करेंगे. चुनाव में तो मुख्यमंत्री किसी से बात भी नहीं कर रहे थे. मैंने हर विधायक से बात की. दूसरे दलों के लोगों से भी बात की थी. मुख्तार का इल्जाम लगता है मेरे ऊपर. मुख्तार को किसी ने जॉइन नहीं कराया. नेताजी बतायेंगे ये. गुंडे-मक्कार भरे पड़े हैं पार्टी में. ये लोग नहीं चलायेंगे पार्टी. आज जब हम यहां से निकलेंगे सब फैसला हो के रहेगा. मेरा कहना है नेताजी संभालें नेतृत्व. और मुझे पार्टी चलाने की छूट मिले. 5 नवंबर को मीटिंग है. चुनाव की तैयारी करनी है.
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