गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने अपनी नई पार्टी बनाई है. पार्टी का नाम है प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी (Praja Shakti Democratic Party). पार्टी डेढ़ साल पहले रजिस्टर हुई थी और 2022 गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए वाघेला ने इसे 21 अगस्त को लॉन्च किया. बाकी सब मोटो तो ठीक है, लेकिन एक मोटो बहुत चर्चा में है. अगर ये पार्टी सत्ता में आ जाती है तो गुजरात में शराब बिकेगी.
ये पार्टी जीत गयी तो गुजरात में शराब बिकने लगेगी!
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने अपनी एक नई पार्टी बनाई है.


वाघेला ने अपनी नई पार्टी बनाने के बाद कई वादे किए हैं. उन्होंने फाइव पॉइंट "पंचामृत" एजेंडा जारी किया है. जो परिवार सालाना 12 लाख रुपये से कम कमाते हैं, उनके लिए 12 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा, उनके बच्चों के लिए 12वीं क्लास तक मुफ्त शिक्षा, बेरोज़गारी भत्ता, पानी के टैक्स में छूट, १०० यूनिट तक मुफ्त बिजली, किसानों की कर्जमाफी और बिजली के बिल से राहत का प्रावधान किया गया है.
वाघेला की पार्टी ने गुजरात में शराब पर बैन को हटाने की बात कही है. उन्होंने गुजरात में शराब को लेकर मौजूदा पॉलिसी को करप्ट कहा है और ये भी कहा है कि राज्य में शराब को लेकर एक साइंटिफिक नीति तैयार की जाएगी.
वाघेला ने आजतक से बातचीत में बताया,
"राज्य में शराबबंदी होने के बावजूद गुजरात के लोग शराब पीते हैं. गुजरात में हर साल करोड़ों की शराब पकड़ी जाती है और ये यहां पी जाने वाली शराब की महज 20 प्रतिशत ही है. शराबबंदी होने के कारण लोग जहरीली शराब भी पीते हैं. और इससे उनकी मौत होती है. अगर शराबबंदी हटाई जाएगी तो लोग ठीक क्वालिटी की शराब पी सकते हैं, और इससे मिलने वाली आय से बच्चों को सरकार फ्री शिक्षा फ्री मेडिकल सुविधा दे सकती हैं."
वाघेला ने कहा कि शराबनीति पर वो एक पोल भी करवाएंगे और लोगों से शराबबंदी पर उनकी राय मांगेंगे.
अपनी नई पार्टी पर वाघेला कहते हैं कि उन्होंने अपनी पार्टी को 2019 में रजिस्टर किया था. कहते हैं कि कांग्रेस ने कई बार उनको पार्टी ज्वाइन करने के लिए कहा,
"लेकिन मैंने कह दिया था कि जब तक सोनियाजी और राहुलजी से बातचीत नहीं होती है, तब तक कांग्रेस में वापस नहीं आऊंगा. जब वहां से कोई जवाब नहीं आया, मैंने अपनी पार्टी लांच की."
कौन है शंकरसिंह वाघेला?शंकरसिंह वाघेला गुजरात के 1996 से 1997 तक मुख्यमंत्री रहे. खुद की पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी के प्रत्याशी थे और समर्थन मिला कांग्रेस का. सरकार एक साल तक चली, कांग्रेस ने समर्थन खींच लिया तो उनकी जगह ली दिलीप पऱिख ने. बाद में 1998 में ये सरकार भी गिर गई तो चुनाव हुए और सीएम की कुर्सी पर बैठे केशुभाई पटेल और बीजेपी सत्ता में चली आई.
मुख्यमंत्री बनने से पहले वाघेला 1984 से 1990 तक गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे और 1991 से 1996 तक गोधरा से लोकसभा सांसद.
जब सीएम की कुर्सी चली गई तो सांसद हुए. 1999 और 2004 में. सीट कापड़वंज लोकसभा. 2004 से 2009 तक केंद्र की UPA सरकार के दौरान केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री का पद भी संभाला.
साल 2012 में उन्होंने कापड़वंज विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव जीता. और इसी समय विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हुए और कुछ ही समय में गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष.
कुछ समय बाद कांग्रेस का भी साथ छूट गया. और साल 2017 विधानसभा चुनाव के पहले अपनी खुद की पार्टी जनविकल्प मोर्चा खोल दिया, फिर साल 2019 से 2020 तक नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP)के साथ भी रहे. आखिर में ये है एक और नई पार्टी का ऐलान.
पहले भी बनाई थी पार्टीवाघेला को गुजरात के लोग, खासकर उनके समर्थक “बापू” कहते हैं. साल 2017 में वाघेला ने कहा था कांग्रेस ने उनको पार्टी से निकाल दिया है. जैसा कि ऊपर बताया गया कि वाघेला बीजेपी में भी रह चुके हैं. लेकिन साल 2017 में कांग्रेस से बाहर आने के बाद उन्होंने ये ऐलान भी किया कि वो अब बीजेपी में भी शामिल नहीं होंगे. इसी साल वाघेला ने जन विकल्प पार्टी लॉन्च की. लेकिन 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्हें एक फीसदी वोट भी नहीं मिले. पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई.
शंकरसिंह वाघेला का कहना है कि गुजरात में भाजपा सत्ता के नशे में चूर है और कांग्रेस की कोई रणनीति नहीं है. उनकी पार्टी लोगों को रेवड़ी कल्चर से नहीं, बल्कि ईमानदारी और सच्चाई से चीज़ें देगी, ऐसा दावा करते हैं. और बताते हैं कि उनकी प्रजाशक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी गुजरात की सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
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