‘थलापति विजय की एक छोटी-सी गलती ने तमिलनाडु को मुश्किल में डाल दिया है. ये छोटी-सी गलती शायद एक बचकाने सलाह की वजह से हुई, जो अगर न होती तो राज्यपाल टीवीके के मुखिया विजय को ही सरकार बनाने के लिए न्योता देते.’ ये बात पॉलिटिकल एक्सपर्ट एस गुरुमूर्ति ने एनडीटीवी से कही है और यही बात डीएमके ने भी दोहराई है. डीएमके के नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि विजय पहले तो राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाएं. फिर राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा करें.
तमिलनाडु में गलत सलाह ने बिगाड़ा विजय का खेल! DMK ने भी ताना मार दिया
एलंगोवन ने कहा कि विजय अगर अपनी 107 सीटों के साथ राज्यपाल के पास जाते तो शायद बात बन जाती. राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने के लिए बुला लेते लेकिन वह किसी और पार्टी (कांग्रेस) को साथ लेकर गए.


एनडीटीवी के मुताबिक, एलंगोवन ने कहा कि विजय अगर अपनी 107 सीटों के साथ राज्यपाल के पास जाते तो शायद बात बन जाती. राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने के लिए बुला लेते लेकिन वह किसी और पार्टी (कांग्रेस) को साथ लेकर गए. इससे उनके सीटों की संख्या 112 हो गई लेकिन बहुमत से अभी भी पीछे थी. ऐसे में गवर्नर बिल्कुल ये कहेंगे कि उनके पास बहुमत नहीं है. उन्होंने आगे कहा,
अगर विजय अकेले राज्यपाल के पास जाते तो वे उन्हें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाने के लिए बुलाते. बाद में सदन में अपनी ताकत साबित करने को कहते. अब जब उन्हें कुछ ही पार्टियों का समर्थन मिला है तो सरकार जाहिर तौर पर पूर्ण बहुमत का इंतजार करेगी.
बता दें कि विजय की पार्टी ने हालिया चुनाव में 108 सीटें जीती हैं. इनमें भी विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़ा है तो उसके पास सरकार बनाने के लिए कुल 107 वोट ही हैं. कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन भी उसे हासिल है लेकिन फिर भी 6-7 वोट कम पड़ रहे हैं. ऐसे में तमिलनाडु में सरकार का मामला फंसा हुआ है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक विश्लेषक एस गुरुमूर्ति का कहना है कि ये पूरा मामला टीवीके के सलाहकारों की वजह से गड़बड़ा गया. विजय को पहले तो यह दावा करने की सलाह दी गई कि वो ही सबसे बड़ी पार्टी हैं. उन्हें सरकार बनाने की इजाजत दी जानी चाहिए. लेकिन किसी का सुझाव रहा कि इसमें कांग्रेस का पत्र भी जोड़ लिया जाए. इससे यह एक गठबंधन की सरकार होगी. गुरुमूर्ति कहते हैं,
मेरे विचार से यहीं से मामला तकनीकी रूप से एक पार्टी के सरकार बनाने से हटकर गठबंधन सरकार बनाने की ओर मुड़ गया. इससे राज्यपाल की स्थिति मुश्किल हो गई.
उन्होंने आगे कहा कि जाहिर है कि राज्यपाल खुलकर यह नहीं कह सकते थे कि विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही है. इसे चुनाव बाद का राजनीतिक गठजोड़ कहा जा रहा था. इसलिए उन्होंने विजय से और समर्थन पत्र मांगे ताकि यह साबित हो सके कि उनके पास 118 विधायकों का बहुमत है. उन्होंने कहा,
शायद यही राज्यपाल का रुख था. मुझे नहीं लगता कि तकनीकी तौर पर राज्यपाल ने कुछ गलत किया. बल्कि गलती टीवीके की लगती है, जिसे गलत सलाह दी गई.
हालांकि, गुरुमूर्ति का मानना है कि अंत में विजय ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनेंगे क्योंकि कांग्रेस और CPM जैसी पार्टियां उनके समर्थन में मजबूती से खड़ी हैं.
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