पश्चिम बंगाल ने करीब डेढ़ दशक बाद सत्ता परिवर्तन देखा. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ममता बनर्जी के 15 साल पुराने शासन को खत्म करने में कामयाब रही और पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. मुकाबला कड़ा था. करीब 20 सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहां जीत का अंतर 5,000 वोटों से भी कम था. लेकिन राजारहाट न्यू टाउन सीट पर मुकाबला जितना करीबी था, उतना कहीं और नहीं था. तृणमूल कांग्रेस (TMC) यह सीट लगभग जीत ही गई थी. लेकिन आखिरी राउंड में एक ऐसा बूथ गिना गया जिसमें ज्यादातर मुस्लिम वोटर थे और उन्होंने कथित तौर पर BJP को भर-भरकर वोट दिए.
बंगाल में इस मुस्लिम बहुल बूथ में BJP को 97% वोट मिले, TMC ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया
West Bengal Election में तृणमूल कांग्रेस (TMC) राजारहाट न्यू टाउन सीट लगभग जीत ही गई थी. लेकिन आखिरी राउंड में एक ऐसा बूथ गिना गया जिसमें ज्यादातर मुस्लिम वोटर थे और उन्होंने कथित तौर पर BJP को भर-भरकर वोट दिए. अब टीएमसी ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. क्या है मामला?


स्क्रॉल ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि इस मुस्लिम बहुल बूथ पर BJP को 97% वोट मिले, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड था. इस विवाद के केंद्र में उत्तरी कोलकाता के राजारहाट न्यू टाउन सीट का ‘मुसलमान पाड़ा’ का बूथ नंबर 164 है. यहां 29 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान हुआ था. बूथ नंबर 165 भी इसी इलाके का हिस्सा है. जैसा कि नाम से ही जाहिर है, ‘मुसलमान पाड़ा’ की ज्यादातर आबादी मुसलमानों की है.
'मुसलमान पाड़ा' के इन दोनों बूथों के वोटरों ने एक ही मतदान केंद्र (जगदीशपुर स्कूल) पर अपने वोट डाले थे. स्क्रॉल की पड़ताल के मुताबिक, 4 मई को वोटों की गिनती के दौरान कथित तौर पर गिनती के 9वें राउंड में बूथ नंबर 164 को छोड़ दिया गया था.
क्योंकि अगर 9वें राउंड की तय 20 EVM (बूथ 159 से बूथ 177 तक) की गिनती पूरी हो गई होती, तो गिने गए कुल वोटों की संख्या 16,780 होती. लेकिन, आधिकारिक आंकड़ा सिर्फ 16,214 वोट निकला. माने 656 वोटों की कमी. यह संख्या बूथ 164 में डाली गई कुल 656 वोटों के ही बराबर है.
एक बूथ ने कैसे पलटा गेम?राजारहाट सीट पर वोटों की गिनती कुल 18 राउंड में हुई. 4 मई को 17 राउंड की गिनती हो सकी. आधी रात तक तृणमूल कांग्रेस के तापस चटर्जी, बीजेपी के पीयूष कनोडिया से 316 वोटों से मामूली बढ़त बनाए हुए थे.
बूथ नंबर 164 की गिनती अगले दिन (5 मई को) 18वें और आखिरी राउंड में अलग से की गई. यह गिनती के लिए बचा हुआ एकमात्र बूथ था, जिसे कथित तौर पर 4 मई को छोड़ दिया गया था. जब गिनती पूरी हुई, तो नतीजे चौंकाने वाले आए. इसने BJP के पक्ष में पूरा खेल ही पलट दिया.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बूथ नंबर 164 में 656 वोट पड़े थे. BJP को 637 वोट मिले और TMC को सिर्फ पांच. इसका मतलब है कि इस बूथ पर पड़े कुल वोटों में से 97% वोट BJP को मिले. बूथ 164 में कुल 670 वोटर हैं, जिनमें 591 मुसलमान और 79 हिंदू वोटर हैं.
अब एक संभावना लेकर चलते हैं. मान लीजिए कि सभी 79 हिंदू वोटरों ने BJP को वोट दिया, तो BJP को मिले कुल 637 वोटों में से 558 वोट मुसलमानों के होंगे. इस हिसाब से बूथ 164 पर लगभग 88% मुसलमानों ने BJP को वोट दिया.
पिछले वोटिंग पैटर्न को देखते हुए यह एक अनोखी बात है. इससे TMC की बढ़त खत्म हो गई और BJP के पीयूष कनोडिया 316 वोटों से जीत गए. ठीक उसी अंतर से जिससे वे बूथ 164 के वोटों की गिनती होने तक पीछे चल रहे थे.
विवाद किस बात को लेकर है?जैसा कि स्क्रॉल ने बताया कि मुसलमान पाड़ा में दो बूथ हैं- 164 और 165. बूथ 165 के नतीजे एकदम अलग थे. यहां 91% वोटर मुसलमान हैं, लेकिन एक ही इलाके के होने के बावजूद, उन्होंने बिल्कुल अलग तरह से वोट दिया. BJP को कुल 638 वोटों में से सिर्फ 32 यानी 5% वोट ही मिले. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) (CPIM) के उम्मीदवार सप्तर्षि देब को सबसे ज्यादा वोट (299) मिले, उसके बाद TMC (290) का नंबर आया.
टीएमसी ने इस सीट को लेकर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है. पार्टी का आरोप है कि मतगणना के आखिरी चरण (18वें राउंड) में इस खास बूथ की गिनती तय क्रम से हटकर की गई थी. टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने ‘X’ पर लिखा,
“चुनाव आयोग, वैनिश कुमार और सुप्रीम कोर्ट कहां हैं? टीएमसी राजारहाट-न्यू टाउन में लगातार जीत रही थी, तभी आखिरी राउंड में एक मुस्लिम-बहुल बूथ के वोटों की गिनती नियमों से अलग हुई और उसके 97% वोट BJP को चले गए.”
ऐसा लगता है कि ‘वैनिश कुमार’ नाम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एक तंज है, जिनका चुनावों से पहले TMC के साथ कई बार टकराव हुआ है. इसका सीधा संबंध मतदाता सूची (Voter List) से नाम गायब होने के आरोपों से है. अंग्रेजी शब्द ‘Vanish’ का अर्थ होता है ‘गायब हो जाना'.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी और EVM में हेरफेर का आरोप लगाया. उन्होंने कहा,
"जिस बूथ पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां 97% वोट BJP को मिलना इस बात का साफ सबूत है कि या तो EVM में हेरफेर हुआ है या EVM बदली गई है, या फिर इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के रिटर्निंग ऑफिसर ने वोटों की जो गिनती बताई है, वह EVM में दर्ज वोटों से पूरी तरह अलग है."
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नतीजे चौंकाने वाले क्यों थे?आकंड़े बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में BJP को ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम वोट पाने में मुश्किल हुई है. अब पिछले पैटर्न को देखिए. स्क्रॉल ने कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से बताया कि 2024 के लोकसभा और 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में BJP को राज्य के मुस्लिम वोटों का सिर्फ 4-7% ही मिला था. टीएमसी को लगभग 70-75% वोट मिले थे. 2011 में जब से TMC सत्ता में आई है, तब से यही पैटर्न रहा है.
ममता बनर्जी की कल्याणकारी योजनाओं ने यह पक्का करने की कोशिश की कि पिछले एक दशक में मुस्लिम वोट बैंक तृणमूल के साथ ही बना रहे. लेकिन 2026 के चुनावों में, TMC के पीछे जो लगभग पूरी तरह से अल्पसंख्यक एकजुटता पहले देखी गई थी, उसमें फूट पड़ गई. मुस्लिम-बहुल जिलों में वोट कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) (CPIM), इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) जैसे छोटे संगठनों में बंट गए. इससे BJP को काफी फायदा हुआ.
इंडिया टुडे ने एक विश्लेषण के हवाले से लिखा कि 142 मुस्लिम-बहुल सीटों में से BJP ने 72 सीटें जीतीं और तृणमूल कांग्रेस ने 64 सीटें. बंगाल चुनावों में TMC की करारी हार के पीछे यह एक बड़ा कारण था. लेकिन राजारहाट सीट पर क्या ‘खेल’ हुआ? जहां एक बूथ ने TMC के लिए पूरी कहानी ही बदल दी. चुनाव आयोग ही बता पाएगा.
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