हमें पहले से समझ है. पांच साल शासन में रहने की जरूरत नहीं थी. मैं वहां सगठन का काम करता था. वहां के हर जिले में कभी मैं दौरा करने वाला इंसान था. मैं बारीकियों को जानता हूं. एक मुठ्ठीभर परिवारों ने जम्मू-कश्मीर को इमोशनल ब्लैकमेलिंग करने का रास्ता चुना हुआ है. मुफ्ती साहब थे हमें आशा थी कि शायद हम उसमें से बाहर आएंगे. लेकिन वह हमारी महामिलावट थी. तेल और पानी का मिलन था. हम दोनों अलग-अलग ग्रुप के हैं. हमारा कोई मेल नहीं बैठेगा. जनता ने ऐसा फैसला दे दिया है. साथ चले बिना कोई चारा नहीं है. उसके बिना हम रह नहीं सकते. हमने काम किया है.पीएम मोदी ने आगे कहा-
लेकिन लोकतंत्र का तकाजा आया हमने छोड़ भी दिया. कहा चुनाव करवाएंगे. अटलजी का फॉर्मूला ही काम आने वाला है. इंसानियत-जम्हूरियत और कश्मीरियत. लेकिन मुठ्ठीभर परिवार जो कश्मीर में एक भाषा बोलते हैं दिल्ली में आकर दूसरी भाषा बोलते हैं. ये दोगलापन उजागर करना पड़ेगा. और मैं वो काम कर रहा हूं. उनमें हिम्मत होना चाहिए. जो कश्मीर में बोलते हैं वही दिल्ली में आकर बोलें. जो दिल्ली में बोलते हैं वही कश्मीर में बोलें. दो भाषा बोल रहे हैं. एक्सपोज हो रहे हैं.पीएम मोदी अपने भाषणों में विपक्ष के गठबंधन को महामिलावट कहते रहे हैं. वह कई बार विपक्ष पर हमला करने के लिए अपने भाषणों में इस शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं. बात चाहे ममता बनर्जी की रैली में विपक्ष की एकजुटता के समय की हो या उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की. वह ससंद में भी कह चुके हैं कि देश जानता है कि मिलावटी सरकार होती है तो क्या होता है. अब तो महामिलावट आने वाला है. पीएम ने कहा था- महामिलावट, महामिलावट यहां पहुंचने वाले नहीं हैं. ऐसे में पीडीपी के साथ बीजेपी के गठबंधन को पीएम मोदी की ओर से महामिलावट कहना बड़ी बात है.
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