पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ममता बनर्जी की TMC सरकार की ओर से शुरु की गई ‘मां’ कैंटीन योजना के बंद होने की नौबत आ गई है. ये योजना कोरोना काल के समय गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी. एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि राजधानी कोलकाता में कई ‘मां’ कैंटीनें बंद चुकी हैं. ममता सरकार की ओर से शुरू किए गए इस योजना में मात्र 5 रुपये में भोजन दिया जाता था.
कोलकाता में ममता बनर्जी की ‘मां’ कैंटीनें बंद हो जाएंगी?
यह योजना शुरू में बंगाल के 7 नगर निगमों और 34 नगर पालिकाओं में शुरू की गई थी. बाद में अन्य नगर निकायों में भी इसकी शुरुआत की गई. ‘मां’ कैंटीन योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए KMC अहम भूमिका निभाता है. KMC उन विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का काम करता है, जो कैंटीन को चलाने के लिए कच्चा सामान देते हैं.


द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में अब तक कम से कम 50 ‘मां’ कैंटीनें बंद हो चुकी हैं. इस बारे में कोलकाता नगर निगम(KMC) के अधिकारियों ने अखबार से बात की. KMC अधिकारियों ने अखबार को बताया कि कैंटीन चलाने के लिए राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला सामान अब नहीं मिल पा रहा है. ऐसी हालत में इन कैंटीनों को चलाना नामुमकिन हो चुका है. हालांकि, योजना से जुड़े सरकारी अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों को खारिज नहीं किया है.
सूत्रों ने अखबार को जानकारी दी कि सरकार के कई विभाग कैंटीन चलाने के लिए चावल, दाल, सब्जियां और अंडे देते थे. इसके बाद कैंटीनों से जुड़े कुछ NGO (नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन) खाना बनाकर शहर के 130 से ज्यादा कैंटीनों के जरिए बांटते थे. मामले पर KMC के एक अधिकारी ने कहा,
‘विभागों को पक्का नहीं पता कि नई BJP सरकार इस योजना के बिलों पर दस्तखत करेगी या नहीं, जिसे ममता बनर्जी ने शुरू किया था. ये योजना उनकी (ममता) के सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक थी.’
यह योजना शुरू में बंगाल के 7 नगर निगमों और 34 नगर पालिकाओं में शुरू की गई थी. बाद में अन्य नगर निकायों में भी इसकी शुरुआत की गई. ‘मां’ कैंटीन योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए KMC अहम भूमिका निभाता है. KMC उन विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का काम करता है, जो कैंटीन को चलाने के लिए कच्चा सामान देते हैं. साथ ही उन NGO के संपर्क में भी रहता है, जो खाना बनाकर बाटते हैं.

NGO के एक सीनियर सदस्य ने भी अखबार से बात की, जो रोजाना करीब 8 हजार लोगों के लिए खाना बनाकर 12 जगहों पर डिलीवरी करते थे. उन्होंने बताया कि उन्हें खाना बनाने के लिए चावल, दाल या अंडों की कोई नई खेप नहीं मिली है. ‘मां’ कैंटीन के लिए खाना बनाने वाली एक महिला ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार, 8 मई से खाना बनाना बंद कर दिया है.
कुछ कैंटीनों में पहले ही खाना मिलना बंद हो चुके हैं. इन कैंटीनों में SSKM अस्पताल के अंदर की दो कैंटीनें, कालीघाट पुल के पास वाली एक कैंटीन, भवानीपुर में पूर्णा सिनेमा के बाहर वाली एक कैंटीन, और प्रिंस अनवर शाह रोड पर लॉर्ड्स क्रॉसिंग के पास वाली एक और कैंटीन शामिल हैं. NGO में काम करने वाले एक अधिकारी कहते हैं,
‘जिन एजेंसियों के जरिए राज्य सरकार हमें सामान भिजवाती थी, उन्होंने हमें बताया कि उन्हें हमें सामान देने के लिए कोई नया ऑर्डर नहीं मिला है. उन्होंने हमसे सोमवार या मंगलवार को फिर से पता करने को कहा है. हमें उम्मीद है कि तब तक स्थिति कुछ साफ हो जाएगी.’
मां’ कैंटीन योजना के बारे में बात करें, तो इसकी शुरुआत साल 2021 में फरवरी महीने में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य कोरोना महामारी के दौरान शहरी इलाकों में गरीबों और जरूरतमंदों को खाने की सुरक्षा देना था. इनका संचालन दोपहर के 12 से 3 बजे के बीच किया जाता था. बीते पांच सालों में हर कैंटीन के बाहर सैकड़ों लोगों की लंबी कतारें लगना एक आम बात थी.
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