"जब केंद्र में कांग्रेस की महामिलावटी रिमोट सरकार थी तो बेंगलुरु में बम धमाके हुए थे कि नहीं? पूरा देश डर में रहने के लिए मजबूर था कि नहीं? चौकीदार की 5 वर्ष की चौकीदारी में कोई 'बड़ा धमाका' हुआ क्या? 5 साल पहले जिनको रोक पाना मुमकिन नहीं था उसे मुमकिन किसने किया? ये मोदी ने नहीं किया है ये जो कुछ भी हुआ है वो आपके एक वोट ने किया है. ये आपके वोट की ताकत है कि बंगलोर में बम धमाका नहीं हुआ. जब देश में बम धमाके होते थे तो कांग्रेस सरकार होम मिनिस्टर बदल देती थी और सारा दोष एक आदमी पर डाल देती थी. लेकिन मोदी गृह मंत्री नहीं बदलता. मोदी तरीके बदल देता है."आरोपों के जवाब कांग्रेस देगी. सब सक्षम हैं. लेकिन नागरिक के तौर पर हमें एक चीज बहुत अखरी, चौकीदारी में बड़ा धमाका नहीं हुआ वाली बात. प्रधानमंत्री एक बात बताएं 'बड़ा धमाका' क्या होता है? क्या पुलवामा में हुआ बम धमाका बड़ा नहीं था. 40 जवान शहीद हुए थे. क्या अप्रैल 2017 में हुआ नक्सली धमाका बड़ा नहीं था? 25 जवान मारे गए थे. आंकड़े छोड़िए धमाका अगर बड़ा ना भी हो तो क्या एक आदमी की जान मायने नहीं रखती. आरोप लगते हैं कि बीजेपी लगातार ये कोशिश करती नज़र आती है कि सेना जैसे संस्थान भी उसके हित में इस्तेमाल हो जाएं. एयरस्ट्राइक का क्रेडिट लेने पर विवाद हुआ. आप फर्स्ट टाइम वोटर्स से पुलवामा में शहीद सैनिकों के नाम पर वोट मांग रहे हैं. और फिर उस हमले को 'बड़ा हमला' भी न माने. वाह मोदी जी वाह. कुछ ऐसा ही बयान रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने भी दिया था जिसके बाद पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने जो जवाब दिया वो नरेंद्र मोदी को भी दिखाया जा सकता है.
रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा था-
कांग्रेस कह रही है कि ये मोदी की सेना है. अगर सेना को वन रैंक वन पेंशन दिया तो इस सेना का गौरव गान मोदी को करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए. अगर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया तो गौरव गान मोदी को करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?समझ नहीं आता 'मोदी को सेना' शब्द उछालने की इतनी क्या जल्दी है? 'मोदी की सेना' का डंका किसने पीटा? ये आपके एक मुख्यमंत्री हैं योगी आदित्यनाथ. उनका बयान है. और चुनाव के मौसम में उन्होंने जो कुछ बोला उसके लिए चुनाव आयोग ने रिपोर्ट मांग ली थी. सेना को वन रैंक वन पेंशन भले आपकी सरकार ने दिया हो लेकिन उसके लिए रिटायर्ड सैनिकों ने जंतर मंतर पर बैठकर ना जाने कितने दिनों तक धरना दिया है. बुरा ये है कि सेना के शौर्य का बीजेपी राजनीतिक फायदा लेना चाहती है. और ये नज़र आने लगा है. सेना में बीजेपी के लिए भी नाराजगी है. ये तब नज़र आता है जब सेना के 156 रिटायर्ड अधिकारियों ने मिलकर चिट्ठी लिखी. चुनाव में सैनिकों के नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति दर्ज कराई. सोशल मीडिया पर इसके फेक होने की खबरें ज़रूर चलीं. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से भी इन ख़बरों का खंडन किया लेकिन पूर्व मेजर जनरल सुधीर वोमबटकेरे ने दावा किया है कि उनके पास सबूत हैं कि सबकी रज़ामंदी से ये चिट्ठी लिखी गई. इनसे इतर जाकर सोचें तो शायद हमें ग़लत लगना ही ग़लत है. प्रधानमंत्री कहना चाह रहे होंगे कि 'आम लोगों' पर हमले नहीं हुए. शायद वो ये कहना चाह रहे हैं कि पहले की तरह सार्वजनिक जगहों पर धमाके नहीं हुए. ऐसा है तो और ग़लत है. आप धमाकों को बांट रहे हैं. सेना पर हमला हुआ तो 'चिल', आम आदमी धमाके में मरा तो 'बड़ा धमाका' सीरियसली मोदी जी? हम इस स्तर पर आकर वर्गीकरण करेंगे? इस दावे की हवा भी सरकार का राज्यसभा में दिया जवाब निकाल देता है. एक सरकार अगर आतंकवाद की रोकथाम करती है तो ये बहुत अच्छा है. उसके लिए जितनी वाहवाही चाहिए हो आप रखिए. लेकिन ये बताइए सरकारें होती किसलिए हैं? इस देश की ज़िम्मेदारी लेकर हिफाजत करने को ही न. प्रधानमंत्री से आग्रह है. जिस रोज़ 'छोटा धमाका', 'बड़ा धमाका' से आगे बढ़ जाएं, जिस रोज़ धमाके में, हमले में किसी की जान न जाए. उस रोज़ चौकीदारी को सफल मानिएगा.
Video: AMU के छात्र नेता ने कहा बीजेपी ये काम कर दे तो वो पूरे देश में BJP का प्रचार करेंगे












