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अमित शाह का ऑफर ठुकरा कांग्रेस में शामिल, कर्नाटक में BJP ये नुकसान झेल पाएगी?

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार को ही खींच ले गई कांग्रेस. पांच प्वाइंट्स में जानिए पूरी कहानी.

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कांग्रेस अध्यक्ष की मौजूदगी में शेट्टार ने कांग्रेस की सदस्यता ली. (फोटो- ट्विटर)

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार (Jagadish Shettar in Congress) 17 अप्रैल को कांग्रेस में शामिल हो गए. शेट्टार कांग्रेस के ऑफिस पहुंचे और कांग्रेस की सदस्यता हासिल कर ली. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे. शेट्टार को पहले बीजेपी के बड़े नेता के तौर के नेता के तौर पर जाना जाता था.

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जगदीश शेट्टार के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी देते हुए कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर लिखा,

“एक नया अध्याय, एक नया इतिहास, एक नई शुरुआत. बीजेपी के पूर्व सीएम, पूर्व बीजेपी अध्यक्ष, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, छह बार के विधायक, श्री जगदीश शेट्टार आज कांग्रेस परिवार में शामिल हो गए.”

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इससे पहले शेट्टार ने कहा था कि उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा देने का फैसला किया है. शेट्टार ने बताया था,

“मैंने सिरसी में मौजूद स्पीकर विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी से मिलने का समय मांगा और अपना इस्तीफा दे दिया है. मैं भारी मन से पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं. मैं वो हूं जिसने पार्टी को बनाया और खड़ा किया है. लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने मेरे लिए पार्टी से इस्तीफा देने की स्थिति पैदा कर दी.”

शेट्टार ने ये भी आरोप लगाए कि उनके खिलाफ एक साजिश रची गई थी. उन्होंने कहा कि वो कभी भी एक सख्त स्वाभाव के व्यक्ति नहीं थे, लेकिन BJP ने उन्हें ऐसा बनने के लिए मजबूर किया. इससे पहले पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी के बड़े नेता रहे लक्ष्मण सावदी भी कांग्रेस में शामिल हो गए थे. आखिर इन दोनों नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, पांच प्वाइंट्स में जानते हैं.

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- इंडिया टुडे के संवाददाता रामकृष्ण उपाध्याय की रिपोर्ट के मुताबिक शेट्टार ने कहा है कि पार्टी के भीतर की ताकतों ने उन्हें चुनावी मैदान से बाहर रखने के लिए साजिश रची है. शेट्टार ने कम से कम 20 से 25 विधानसभा क्षेत्रों में अपने निष्कासन के बाद बीजेपी को नुकसान पहुंचाने की बात कही है. इन क्षेत्रों के लिंगायत समुदाय के बीच शेट्टार की अच्छी पहुंच है. ऐसी भी खबरें हैं कि लिंगायत समुदाय शेट्टार को निकाले जाने से नाराज है.

- कर्नाटक 2023 विधानसभा चुनाव में बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व नए चेहरों को शामिल करने पर अड़ा हुआ है. इससे पहले केंद्रीय नेतृत्व ने सावदी के पार्टी छोड़ने को नज़रअंदाज करने की कोशिश की थी. लेकिन शेट्टार के पार्टी छोड़ने की खबरों के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने पैनिक बटन दबा दिया था. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रह्लाद जोशी शेट्टार के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे थे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बसवराज बोम्मई ने बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने शेट्टार को मिलने के लिए बुलाया था. मुलाकात में शेट्टार को राज्यसभा सीट और कैबिनेट पद देने की बात हुई थी. लेकिन शेट्टार ने मना कर दिया. यानी लड़ाई केंद्रीय नेतृत्व और शेट्टार के बीच थी.

-  शेट्टार के पार्टी छोड़ने की खबरों के बाद से मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से मीडिया ने कई सवाल पूछे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बोम्मई के पास सवालों के ठोस जवाब नहीं थे. बोम्मई ने बताया था कि पार्टी ने जानबूझकर परिवर्तन की नीति अपनाई है, लेकिन शेट्टार चुनाव लड़ने पर अड़े हैं. यहां तक पार्टी ने शेट्टार को अन्य विकल्प भी पेश किए. बोम्मई ने ये भी कहा था कि वो अच्छी तरह जानते हैं कि इस स्थिति को कैसे संभालना है. लेकिन शेट्टार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद ये साफ हो गया कि बोम्मई स्थिति को नहीं संभाल पाए.

- उत्तरी कर्नाटक के दो बड़े नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से कांग्रेस का खेमा खुश है. खासतौर पर कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1990 में कांग्रेस नेता वीरेंद्र पाटिल को सीएम के पद से हटाया गया था. इस कारण कांग्रेस की लिंगायत वोट बैंक पर पकड़ कमजोर हुई थी. शेट्टार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस को पहले के मुकाबले ज्यादा लिंगायत वोट मिलने की उम्मीद है.

- चुनावी जानकारों के मुताबिक शेट्टार कभी ऐसे बड़े नहीं रहे हैं जो वोटरों को प्रभावित कर सकें. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2013 में येदियुरप्पा के बीजेपी छोड़ने के बाद बीजेपी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी शेट्टार पर थी, लेकिन वो बुरी तरह फेल हुए थे. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक हुबली-धारवाड़ सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ है. इसलिए कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे शेट्टार के लिए जीत हासिल करना आसान नहीं होगा.

जगदीश शेट्टार के कांग्रेस में शामिल होने का क्या असर पड़ेगा, ये तो चुनाव होने के बाद ही साफ हो सकेगा. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में हुबली-धारवाड़ सीट पर सबकी नज़र रहेगी.

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