यूपी की सियासत में 16 जनवरी का दिन बीजेपी के लिए घटनाओं से भरा रहा. अखिलेश यादव को साइकिल मिलने की खबर और बीजेपी के कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट एक साथ आई. एक खबर ने बीजेपी को उम्मीद से कर दिया, लेकिन दूसरी खबर की वजह से पार्टी में कुकुरझांक की नौबत आ गई है. 149 कैंडिडेट्स की बीजेपी की पहली लिस्ट में बाहरी नेताओं, दागियों और बीजेपी नेताओं के भाई-भतीजों का बोलबाला है, जिसने बुनियादी कार्यकर्ताओं के उत्साह पर बम गिरा दिया है.
भितरघात की ये पांच खबरें मोदी-शाह के माथे पर पसीना ले आएंगी
बीजेपी के कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट ने बुनियादी कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं को नाराज कर दिया है.

'डिफरेंस' का वादा करने वाली पार्टी ने महज 24 घंटे पहले पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं को बड़ी मोहब्बत से टिकट दिए. वादा ये भी था कि दागियों को चुनाव से बाहर रखा जाएगा, लेकिन संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे नेताओं के हाथ में टिकट है. पूर्व सीएम कल्याण सिंह अपने पोते को टिकट दिलाने में कामयाब रहे. वंशवाद के सवाल पर यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य जवाब देते हैं, 'अगर कोई 10 साल से बीजेपी के लिए काम कर रहा है, तो उसे इस बात की सजा नहीं मिलनी चाहिए कि वो किस पिता का पुत्र है.'
ये सब भले राजनीति का एक हिस्सा हो, लेकिन इससे बीजेपी भितरघात की शिकार हो रही है. इस चुनाव को लेकर पार्टी काडर से दिग्गज नेता तक जितने उत्साहित थे, अब उतने ही नाराज भी हैं. कोई मीटिंग छोड़ रहा है, कोई पद छोड़ रहा है, तो कोई पार्टी छोड़ने की चेतावनी दे रहा है. आइए, आपको बताते हैं बीजेपी में भितरघात की वो पांच खबरें, जो मोदी-शाह के माथे पर पसीना ले आएंगी.
1. राजनाथ सिंह
सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के समर्थकों की डिमांड है कि वो गृह मंत्रालय छोड़कर यूपी के मुखिया बन जाएं, पर राजनाथ को अभी सिर्फ अपने बेटे के टिकट की चिंता है. उनके बेटे पंकज सिंह गाजियाबाद की साहिबाबाद या नोएडा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. बीजेपी के लिहाज से ये दोनों सेफ सीट हैं. लेकिन पहली लिस्ट में पंकज को टिकट नहीं मिला. राजनाथ इससे नाराज हैं. पंकज के टिकट पर बीजेपी में लंबे समय से भसड़ चल रही है. इससे नाराज राजनाथ पिछले दिनों कथित तौर पर पार्टी की एक मीटिंग भी छोड़कर चले गए थे.
बीजेपी में पंकज कभी निश्चिंत नहीं रह पाए. दो साल पहले एक पुलिस ऑफिसर का ट्रांसफर कराने के लिए घूस लेने के मामले में उनके नाम पर कानाफूसी हो रही थी, तब राजनाथ को आगे आकर कहना पड़ा, 'न तो मेरे बेटे ने कोई रिश्वत ली है और न ही प्रधानमंत्री ने उन्हें डांटा है. अगर मेरा बेटा दोषी साबित होता है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा.' तब HT ने दावा किया था कि खराब आचरण की वजह से मोदी उन्हें मैदान में नहीं उतारना चाहते हैं. 2012 में जब पंकज को पार्टी की यूपी इकाई का महामंत्री बनाया गया था, तब यूपी के तीन सचिवों ने बगावत करते हुए इस्तीफे की पेशकश कर दी थी.
2. कल्याण सिंह
85 साल के हो चुके कल्याण सिंह न तो राजनीति का मोह छोड़ पा रहे हैं और न अगली पीढ़ियों को सेट करने का. उनके बेटे राजवीर दो बार और बहू प्रेमलता एक बार विधायकी का चुनाव हार चुकी हैं, लेकिन इस बार कल्याण पोते संदीप को टिकट दिलवाकर ही माने. संदीप को अलीगढ़ की अतरौली से टिकट मिला है. कल्याण की नाराजगी की वजह हैं दलबीर सिंह. 8 जनवरी को RLD से बीजेपी में शामिल होने वाले चार बार के विधायक दलबीर सिंह को भी अलीगढ़ से ही बरौली सीट पर उतारा गया है. कल्याण और दलबीर का हमेशा से छत्तीस का आंकड़ा रहा है.
अलीगढ़, एटा, बदायूं और हमीरपुर में अपने चहेतों को टिकट दिलाने के अलावा कल्याण की जिद है कि बुलंदशहर से उनके किसी विरोधी या अप्रिय को टिकट न मिले. पिछले साल विधान परिषद की क्रॉस वोटिंग में सपा में रहते हुए बीजेपी के हक में वोटिंग करने वाले गुड्डू पंडित कल्याण की चिंता का सबब हैं. गुड्डू बुलंदशहर के डिबाई से विधायक हैं और इसी सीट से टिकट मिलने के आश्वासन पर उन्होंने सपा छोड़ी थी. अब कल्याण की वजह से उन्हें बीजेपी से टिकट मिलता नहीं दिख रहा है और चिरौरी के बावजूद अखिलेश भी शायद ही टिकट दें. कल्याण अब भी जिद पर कायम हैं और पार्टी अपने मंदिर एजेंडे के कर्ता-धर्ता रहे इस पुराने योद्धा को नाराज नहीं करना चाहती है.
3. महेश शर्मा
केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा की यूपी चुनाव में दिलचस्पी उनकी नाराजगी में बदलती जा रही है. वजह हैं नोएडा की सीटें. राजनाथ सिंह के बेटे पंकज नोएडा से टिकट चाहते हैं, लेकिन महेश शर्मा ये सेफ सीट किसी को भी देने के मूड में नहीं हैं. वो यहां से विमला बाथम की पैरवी कर रहे हैं. महेश और राजनाथ की तकरार की वजह से ही अभी तक गाजियाबाद और नोएडा की सीट पर टिकट फाइनल नहीं किए गए हैं. अब दोनों में से कोई माने, तो बात बने, लेकिन अगर दोनों ही नहीं मानते हैं, तो बीजेपी को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
4. कलराज मिश्र
लखनऊ में लंबे समय तक बीजेपी का झंडा ऊंचा रखने वाले पार्टी के पुराने नेता कलराज मिश्र वंशवाद की राजनीति करके अपना ब्लड प्रेशर और पार्टी की मुसीबत, दोनों बढ़ा रहे हैं. कलराज को अपने बेटे अमित के लिए विधायकी का टिकट चाहिए और वो भी लखनऊ ईस्ट सीट से. बाप-बेटे, दोनों को इसके अलावा कोई और सीट मंजूर नहीं. इसके अलावा कलराज ने करीब दर्जनभर नाम पार्टी हाईकमान को भेजे थे, जिन्हें वो टिकट दिलाना चाहते हैं, लेकिन पहली लिस्ट में उनकी नहीं चली. राजनाथ के अलावा कलराज भी उन नेताओं में शामिल हैं, जो पिछले दिनों नाराजगी की वजह से कथित तौर पर पार्टी मीटिंग छोड़कर चले गए थे.
5. विजय सांपला
पंजाब में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विजय सांपला वहां हुए टिकट बंटवारे से नाराज हैं. वहां 63 सीटों पर कैंडिडेट घोषित किए जा चुके हैं, लेकिन टिकट बंटवारे में सांपला की एक न चली. इससे नाराज सांपला ने प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री, दोनों ही पदों से इस्तीफे की पेशकश कर दी है. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें समझाने में जुटा हुआ है, लेकिन उनकी एक ही रट है कि जब टिकट बंटवारे में उनकी बात नहीं मानी जा रही, तो उनके पद पर रहने का क्या मतलब है. इस विवाद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विजय सांपला को मिलने बुलाया है. पंजाब में बीजेपी पहले से एंटी-इन्कमबेंसी का सामना कर रही है. ऐसे में बगावत झेलना उसके लिए मुश्किल होगा.
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