बीजेपी ने इस पूरे मामले की 16 अप्रैल को चुनाव आयोग से शिकायत की. पश्चिम बंगाल के बीजेपी नेता जेपी मजमूदार के मुताबिक,
कोई विदेशी भारत की चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता. टीएमसी बांग्लादेशी एक्टर फिरदौस से चुनाव प्रचार कराकर नियम कानून तोड़ रही है. वीजा के नियमों का उल्लघंन करने के लिए फिरदौस को गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
भाजपा इस मुद्दे पर क्यों बिफर पड़ी?
तृणमूल कांग्रेस की इस चुनावी मुहिम से भाजपा खासी नाराज है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि
एक विदेशी टीएमसी के लिए कैसे प्रचार कर सकता है. कल को वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को चुनाव प्रचार के लिए बुला लेंगे. हम इसकी निंदा करते हैं. एक बांग्लादेशी कलाकार भारत के चुनाव में इस तरह कैसे भाग ले सकता है. टीएमसी बीजेपी से डरी हुई है, इसलिए वह बांग्लादेशी को प्रचार के लिए बुला रही है.टीएमसी का इस मामले में क्या कहना है? टीएमसी का कहना है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है. कोई भी व्यक्ति किसी भी पार्टी के लिए प्रचार कर सकता है. टीएमसी के नेता ने कहा,
टीएमसी कानून का पालन करने वाली पार्टी है. हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो. अगर उनका कहना है कि हम अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि रामनवमी पर कौन लोग हथियार लेकर यात्रा निकाल रहे थे और किसे लुभाने की कोशिश कर रहे थे.क्या कहती है आदर्श चुनाव आचार संहिता ? किसी विदेशी का किसी पार्टी के लिए प्रचार करना आचार सहिंता का उल्लंघन नहीं है. पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि विदेशी से चुनाव प्रचार कराने को लेकर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में कुछ नहीं लिखा गया है. उन्होंने कहा था अगर उन्हें शिकायत मिलती है तो वो इस मामले को देखेंगे.
कौन हैं फिरदौस अहमद, जिनकी वजह से बवंडर मच गया?

एक्टर फिरदौैस ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है.
एक्टर फिरदौस अहमद 200 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं. वह बांग्लादेश के साथ ही पश्चिम बंगाल में भी फेमस हैं. उन्हें 4 बार बेस्ट एक्टर के लिए बांग्लादेश नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिल चुका है. अमार सपनो तुम्ही, एक कप चा, मिट्टी और होतात बृष्टी जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं. बांग्ला फिल्मों में वो काफी समय से एक्टिव हैं. चूंकि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमाएं मिलती हैं, इसलिए दोनों का कल्चर कमोबेश एक जैसा ही है. और तृणमूल कांग्रेस इसी का लाभ उठाने की कोशिश करती दिख रही है. वैसे आदर्श चुनाव आचार संहिता में इसका ब्योरा भले न दिया गया हो, मगर नैतिक तौर पर इसे सही तो नहीं ही कहा जाएगा.
आजम खान की टिप्पणी के बाद जया प्रदा का इंटरव्यू












