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अमित शाह के इन 5 'पांडवों' ने बीजेपी को जिताया बंगाल का चुनावी 'महाभारत'?

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आखिरकार पश्चिम बंगाल फतह कर लिया. भगवा पार्टी ने अभेद्य माने जा रहे इस किले में ऐसी सेंध लगाई है कि 293 विधानसभा सीटों वाले बंगाल में बीजेपी को तकरीबन 208 सीटें मिलती दिख रही हैं, जो बहुमत से काफी ज्यादा है.

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अमित शाह की टीम ने ममता बनर्जी का किला भेद दिया. (फोटो- India Today)

रुझानों के मुताबिक, 208 सीटों के साथ बीजेपी बंगाल में प्रचंड जीत हासिल कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर बीजेपी ने बंगाल में चुनाव लड़ा और ऐसा अभूतपूर्व प्रदर्शन किया, जिसकी कल्पना पार्टी के लोगों ने भी नहीं की थी. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस चुनाव के सबसे बड़े और असरदार रणनीतिकार माने जा रहे हैं. लेकिन यह जीत किसी एक व्यक्ति की नीति या प्लानिंग का नतीजा नहीं थी. बीजेपी ने 5 नेताओं की एक टीम बनाई थी, जिसने अमित शाह के साथ मिलकर पर्दे के पीछे रहते हुए जमीन पर ऐसा काम किया कि इतिहास ही रच दिया.

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धर्मेंद्र प्रधान

सबसे पहला नाम धर्मेंद्र प्रधान का है. वह मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री हैं. प्रधान बीजेपी के बंगाल अभियान के मुख्य रणनीतिकार थे. उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक और जातिगत समूहों के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखते हुए काम किया. प्रधान ने पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप और प्रदेश की टीम के बीच एक मजबूत पुल का काम किया, जिसने पार्टी में किसी भी तरह के असंतोष को पनपने नहीं दिया. पार्टी ने एकजुट होकर अभियान चलाया और आखिरकार जीत हासिल कर ली. 

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भूपेंद्र यादव ने बूथ लेवल पर कार्यकर्ताओं को संगठित किया.
भूपेंद्र यादव

अगला नाम भूपेंद्र यादव का है. वह केंद्रीय मंत्री हैं. राज्य में पार्टी का मैनेजमेंट संभालने का काम इन्हीं का था. बूथ लेवल पर उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को संगठित किया. जमीनी स्तर पर उनके काम ने पार्टी की ताकत बढ़ाई और उसे वो लक्ष्य हासिल हुए, जिसकी दरकार थी. 

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सुनील बंसल चार सालों से बंगाल में बीजेपी के लिए जमीन तैयार कर रहे थे.
सुनील बंसल 

बीजेपी के महासचिव हैं. वह भी अमित शाह के पांच प्रमुख रणनीतिकारों की लिस्ट में रहे. 'पन्ना प्रमुख' मॉडल के जरिए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का एक ऐसा नेटवर्क बनाया, जिसने TMC की कैडर आधारित संरचना को सीधी चुनौती दी. इसके अलावा उन्होंने पार्टी के भीतर तमाम नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने और आंतरिक समस्याओं को सुलझाने में भी अहम भूमिका निभाई. 

पिछले चार सालों से सुनील बंसल बंगाल के लिए पूरी तरह से जुटे रहे. हर चुनावी इलाके से आने वाले फीडबैक पर फोकस किया और पार्टी में मौजूद कमियों को दूर करके ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ जमीन पर आंदोलन को गति दी. 

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बिप्लब देब के आक्रामक प्रचार ने कई इलाकों में बीजेपी को मजबूत किया.
बिप्लब देब

त्रिपुरा में वामपंथी पार्टी को हटाकर बीजेपी की जीत का सूत्र लिखने वाले बिप्लब देब का भी बीजेपी की जीत में बड़ा हाथ है. उन्होंने बंगाल के उन इलाकों पर खासतौर से फोकस किया, जहां की संस्कृति त्रिपुरा से मेल खाती है. इन इलाकों में उन्होंने आक्रामक प्रचार किया. इसने पार्टी के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया. पार्टी को इसका फायदा मिला. 

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अमित मालवीय बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख हैं.
अमित मालवीय

सोशल मीडिया पर बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत हैं. अमित मालवीय बीजेपी की आईटी सेल के प्रमुख हैं. बंगाल चुनाव को लेकर उन्होंने डिजिटल मोर्चे पर नैरेटिव की लड़ाई को लीड किया. सोशल मीडिया का फायदा उठाते हुए उन्होंने बंगाल से जुड़े तमाम मुद्दों को बड़े पैमाने पर उठाया, जिससे प्रदेश में जनमत को आकार देने में मदद मिली. 

वीडियो: पश्चिम बंगाल और असम में BJP की जीत पर PM नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?

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