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असम में कांग्रेस का '3G गठजोड़' बह गया, सिर्फ 'मियां मुस्लिम' के दम पर नहीं जीते हिमंता बिस्वा सरमा

Assam Election: CM Himanta Biswa Sarma ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ और असम की संस्कृति पर खतरे का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. खासकर 'मियां मुस्लिम' को लेकर उनके बयान और अभियान ने गैर-मुस्लिम और स्थानीय मतदाताओं को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई.

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असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा (बाएं) और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई (दाएं). (ITG)
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सुशीम मुकुल

असम विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रचंड बहुमत की तरफ बढ़ रही है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 80 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना ली है. इस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष पूरी तरह नाकाम रहा. '3G गठजोड़', माने कांग्रेस के गौरव गोगोई, रायजोर दल के अखिल गोगोई और असम जातीय परिषद के लुरिनज्योति गोगोई को हिमंता की स्ट्रेटेजी ने बेदम कर दिया. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई हार गए हैं. लुरिनज्योति भी हार की तरफ बढ़ रहे हैं. सिर्फ अखिल को ही जीत मिलती दिख रही है.

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126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में कांग्रेस मात्र 20 सीटों पर आगे चल रही है. जोरहाट सीट पर BJP के मौजूदा विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने गौरव गोगोई को 23,182 वोटों के अंतर से हरा दिया है. हितेंद्र को 69,439 और गौरव को 46,257 वोट मिले.

इंडिया टुडे से जुड़े सुशीम मुकुल की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने इस बार ऊपरी असम (Upper Assam) में अहोम समुदाय के वोटों को एकजुट करने की रणनीति बनाई थी. तीनों गोगोई नेता अहोम समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं.

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कांग्रेस नीत विपक्ष ने तीनों गोगोई को आगे कर यह मैसेज देने की कोशिश की कि ऊपरी असम उनका मजबूत गढ़ है. लेकिन जमीनी हकीकत अलग दिखी. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के साथ गौरव गोगोई का हिमंता की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा पर एक से ज्यादा पासपोर्ट रखने जैसे आरोप लगाना भी काम नहीं आया. जानकारों का कहना है कि चुनावी नतीजे देखकर लग रहा है कि मतदाताओं ने केवल जातीय पहचान के बजाय विकास और स्थिर लीडरशिप को ज्यादा अहमियत दी.

हिमंता का ऊपरी असम पर फोकस

हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता इस चुनाव में साफ नजर आई. उन्हें 'मामा' के नाम से जाना जाता है, जो लोगों के बीच एक अपनापन और भरोसा पैदा करता है. ऊपरी असम में 'बामन राज' के विरोध की जड़ें गहरी हैं. हिमंता खुद ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. इसके बावजूद उन्होंने ऊपरी असम में पकड़ बनाने पूरी कोशिश की.

हिमंता सरकार ने असम में, खासकर ऊपरी असम में सड़कों, हाईवे, पुल और स्वास्थ्य-शिक्षा के क्षेत्र में काम किया. गुवाहाटी से डिब्रूगढ़ तक तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे, बेहतर कनेक्टिविटी और डिब्रूगढ़ को दूसरी प्रशासनिक केंद्र बनाने की योजना ने लोगों को प्रभावित किया.

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असम विधानसभा चुनाव के पल-पल के अपडेट यहां पढ़ें

डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी एडमिनिस्ट्रेटिव राजधानी के तौर पर डेवलप किया जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ में एक नए असम लेजिस्लेटिव असेंबली कॉम्प्लेक्स और एक MLA हॉस्टल की नींव रखी. इससे दिसपुर और डिब्रूगढ़ करीब आएंगे. सरमा ने 2027 तक काफी प्रोग्रेस का टारगेट रखा है.

कमजोर रहा गोगोई फॉर्मूला

दूसरी तरफ, कांग्रेस का 3G गठजोड़ इन मुद्दों का मजबूत जवाब नहीं दे सका. चुनावी मैदान में भी उनकी स्थिति कमजोर दिखी. गौरव गोगोई जोरहाट सीट से हार गए, जबकि लुरिनज्योति गोगोई भी खोवांग में पिछड़ रहे हैं. सिर्फ अखिल गोगोई शिवसागर में मामूली बढ़त बनाए हुए हैं.

'मियां मुस्लिम' और ‘घुसपैठ’ का मुद्दा

इस चुनाव में एक और बड़ा फैक्टर रहा- हिमंता सरमा की 'कंसोलिडेशन' की राजनीति. उन्होंने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ और असम की संस्कृति पर खतरे का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. खासकर 'मियां मुस्लिम' को लेकर उनके बयान और अभियान ने गैर-मुस्लिम और स्थानीय मतदाताओं को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई. इससे भाजपा को बड़ा जनसमर्थन मिलता दिखा.

असम की आबादी में अहोम समुदाय करीब 5 फीसदी है. इस बार ये समुदाय पूरी तरह एकजुट नहीं हुआ. दूसरी तरफ, भाजपा ने सिर्फ एक समुदाय पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर हिंदू और स्थानीय पहचान पर फोकस किया, जो ज्यादा असरदार साबित हुआ. इससे हिंदू और मूल असमी वोटरों को एक साथ लाने या उनका ध्रुवीकरण करने में मदद मिली. कांग्रेस का 3G, यानी तीन गोगोई का दांव काम नहीं आया.

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