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कौन है कांग्रेस का ये स्टार प्रचारक संत जिसे राजनाथ सिंह के सामने उतारा गया है?

पिछले पांच साल में बीजेपी का जितना विरोध कांग्रेस ने नहीं किया, उससे ज्यादा इस इंसान ने किया है.

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आचार्य प्रमोद कृष्णम बनाम राजनाथ सिंह बनाम पूनम सिन्हा, लखनऊ लोकसभा सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को टिकट दिया है. बीजेपी की ओर से राजनाथ सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने ठीक उसी दिन आचार्य प्रमोद कृष्णम के नाम का ऐलान किया है जिस दिन शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं. गठबंधन की ओर से वह लखनऊ से चुनाव लड़ेंगी. लखनऊ में 6 मई को वोटिंग है. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 18 अप्रैल है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अप्रैल मंगलवार को ही इस सीट से अपना नामांकन दाखिल किया. समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा - "लखनऊ से गठबंधन की प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा होंगी. हमारी कांग्रेस से अपील है कि वह अपना उम्मीदवार लखनऊ से ना उतारे ताकि भारतीय जनता पार्टी को हराया जा सके. वह 18 अप्रैल को नामांकन दाखिल करेंगी." वह कांग्रेस से उम्मीदवार नहीं उतारने की अपील कर रहे थे, लेकिन शाम होते ही कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम के नाम का ऐलान कर दिया.
कौन हैं आचार्य प्रमोद कृष्णम? आचार्य प्रमोद का जन्म संभल (यूपी) में हुआ. आध्यात्म का रास्ता अपना चुके आचार्य प्रमोद कभी प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेहद करीबी थे. उन्होंने कांग्रेस पार्टी में कई जिम्मेदारियां संभाली हैं. वह संभल से चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. कल्कि पीठ, संभल के पीठाधीश्वर आचार्य कृष्णम छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस के स्टार प्रचारक थे. कुछ समय पहले अखाड़ा परिषद् ने उन्हें फर्जी संतों की सूची में डाल दिया था.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, भारत में हिन्दू सन्तों और साधुओं का सर्वोच्च संगठन है. इसमें 14 अखाड़े शामिल हैं. 17 मार्च 2018 को परिषद ने दिल्ली के चक्रपाणि महाराज और सम्भल के आचार्य प्रमोद कृष्णन को फर्जी संतों की सूची में डाला था. परिषद् ने कहा था कि दोनों बाबा किसी संन्यासी परंपरा से नहीं आते हैं. इसके पहले परिषद ने 17 बाबा लोगों को फर्जी घोषित किया था.
अखाड़ा परिषद की ओर से फर्जी बाबा घोषित किए जाने को लेकर  आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कड़ी नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि "अखाड़ा परिषद ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दबाव में यह काम किया है. संत समाज को विभाजित करने का काम अखाड़ा परिषद कर रहा है."
कुछ समय पहले अखाड़ा परिषद ने आचार्य प्रमोद कृष्णम फर्जी संतों की सूची में डाल दिया था.
आचार्य प्रमोद कृष्णम मौजूदा बीजेपी सरकार का पूरे आक्रामक ढंग से विरोध करते रहे हैं.

क्या है लखनऊ सीट का गणित 2014 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ संसदीय सीट पर 53.02 फीसदी मतदान हुए थे. राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी को 2 लाख 72 हजार वोटों से हराया था. राजनाथ सिंह को 5,61,106 वोट मिले थे. 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी ने लखनऊ से जीत हासिल की थी. 2009 में लाल जी टंडन ने इस सीट से चुनाव जीता था. लखनऊ बीजेपी का मजबूत गढ़ है. लखनऊ लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं. पांचों सीटों पर बीजेपी का कब्जा है.


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