पुणे में एक रिसर्च इंस्टीट्यूट है. CSIR NCL. यानी CSIR नेशनल केमिस्ट्री लैब. 21 अगस्त 2022 को यहां केंद्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह आए हुए थे. एक बिल्डिंग का उद्घाटन करने. इसी दौरान एक रिसर्च स्टूडेंट ने सैनेटरी पैड्स के सही तरीके से डिस्पोजल की व्यवस्था न होने का मुद्दा उठाया. छात्रा ने कहा कि ज्यादातर CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) इंस्टीट्यूट्स में सैनेटरी पैड को सही तरीके डिस्पोज करने की सुविधा नहीं है.
केंद्रीय मंत्री से PhD स्कॉलर ने कहा, CSIR इंस्टीट्यूट्स में सैनिटरी पैड डिस्पोजल की व्यवस्था नहीं
पुणे की CSIR नेशनल केमिस्ट्री लैब से PhD कर रही स्टूडेंट ने केंद्रीय साइंस टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के सामने सैनेटरी पैड के डिस्पोजल का मुद्दा उठाया.


साइंस एंड टेक्नोलॉजी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह नेशनल केमिकल लैब की नई बिल्डिंग CSIR-URDIP का उद्घाटन करने पहुंचे थे. कार्यक्रम के दौरान रिसर्च स्कॉलर्स से बातचीत के दौरान PhD स्टूडेंट ने सैनिटरी पैड का मुद्दा उठाया. PhD स्टू़डेंट ने कहा,
मुझे नहीं पता ये सही प्लेटफार्म है या नहीं, लेकिन हाल ही में हमें पता चला है कि कई CSIR इंस्टीट्यूट्स में प्रॉपर सैनिटरी पैड डिस्पोजल मशीन नहीं है. साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री फीमेल रिसर्चर्स की बेहतरी के लिए क्या कर रहा है?
रिसर्च स्कॉलर के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा,
यकीनन ये एक जरूरी मुद्दा है. शायद इसकी एक वजह ये भी है कि पूर्व में हमारे यहां महिला रिसर्चर्स काफी कम थीं. अब जब महिला रीसर्चर्स की संख्या बढ़ रही है तो इस मुद्दे पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए और दिया जाएगा.
डॉ. जितेंद्र सिंह ने NCL के डायरेक्टर डॉ. अशोक लेले से इस समस्या का समाधान करने के लिए कहा. जिस पर डॉ. लेले ने कहा कि एक स्टार्ट अप की मदद से इस मसले पर काम हो रहा है. उन्होंने बताया, NCL के पास स्थित एक स्टार्ट अप इस मुद्दे पर काम कर रहा है और उनके पास इसके लिए एक इंन्वेंटिव सॉल्यूशन भी है. हम इस स्टार्ट अप से बात कर के हमारे हॉस्टल्स और लैबोरेट्री में इसे लगवाने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें थोड़ा समय लग रहा है पर हमारे प्रयास जारी हैं.
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