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ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयर हुए धड़ाम! एक झटके में 14% लुढ़के, निवेशकों पर क्या होगा असर?

Zee Entertainment Share: एस्सल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने रीपेमेंट प्लान को चुनौती देने की तैयारी में है. इसके बाद से कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है. जी ग्रुप की एक कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली.

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सुभाष चंद्रा ने 22,000 करोड़ रुपये के पर्सनल लोन से जुड़े आरोपों का खंडन किया (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज कंपनी के शेयर सोमवार 31 अगस्त को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 14% तक गिर गये और यह मई के बाद से सबसे निचले स्तर 86.90 रुपये प्रति शेयर तक आ गये।
  • NCLT ने सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये की स्वीकृत मांगों में से केवल करीब 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मंजूरी दी, जिससे कंपनी के शेयरों में गिरावट आई।
  • केनरा बैंक, यूनियन बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने NCLT के आदेश को चुनौती दी है और इस विवाद के चलते आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

सोमवार 31 अगस्त को जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज कंपनी के शेयरों में 14% तक की भारी गिरावट आई. आज की गिरावट को जोड़ दिया जाये तो पिछले चार कारोबारी सत्रों में कंपनी का शेयर 17% गिरा है. शुरुआत में कंपनी का शेयर मामूली रूप से गिरकर 101 रुपये पर खुला और जल्द ही भारी बिकवाली के दबाव में आ गया.

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सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर जी के शेयर गिरकर 86.90 रुपये प्रति शेयर पर तक गिर गए.  यह इस साल मई के बाद से कंपनी के शेयर का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, कारोबार बंद होने के बाद कंपनी के शेयर करीब 8% गिरकर 94 रुपये के नीचे बंद हुआ.

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क्यों गिर रहा है कंपनी का शेयर

इकोनॉमिक  टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज शेयर गिरने की वजह ये है कि नेशनल लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने ज़ी एंटरटेनमेंट के फाउंडर सुभाष चंद्रा को 99.97 हेयरकट को मंजूरी दी है. 

एनसीएलटी (NCLT) के आदेश के मुताबिक, सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत लेनदारों के दावों की जगह सिर्फ करीब 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा. इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वहीं, सुभाष चंद्रा ने 22,000 करोड़ रुपये के पर्सनल लोन से जुड़े आरोपों का खंडन किया. साथ ही, दावा किया कि कर्ज देने वाले संस्थानों का वास्तविक दावा 3,992 करोड़ रुपये का है.  

इसके अलावा अपने कर्ज,  पर्सनल गारंटी और दिवालियापन की कार्यवाही को लेकर उठ रहे सवालों का सामना कर रहे सुभाष चंद्रा ने कहा है कि समूह ने अपने कुल 45,000 करोड़ रुपये के लोन में से लगभग 43,000 करोड़ रुपये चुका दिए हैं.  उन्होंने बैंकिंग सिस्टम और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस स्थिति की जांच के लिए एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने का आग्रह किया.

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दूसरी ओर, शनिवार 29 अगस्त को केनरा बैंक , यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने NCLT के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एस्सेल समूह के फाउंडर सुभाष चंद्रा द्वारा प्रस्तावित रीपमेंट प्लान को मंजूरी दी गई है.

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