उनका नाम ‘मोहम्मद दीपक’ नहीं है. लेकिन अब वो इसी नाम से जाने जाते हैं. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प में एक मुस्लिम दुकानदार का साथ देने के बाद उन्हें यही नाम मिला था. झड़प के इस मामले में दीपक के खिलाफ ही FIR दर्ज हो गई थी. इतना ही नहीं, उन्हें इस मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट करने से भी रोक दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतरिम आदेश देकर दीपक को बड़ी कानूनी राहत दी है.
‘मोहम्मद दीपक’ के खिलाफ नहीं होगी कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया वाली रोक भी हटा दी
उत्तराखंड में बजरंग दल से झड़प के बाद ‘मोहम्मद दीपक’ नाम से चर्चित हुए दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR पर कार्रवाई रोक दी और मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर हाईकोर्ट की लगाई पाबंदी भी हटा दी.

सर्वोच्च अदालत ने दीपक के खिलाफ दर्ज FIR पर कोई कार्रवाई करने से रोक लगा दी है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर इस केस से जुड़े पोस्ट करने पर उत्तराखंड हाई कोर्ट की लगाई रोक भी हटा दी है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दीपक के खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती देने वाली याचिका के प्रतिवादियों (जिसके खिलाफ मुकदमा हो) को नोटिस भी जारी किया है.
वकील ने क्या तर्क दिया?लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दीपक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि घटना के बाद मोहम्मद दीपक ने खुद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. जबकि, उनके खिलाफ ही FIR दर्ज कर ली गई. सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि एक ‘भले इंसान’ के खिलाफ इस तरह की शिकायत कैसे की जा सकती है? सिंघवी के मुताबिक, दीपक पर बीएनएस की धारा-191 लगाई गई थी. यह दंगा करने के आरोप पर लगाई जाने वाली धारा है. इस आरोप के लिए जरूरी शर्तें भी पूरी नहीं हुई थीं. यही वजह थी कि बाद में इस आरोप को हटा दिया गया.
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क्या मामला है?ये पूरा मामला 26 जनवरी 2026 का है. ‘हल्क जिम’ चलाने वाले दीपक कुमार की बजरंग दल के सदस्यों के साथ झड़प हो गई थी. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम व्यक्ति के अपनी दुकान में बाबा शब्द इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई थी. इसे लेकर दुकानदार से उनकी झड़प हो गई. तभी दीपक कुमार की एंट्री हुई, जिन्होंने मुस्लिम दुकानदार का पक्ष लिया और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ गए. इस झड़प के दौरान दीपक को ये कहते हुए सुना गया था, ‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.’
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और मोहम्मद दीपक अचानक से ‘सनसनी’ बन गए. उन्होंने इस घटना की शिकायत थाने में की, लेकिन बाद में उन पर ही FIR दर्ज हो गई. दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. लेकिन हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने दीपक को जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया. दीपक और मामले से जुड़े एक अन्य व्यक्ति को कोर्ट ने ये भी कहा कि वो इस मामले से जुड़ा कोई बयान न दें और न ही सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करें.
हाई कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, जिस पर अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने दीपक के खिलाफ दर्ज FIR पर कार्यवाही रोक दी. सोशल मीडिया वाला आदेश भी रद्द कर दिया. यह दीपक के लिए एक बड़ी कानूनी राहत है.
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