केंद्र सरकार ने 30 जुलाई को पेट्रोल में 20 परसेंट एथेनॉल मिलाने के फैसले का जोरदार बचाव किया. सरकार ने संसद में कहा कि देश भर में 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां E20 पेट्रोल से चल रही हैं. इसके बावजूद E20 पेट्रोल की वजह से गाड़ियों के इंजन में बड़ी खराबी आने का कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है.
'...तो पेट्रोल 125 रुपये में मिलता', सरकार ने संसद में E20 फ्यूल के फायदों की झड़ी लगा दी
सरकार ने दावा किया कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल न मिलाया गया होता तो पश्चिम एशिया संकट के दौरान देश में पेट्रोल का दाम 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था.

बिजनेस टुडे में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने यह भी दावा किया कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल न मिलाया गया होता तो पश्चिम एशिया संकट के दौरान देश में पेट्रोल का दाम 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था.
'E20 न होता तो पेट्रोल 125 रुपये में मिलता'लोकसभा में पेश किए गए एक लिखित बयान में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें ढाई साल से अधिक समय से E15+ और E20 पेट्रोल पर चल रही हैं. इस दौरान ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है कि किसी गाड़ी का इंजन खराब हुआ हो या गाड़ी ही खराब हो गई. न ही इस तरह की खराबी का कोई सत्यापित प्रमाण मिला है.
सरकार ने कहा कि जिन कार कंपनियों के सर्विस सेंटर में गाड़ियां सर्विस होने के लिए आईं, अगर उन आंकड़ों की बात करें तो उससे भी पता चलता है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब नहीं हो रही हैं.
उन्होंने एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की. इसमें लगभग 1.5 करोड़ पुराने वाहन शामिल थे. लेकिन इन गाड़ियों में E20 की वजह से इंजन खराब होने, गाड़ी की टंकी में जंग लगने या गाड़ियों के पुर्जे जल्दी खराब होने जैसी समस्या नहीं पाई गई.
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पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से काफी पैसा बच रहा है. उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. 317 लाख टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ. करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में कमी आई है. इसके अलावा किसानों को भी खूब फायदा हुआ. इससे किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त कमाई हुई.
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