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बढ़त के साथ खुले शेयर बाजार के 9 लाख करोड़ कैसे डूबे? निवेशक रिस्क लें या धैर्य रखें?

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) के शेयरों में सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. कंपनी का शेयर 6% से अधिक लुढ़क गया. इंडिगो, टाइटन, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, एमएंडएम, एसबीआई, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, एटर्नल (जोमैटो की पैरैंट कंपनी), अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और पावर ग्रिड के शेयरों में भी 2-4% की गिरावट आई.

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16 सितंबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • 15 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 778 अंक गिरकर 74,003 और निफ्टी 279 अंक गिरकर 23,118 पर बंद हुआ, जिससे बीएसई की कुल मार्केट कैप में 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई।
  • शेयर बाजार की गिरावट के पीछे प्रमुख कारण अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5% पार करना, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना, और पश्चिम एशिया में तनाव एवं कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि बताई गई है।
  • बाजार में गिरावट से विदेशी निवेश पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशक 16 सितंबर की फेडरल रिजर्व बैठक के नतीजों तथा 5-7 अक्टूबर की RBI की बैठक पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे अगले आर्थिक कदम तय होंगे।

15 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार सुबह की बढ़त को तेजी से पलटते हुए भारी गिरावट के साथ बंद हुआ. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि सेंसेक्स मंगलवार को 778 अंक गिरकर 74,003 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 279 अंक गिरकर 23,118 पर आ गया. 

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साथ ही बेंचमार्क सूचकांकों में दिन के ऊपरी स्तरों से करीब 2% की भारी गिरावट दर्ज की गई. इस तेज गिरावट के कारण बंबई शेयर बाजार (बीएसई) में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट आई. मार्केट कैप एक्सचेंज पर लिस्टेड शेयरों की कुल वैल्यू को कहते हैं.

इन शेयरों में भारी गिरावट

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) के शेयरों में सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. कंपनी का शेयर 6% से अधिक लुढ़क गया. इंडिगो, टाइटन, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, एमएंडएम, एसबीआई, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, एटर्नल (जोमैटो की पैरैंट कंपनी), अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और पावर ग्रिड के शेयरों में भी 2-4% की गिरावट आई. वहीं, एचसीएलटेक, इंफोसिस, टेकएम और टीसीएस के शेयरों में 4% तक की तेजी आई. इसके अलावा एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 1% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई.

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शेयर बाजार में भारी गिरावट क्यों ?

इकोनॉमिक टाइम्स ने शेयर बाजार में गिरावट के 4-5 प्रमुख कारण बताए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बॉन्ड यील्ड में जोरदार बढ़ोतरी से भारतीय शेयर बाजार औंधे मुंह गिरे हैं. 10 साल वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बेंचमार्क यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5% के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गई है. 

बाजार में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है. अमेरिका का केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व 16 सितंबर को अपनी बैठक के नतीजे घोषित करने के लिए तैयार है. रॉयटर्स के एक सर्वेक्षण में शामिल अधिकतर अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस सप्ताह ब्याज दरें बढ़ा सकता है. मार्च के अंत तक भी कम से कम एक और बढ़ोतरी होने की आशंका है. 

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बाजार में लगातार जारी गिरावट की तीसरी वजह ये है कि ईरान-अमेरिका युद्ध और बढ़ गया है. 14 सितंबर को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक सैन्य अड्डे पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं.

शेयर बाजार की एक और सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी है. इंटनरेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. ब्रेंट क्रूड वायदा 2% से अधिक बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया.

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एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को क्या सलाह दी?

वीके वेल्थवाइज के रिसर्च एनालिस्ट सीए वत्सल खेमका ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत नहीं है. जब अमेरिका में बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश करने का आकर्षण कुछ कम हो सकता है. ऐसे में भारतीय इक्विटी बाजार और रुपये दोनों पर दबाव देखने को मिल सकता है.

अब बाजार की नजर 16 सितंबर की अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है. अगर अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होती है या दरें लंबे समय तक ऊंची रहने के संकेत मिलते हैं, तो ग्लोबल बाजारों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है.

भारतीय रुपये में कमजोरी भी शेयर बाजार के लिए चिंता का एक और बड़ा कारण है. अमेरिकी डॉलर के बरक्स रुपया करीब 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास बना हुआ है. ऐसे माहौल में अगर एक तरफ क्रूड महंगा हो और दूसरी तरफ रुपया कमजोर हो, तो भारत के लिए आयात की लागत और बढ़ जाती है. इससे आने वाले समय में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है.

वत्सल खेमका बताते हैं, “अभी बाजार में तुरंत बहुत आक्रामक होने की जरूरत नहीं है. आने वाले दिनों में क्रूड की दिशा, अमेरिकी फेड का रुख और पश्चिम एशिया की स्थिति बाजार की चाल के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगी. इसके बाद 5-7 अक्टूबर को RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक भी अहम होगी. अगर क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहता है तो महंगाई को लेकर RBI के सामने चुनौती बढ़ सकती है.”

उनका कहना है कि मौजूदा माहौल में निवेशकों को अपने पैसे सुरक्षित रखने पर ध्यान देना चाहिए. साथ ही अच्छी कंपनियों के शेयर धीरे-धीरे खरीदते रहना चाहिए. वे आगे बताते है कि अगले कुछ समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. ऐसे समय में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी चीज धैर्य है. बाजार जब डर में होता है, तब अच्छे अवसर भी बनते हैं, लेकिन सही कीमत और सही समय का इंतजार करना उतना ही जरूरी है. 

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