रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा बिल अमेरिकी संसद में पास होने पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत अपनी 140 करोड़ आबादी की तेल और गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार देश की जरूरत के हिसाब से दुनिया के अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदना जारी रखेगी.
तेल और गैस खरीदना जारी रहेगा... अमेरिका के 100% टैरिफ बिल पर भारत का जवाब
पिछले दो साल में रूस दुनियाभर में जितना तेल विदेशों में बेचा है, उसमें भारत की हिस्सेदारी 36% है. इस तरह से देखें तो भारत रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है. रूस के तेल निर्यात में 50% हिस्सेदारी के साथ चीन पहले स्थान पर रहा. अब अगर ऐसे में अमेरिका का प्रतिबंध लगता है, तो भारत के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं.

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पारित किया. यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल खरीदने वाले भारत और कुछ अन्य देशों पर 100% टैरिफ लगाने की ताकत देता है. अब इस विधेयक पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हस्ताक्षर करेंगे .
प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक की खास बातें क्या हैं?अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस प्रतिबंध विधेयक का मकसद रूस की कमाई के सभी रास्तों को बंद करना है. यह विधेयक दो साल से ज्यादा समय में अमेरिकी कांग्रेस (अमेरिकी संसद) द्वारा पारित यूक्रेन के समर्थन वाला पहला बड़ा कदम है. रूस प्रतिबंध विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख विदेशी खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की ताकत देता है.
इसके अलावा इस बिल की एक और खास बात यह है कि यह इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम से कम कीमत वाले रूसी तेल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जहाजों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और समुद्री ऑपरेटरों पर रोक लगाता है. इसमें रूस के बड़े नेताओं, वहां के अधिकारियों, बैंकिंग संस्थानों और एनर्जी सेक्टर के बिजनेसमैन को भी दंडित करने का प्रावधान है.
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भारत, रूस से कितना तेल आयात करता है?भारत और चीन रूस से सबसे ज्यादा तेल और कोयला खरीदने वाले देशों में शामिल हैं. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के मुताबिक जून 2026 के आखिर तक रूस से एलएनजी (गैस) आयात करने वाले देशों में भारत सातवें नंबर पर था.
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत ने रूस से कच्चे तेल का रिकॉर्ड आयात किया है. भारत में रूसी तेल के आयात में महीने-दर-महीने 34% का इजाफा हुआ. रिपोर्ट में कहा गया है कि 5 दिसंबर, 2022 और जून 2026 के बीच, चीन ने रूस के कुल कोयला निर्यात का 37% हिस्सा खरीदा, जबकि भारत ने रूस के कोयला निर्यात का 19% हिस्सा खरीदा.
रूस दुनियाभर में जितना तेल विदेशों में बेचता है, उसमें भारत की हिस्सेदारी 36% थी. इस तरह से देखें तो भारत रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया. रूस के तेल निर्यात में 50% हिस्सेदारी के साथ चीन पहले स्थान पर रहा.
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