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आने वाली है मंदी, भारत पर क्या होगा असर? IMF ने बताया अर्थव्यवस्था का हाल

मिडिल ईस्ट संकट और रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. IMF ने वैश्विक मंदी का अनुमान जताया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत पर इसका असर काफी कम रहेगा.

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IMF का मानना ​​है कि भारत वैश्विक मंदी से अप्रभावित रहेगा

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  • इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का पूर्वानुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है, जो जुलाई के 6.4% अनुमान से 0.6 प्रतिशत अंक अधिक है।
  • IMF का मानना है कि वैश्विक मंदी और मिडिल ईस्ट युद्ध के बावजूद भारत पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव होगा क्योंकि भारत की घरेलू मांग मजबूत है और वह तेल-गैस के लिए विदेशों पर कम निर्भर है।
  • इस संशोधित अनुमान के अनुसार भारत की आर्थिक मजबूती बनी रहेगी और 2027 के लिए भी विकास दर 7% रहने का अनुमान है, जिससे आर्थिक नीतियों और निवेश के फैसलों पर असर पड़ सकता है।

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) का पूर्वानुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड का मानना ​​है कि भारत पर वैश्विक मंदी का असर सीमित रहेगा. IMF ने इसी साल जुलाई में भारत की आर्थिक विकास दर 6.4% रहने का अनुमान जताया था.

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आईएमएफ ने जुलाई के अनुमान से 2026 के लिए भारत के विकास पूर्वानुमान को 0.6 प्रतिशत अंक बढ़ाया है. इसी साल अप्रैल में आईएमएफ ने अनुमान 0.5% अंक बढ़ा दिया है. आईएमएफ ने साल 2027 के लिए इसे रिवाइज करते हुए 7% कर दिया है. यह जुलाई के 0.3% अंक और अप्रैल के0.5% अंकों के अनुमान से अधिक है.

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घरेलू मांग बनेगी संजीवनी 

आईएमएफ का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारत की आर्थिक तरक्की की रफ्तार उम्मीद से बेहतर रहने का अनुमान है. आईएमएफ का कहना है कि भारत में घरेलू मांग मजूबत बनी हुई है. सर्विस सेक्टर बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है और आगे भी इस सेक्टर में मजबूती देखने को मिल सकती है.  

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बाकी देशों से क्यों अलग है भारत?

IMF ने ताजा अनुमान में कहा कि भारत तेल और गैस के मामले में विदेशों पर निर्भर रहने वाले उभरते देशों से अलग है. आईएमएफ ने अपने अक्टूबर 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में कहा, "बढ़ते पूर्वानुमानों के साथ भारत अलग दिखता है. इससे पता चलता है कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है.'' 

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आईएमएफ (IMF) ने अनुमान लगाया है कि वैश्विक उत्पादन साल 2028 से 2031 में औसतन 3.2% सालाना दर से बढ़ेगा. यह साल 2000-2019 के दौरान दर्ज किए गए महामारी-पूर्व औसत 3.7% से कम है.  दुनिया भर में मध्यम अवधि में रेटिंग में गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट युद्ध का असर है. इसमें मामले में भारत एक अपवाद है. मलतब भारत पर मिडिल ईस्ट युद्ध का बाकी दुनिया जितना असर नहीं होगा. 

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