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Share Market: सेंसेक्स-निफ्टी दोनों ग्रीन में, बाजार चढ़ने के एक्सपर्ट्स ने गिनाए ये कारण

फेस्टिव सीजन में निवेशकों को उम्मीद है कि पिछले कुछ समय से मार्केट में चल रहे उतार चढ़ाव का दौर थमेगा. बाजार की स्थिति अक्तूबर में सुधरने की उम्मीद की जा रही थी. मंगलवार (13 अक्टूबर) को शुरुआती गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अच्छी वापसी की.

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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है (Courtesy: Aaj Tak)

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  • 13 अक्टूबर को सेंसेक्स ने शुरुआती गिरावट के बाद 650 अंक से अधिक की तेजी दिखाकर 72,541 के स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी 22,550 के ऊपर पहुंचा।
  • भारतीय बाजार में मजबूती का कारण आईटी सेक्टर में तेजी, रुपये में सुधार और बॉन्ड यील्ड में गिरावट शामिल है, जबकि वैश्विक टेक बाजारों में गिरावट का असर देखा गया।
  • निवेशकों को सावधानी बरतने का सुझाव दिया गया है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली जारी है और आरबीआई ने मुद्रा को स्थिर रखने के लिए उपाय किए हैं।

मंगलवार 13 अक्टूबर को सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती गिरावट से उबरते हुए जोरदार उछाल दिखा. सुबह 10 बजे के आसपास सेंसेक्स 650 अंक से अधिक बढ़कर 72,541 पर पहुंच गया. निफ्टी भी लगभग 200 अंक चढ़कर सुबह 10:00 बजे के आसपास 22,550 के ऊपर कारोबार करता दिखा. बाजार खुलने पर सेंसेक्स 150 अंक से अधिक गिर गया था. लेकिन जल्दी ही नुकसान की भरपाई करते हुए हरे निशान में कारोबार करने लगा. निफ्टी मिडकैप 100 हरे निशान में कारोबार कर रहा. 

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आईटी शेयरों में जोरदार तेजी 

सेंसेक्स में आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई. एचसीएल टेक के शेयरों में दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद 5% से ज्यादा की तेजी आई. वहीं दिग्गज कंपनी टीसीएस के शेयरों में भी लगभग 5% की उछाल देखी गई. टेक महिंद्रा और इंफोसिस के शेयरों में भी लगभग 3% की वृद्धि हुई. ट्रेंट, एटर्नल, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, आईटीसी, एसबीआई, एमएंडएम, टाटा स्टील, अदानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल के शेयरों में 2% तक की बढ़त दर्ज की गई.

आज एनटीपीसी के शेयरों में लगभग 1% की गिरावट आई. निफ्टी आईटी में 3% से अधिक की तेजी देखी गई. निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी रियल्टी और कुछ अन्य क्षेत्रीय सूचकांकों में लगभग 1% की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, निफ्टी फार्मा में गिरावट आई. बाजार का रुख नकारात्मक ही रहा.

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शेयर बाजार में तेजी क्यों लौटी?

शेयर बाजार में तेजी के तीन-चार बड़े कारण हैं. पहला, आज हैवीवेट आईटी शेयरों में आई तेजी से शेयर बाजार ऊपर चढ़ रहा है. ग्लोबल एआई शेयरों में आई गिरावट से भारत की बहुचर्चित तकनीकी कंपनियों के प्रति पॉजिटिव संकेत देखने को मिला. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए उत्साह का प्रतीक माने जाने वाले दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में 6% से ज्यादा की गिरावट आई.

जापान के निक्केई सूचकांक में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. सैमसंग और ऐसी दूसरी हैवीवेट टेक कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट आई है. हालांकि, एक्सपर्ट इस टेक्नोलॉजी के लिए जरूरत से ज़्यादा उत्साह को लेकर आशावादी नहीं हैं. विश्लेषकों ने बुलबुले की तरह उठने-गिरने की आशंका जताई है.

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दूसरा, मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82 पैसे बढ़कर 94.96 पर पहुंच गया. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरती मुद्रा को बचाने के लिए कुछ उपाय किए हैं. इसके बाद रुपये में आई तेज़ी जारी रही.

तीसरा, बॉन्ड यील्ड में थोड़ी गिरावट आई. इससे शेयर बाजारों पर दबाव कम हुआ. अमेरिकी 10 साल वाला बॉन्ड यील्ड 5.2% से नीचे गिर गई, जबकि 30 साल वाले ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5.56% पर आ गई.

चौथा, 13 अक्टूबर को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि निवेशकों ने वैश्विक बाजारों में रूस से और अधिक तेल आने की संभावना का आकलन किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी डीजल सप्लाई पर प्रतिबंधों में थोड़ी ढील देने के अपनी सरकार के फैसले का बचाव किया. ब्रेंट क्रूड वायदा 1% से अधिक गिरकर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया. डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा भी 1% से अधिक गिरकर 93 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया.

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सावधान रहने की सलाह

निवेशकों में उम्मीद जरूर है, लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, ‘फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं. मार्केट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली रुकने की उम्मीद नहीं है. घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी का रुख बदलने के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं.’

 उन्होंने बताया कि आरबीआई ने फॉरेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग पर पाबंदियां लगाई हैं. ट्रेडिंग की लागत बढ़ाई है, जिससे रुपये को कुछ राहत मिली है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी कम हुई है. सोमवार को  विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,708 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि, अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड समेत दूसरे कारकों पर भी नजर रखना जरूरी है.

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