भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार (8 अक्टूबर) को भारी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1% से अधिक की गिरावट आई है. सुबह 11:30 बजे तक सेंसेक्स 700 से अधिक अंक गिरकर 71,900 के निचले स्तर पर आ गया था. दोपहर 1 बजे तक भी स्थिति संभली नहीं, बल्कि 200 प्वाइंट्स का गोता लगाया. मार्केट में दोपहर 1 बजे 900 प्वाइंट्स की गिरावट देखने को मिली है.
शेयर मार्केट में आई भारी तबाही, सेंसेक्स 900 अंक लुढ़का, निवेशकों के 8.5 लाख करोड़ डूबे
रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने का असर मार्केट पर भी नजर आ रहा है. गुरुवार को बाजार खुलने के महज 4 घंटों में करीब 900 प्वाइंट गिर गया है. कुछ ही घंटों में निवेशकों के 8.5 लाख करोड़ डूब गए. शेयर बाजार में आई तबाही के पीछे कई कारण हैं.

निफ्टी में 200 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई है. यह 22,400 के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था. इस तेज गिरावट से BSE में लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट वैल्यू में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है. यह घटकर 470 लाख करोड़ रुपये रह गया.
इन शेयरों में भारी गिरावटइकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक आईटीसी , अडानी पोर्ट्स , इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज ( आरआईएल ) के शेयरों में सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. यहां 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में 2% तक की भारी गिरावट आई.
सेक्टर्स की बात करें तो, निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा 3% की गिरावट आई. निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस और कई अन्य सेक्टरों में लगभग 2% की गिरावट देखी गई. वहीं, टाइटन और टेक महिंद्रा , एचसीएल टेक्नोलॉजीज , टीसीएस और इंफोसिस समेत दिग्गज आईटी शेयरों में 2% तक की तेजी आई.
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शेयर बाजार में गिरावट के कारणआरबीआई (RBI) ने करीब 3 साल में पहली बार ब्याज दरों में चौथाई फीसदी का इजाफा किया है. जेफरीज का अनुमान है कि आरबीआई चालू चक्र में ब्याज दरों में करीब 100 आधार अंकों की वृद्धि करेगा. वैश्विक स्तर पर बॉन्ड की बिकवाली तेज हो गई. इससे बॉन्ड यील्ड कई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई.
अमेरिकी 30 साल वाले बॉन्ड यील्ड 5.71% से ऊपर पहुंच गई. बेंचमार्क 10 साल वाले बॉन्ड यील्ड 5.3% से ऊपर पहुंच गई. दो साल वाले बॉन्ड की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई. बॉन्ड यील्ड में तेजी से निवेशकों के लिए डेट बाजारों में निवेश करने से फायदा होता है. इससे उभरते शेयर बाजारों पर दबाव पड़ता है.
बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी भी रही है. कच्चे तेल के दाम 2% की और बढ़ोतरी हुई और यह 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. इसके अलावा, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों की बिक्री जारी रखी और बुधवार को NSE के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, 6,121 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे. बुधवार तक लगातार 9 सत्रों में FII ने लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं.
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