बीते दिनों पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़े हैं. इससे पेट्रोल और डीजल करीब साढ़े सात रुपये लीटर महंगे हुए हैं. जानकारों का कहना है कि आम लोगों की बचत पर इसका बड़ा असर होगा. ईंधन महंगा होने से ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ेगा, बच्चों की स्कूल बस, ओला-ऊबर, टेंपो और बस समेत दूसरे ट्रांसपोर्ट के साधनों का किराया बढ़ सकता है.
महंगे पेट्रोल-डीजल मिडिल क्लास की सेविंग्स खत्म करवा देंगे?
सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ेंगे, बिजली और ऑनलाइन सामान की डिलीवरी का खर्च भी बढ़ सकता है. ये सब लंबे वक्त तक चला तो आम आदमी की सेविंग्स तक पर इसका असर पड़ सकता है.


सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ेंगे, बिजली और ऑनलाइन सामान की डिलीवरी का खर्च भी बढ़ सकता है. ये सब लंबे वक्त तक चला तो आम आदमी की सेविंग्स तक पर इसका असर पड़ सकता है.
ट्रांसपोर्ट महंगा होगाहिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीत सिंह ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे पहला और तत्काल असर ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ता है. फिर चाहें रोजाना ऑफिस आना-जाना हो या बच्चों की स्कूल बस का किराया हो. जो लोग गर्मी की छुट्टियों में घूमने-फिरने का प्लान बना रहे हैं उन्हें ट्रांसपोर्ट के मद में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
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घरेलू बजट में कटौती होने की संभावनापेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से घरेलू बजट और बिगड़ सकता है. फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली का कहना है कि ईंधन महंगा होने से खाने-पीने की चीजों की ढुलाई महंगी हुई है. इस वजह से ट्रांसपोटर्स अपना किराया 20 परसेंट तक बढ़ा चुके हैं. दूध, ब्रेड और खाने के तेल के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं. ग्रॉसरी समेत रोजमर्रा की जरूरतों की ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से घर का बजट बढ़ना तय है.
ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के पार्टनर और कंज्यूमर एंड रिटेल इंडस्ट्री के जाने-माने नाम नवीन मालपानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “नेस्ले, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मैरिको और डाबर जैसी FMCG कंपनियों ने बढ़ती इनपुट लागतों की भरपाई के लिए पहले ही अपने उत्पादों की लागत 2-5% तक कीमतें बढ़ा दी हैं. ये कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें आगे और बढ़ा सकती हैं.”
वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक थोक मंडियों में सब्जी की कीमतों में 10%-12% का इजाफा हुआ है. इस तरह से देखें तो आने वाले समय में घरेलू बजट में अच्छी खासी बढ़ोतरी दिख सकती है. एक ट्रांसपोर्टर ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “ट्रकों के परिचालन खर्च का लगभग 55% हिस्सा डीजल पर खर्च होता है. इसके अलावा टायर, बीमा, टोल, रखरखाव समेत कई दूसरे खर्चें बढ़ने से लागत बढ़ी है."
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मिडिल क्लास की बचत पर कितना असर पड़ेगा?फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का दूरगामी असर होता है. खासतौर से डीजल के दाम अर्थव्यवस्था से लेकर महंगाई तक बड़ा असर डालते हैं. क्योंकि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन में किया जाता है.
वे आगे एक उदाहरण देते हुए कहते हैं, “फिलहाल 35 हजार सैलरी पाने वाला व्यक्ति महीने के 1500 रुपये बचा लेता था. पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 8 रुपये बढ़ने का असर आगे साफ दिखाई देगा और इस व्यक्ति की बचत घटकर 250 रुपये रह जाएगी.”
दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज में कॉमर्स डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर अक्षय मिश्रा लल्लनटॉप से बताते हैं कि बड़े शहरों में कमाई का एक बड़ा हिस्सा लोन की ईएमआई, घर का किराया भरने, बच्चों की पढ़ाई और इलाज में चला जाता है. यानी शहरी मिडिल क्लास की बचत पहले से सिकुड़ रही है.
ऐसे में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से ग्रॉसरी और ट्रांसपोर्ट के मद में लागत बढ़ेगी तो घर चलाने का खर्च बढ़ेगा और लोगों की सेविंग्स में कमी आ सकती है.
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