"अगर आप हमें सड़कें नहीं दे सकते, तो हमें हेलीकॉप्टर ही दे दीजिए." ये गुजारिश छत्तीसगढ़ के एक गांव के लोगों ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह से की है. वे गांव की ऊबड़-खाबड़ सड़क से परेशान है. रोड़ की बदहाली की पुरानी तस्वीर को देख कर तंग आ चुके हैं.
इस गांव के लोगों की अमित शाह को चिट्ठी, लिखा- 'आने-जाने के लिए हेलीकॉप्टर दीजिए'
Chhattisgarh villagers letter to Amit Shah: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एक आदिवासी गांव के लोगों ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह से एक गुजारिश की है. कहा है कि अगर उन्हें सड़क नहीं दे सकते, तो हेलीकॉप्टर ही दे दीजिए.


ये मामला कथित नक्सल प्रभावित रहे सुकमा जिले के मारुकी (मारोकी) का है. ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन का ध्यान सड़क पर लाने की कोशिश की. मगर कुछ नहीं हुआ. उन्हें बार-बार आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है.
समय बदला, मगर सड़क का हाल नहीं. इसी को देखते हुए गांव वालों ने अब 'हाईकमान' का रुख किया है. गृह मंत्री को लिखी चिट्ठी में ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन एक सही सड़क उपलब्ध नहीं करा सकता, तो उन्हें कम से कम एक हेलीकॉप्टर ही दे देना चाहिए. ताकि आपातकालीन स्थितियों में यात्रा कर सकें.
ग्रामीणों का कहना है कि गांव को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण पिछले 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है. ठेकेदार और विभाग ने सड़क बनाने के नाम पर कई जगहों पर पुल-पुलिया के लिए बड़े-बड़े गड्ढे तो खोद दिए, लेकिन उन्हें कभी पूरा नहीं किया. अभी पूरी सड़क पर सिर्फ गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं.
घायल हुए लोग, पलटा ट्रैक्टरइंडिया टुडे से जुड़े धर्मेन्द्र सिंह से बात करते हुए एक ग्रामीण सविन मरकाम ने बताया,
“हम कई सालों से सड़क की शिकायत कर करके परेशान आ गए है. इसलिए हमने हेलीकॉप्टर की मांग की. बस्तर में विकास होगा. लेकिन सर हुआ नहीं है. 10 साल हो गए है इसे. अभी बरसात आने वाली है, वैसे भी नहीं बन पाएगा. एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती. हेलीकॉप्टर नहीं दे रहे, तो गांव का रास्ता बना दीजिए. ताकि एंबुलेंस पहुंच जाए. मैं भी सड़क की वजह से एक बार घायल हो गया था.”
एक अन्य ग्रामीण जोगा मरकम ने कहा,
“कम से कम 10 साल से ज्यादा हो चुके हैं. लेकिन सड़क नहीं बनी. रोड ऐसी है कि मरीज को अस्पताल तक नहीं ले जा सकते. राशन के लिए मेन रोड पर जाना पड़ता है. मगर बारिश के समय उसमें भी दिक्कत पड़ती है. हम कई बार कलेक्टर के ऑफिस तक भी गए. मगर अब तक कुछ नहीं हुआ. बाइक पर जाने पर लोग गिरते जाते हैं. एक बार ट्रैक्टर भी पलट गया था. इस स्थिति में चल रहे हैं.”
नीचे लगाई गई क्लिप में नजर आ रहा है कि सड़क पर किसी वाहन को लेकर चलना कितना मुश्किल है. एक ट्रैक्टर भी पलटा नजर आ रहा है.
सरकार पर काम टालने का आरोपरिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीणों का तर्क है कि पहले इस इलाके में नक्सली गतिविधियों का बहाना बनाकर विकास कार्यों को टाल दिया जाता था. मगर अब स्थितियां बदल चुकी हैं. अब छत्तीसगढ़ काफी हद तक नक्सल मुक्त हो चुका है, इसके बावजूद प्रशासन उनके गांव की सुध लेने को तैयार नहीं है.
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