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मुस्लिम गर्लफ्रेंड के लिए बेटे ने इस्लाम अपनाया तो पिता ने 'कैद' कर लिया, HC ने दिलाई 'आजादी'

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 31 साल के आयुष मलिक को पिता की कथित नजरबंदी से मुक्त कर दिया. आयुष ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया है और वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहते हैं.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को आजाद कर दिया. (Courtesy: X/India today)

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  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक को उनके पिता देवराज सिंह की हिरासत से मुक्त कर दिया क्योंकि कोर्ट ने पाया कि आयुष ने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म स्वीकार किया है।
  • आयुष मलिक ने मुस्लिम लड़की से शादी करने के लिए 2014 में अपना धर्म इस्लाम में बदला था, जिसे उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया और आरोप लगाया कि उन्हें नजरबंद किया गया।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से धर्म बदलने और किसी से शादी करने का अधिकार है, और इस अधिकार को परिवार की असहमति से रोका नहीं जा सकता।

मुस्लिम लड़की से शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन करने वाले आयुष मलिक को उनके पिता की ‘कैद’ से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ‘आजाद’ कर दिया. आयुष मलिक को जून 2026 से ही उनके पिता देवराज सिंह ने कथित तौर पर घर में ‘नजरबंद’ करके रखा था. 9 सितंबर की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस से आयुष को कोर्ट में पेश करने के लिए कहा था.

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पेशी के बाद आयुष ने कोर्ट के सामने कबूल किया कि उन्होंने किसी दबाव, धमकी या जबरदस्ती के असर में इस्लाम कबूल नहीं किया है, बल्कि अपनी मर्जी से धर्म बदला है. कोर्ट ने देखा कि आयुष बालिग हैं और कानून उन्हें अपनी मर्जी से धर्म बदलने और शादी करने का अधिकार देता है. इसलिए उन्हें पिता देवराज सिंह की कथित नजरबंदी से आजाद कर दिया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा कि बालिग व्यक्ति को आमतौर पर अपनी अंतरात्मा के हिसाब से अपना धर्म चुनने का अधिकार है. इसे सिर्फ इसलिए नहीं बदला जा सकता कि उसके परिवार वालों को ये मंजूर नहीं है. कोर्ट ने ये भी कहा कि व्यक्ति किससे शादी करना चाहता है, किसे अपना जीवनसाथी बनाना चाहता है, यह उसका अपना फैसला है. उसकी अपनी मर्जी का मामला है. कानून इसकी आजादी उसे देता है. इस आजादी को रोकने के लिए परिवार की पसंद-नापसंद या असहमति आधार नहीं बन सकती.

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हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी बालिग व्यक्ति अगर कोर्ट के सामने अपनी मर्जी साफ-साफ बता देता है तो उसकी पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए. जब तक ये साबित न हो जाए कि उसकी पसंद को मान लेना कानूनन गलत है.

ये भी पढ़ेंः धर्म बदलकर मुस्लिम लड़की से शादी की, पिता ने बना लिया बंधक, मुकदमे पर HC ने क्या कहा?

क्या मामला है?

31 साल के आयुष मलिक के एक दोस्त ने कोर्ट में ये याचिका डाली थी, जिस पर कोर्ट ने ये सारी बातें कहीं. आयुष के पिता उत्तर प्रदेश के शामली में दवा का कारोबार करते हैं. आरोप है कि उन्होंने बेटे आयुष को घर में नजरबंद कर लिया था. ये बात सामने आई कि आयुष ने अपनी मुस्लिम गर्लफ्रेंड से शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन किया है. ये बात परिवार को पसंद नहीं थी. 9 सितंबर को हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वह आयुष मलिक को पिता देवराज की हिरासत से छुड़ाकर कोर्ट में पेश करे.

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बुधवार, 16 सितंबर को आयुष को कोर्ट में पेश किया गया. जस्टिस संदीप जैन ने आयुष से कोर्ट में सीधी बातचीत की. बी.फार्मा की पढ़ाई कर चुके आयुष ने बताया कि उन्होंने 2014 में अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया था. इसके लिए उन्हें कोई धमकी नहीं दी गई थी. कोई दबाव भी नहीं बनाया गया था. न तो कोई लालच ही दिया गया था. उन्होंने कहा कि वह इस्लाम के जरूरी नियमों का पालन कर रहे हैं. लेकिन ये बात उनके माता-पिता को मंजूर नहीं है. 

आयुष ने ये भी बताया कि वह चांदनी कुरैशी नाम की लड़की से शादी करना चाहते हैं, लेकिन माता-पिता उनके इस फैसले के खिलाफ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम गर्लफ्रेंड से शादी की बात पर उन्हें धमकाया गया और 4 जून 2026 से घर में ही नजरबंद करके रखा गया था.

हालांकि, आयुष के पिता देवराज सिंह ने इन सारे आरोपों को खारिज किया है. कोर्ट में उन्होंने कहा कि उनके बेटे का ब्रेनवॉश किया गया. उसने अपनी मर्जी से इस्लाम नहीं अपनाया. पिता ने दलील दी कि उन्हें बेटे की भलाई की चिंता है, इसलिए उसके इस्लाम अपनाने या चांदनी कुरैशी से शादी करने के फैसले पर आपत्ति है.

लेकिन आयुष ने पिता के इन दावों को कोर्ट में खारिज कर दिया. जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें ‘आजाद’ करने का फैसला सुनाया.

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