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विदेशी निवेशक भारत के शेयर मार्केट से क्यों भाग रहे? 2 दिन में ₹20000 करोड़ निकाले

भारतीय शेयर मार्केट की हालत पिछले कुछ समय से काफी डगमगाई हुई है. इसका असर विदेशी निवेशकों के इनवेस्टमेंट पर भी दिख रहा है. सिर्फ 2 दिन में विदेशी निवेशकों ने मार्केट से 20000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं.

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इस हफ्ते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार से 26,000 करोड़ रुपये निकाले हैं (Courtesy: India Today)

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  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से लगभग 20,000 करोड़ रुपये निकाले, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट आई है।
  • विदेशी निवेशकों के निकासी का मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना बताया गया है, जो निवेशक व्यवहार को प्रभावित कर रहा है।
  • इसके परिणामस्वरूप विदेशी निवेशकों के भारत में लौटने की संभावना कम है और सेमीकंडक्टर एवं ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों का विकास आवश्यक माना जा रहा है।

विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय शेयर मार्केट के लिए उत्साह डगमगाता दिख रहा है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से करीब 20,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. इसका असर निफ्टी और सेंसेक्स पर नजर आ रहा है. लगातार 8वें हफ्ते दोनों गिरावट की तरफ बढ़ रहे हैं. ऐसा साल 2001 के बाद पहली बार हो रहा है. स्टॉक एक्सचेंज से मिले अस्थायी आंकड़े भी इस ओर इशारा कर रहे हैं. 

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स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 30 सितंबर को 10,148 करोड़ रुपये से अधिक निकाले. इससे एक दिन पहले 29 सितंबर को करीब 10,743 करोड़ रुपये निकाले थे. साथ ही, इस हफ्ते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 26,000 करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं.

विदेशी निवेशक भारत से क्यों भाग रहे? 

इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इसके कारणों पर बात की. उन्होंने कहा, “सितंबर में निफ्टी में आई तेज गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का अधिक होना था. विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ दिनों में जमकर बिकवाली की. इस वजह से यह गिरावट और भी तेज हो गई.” 

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उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ब्याज दर को देखते हुए विदेशी निवेशकों की बिकवाली समझ में आती है. 10 साल वाले अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड करीब 5.2% (बॉन्ड पर रिटर्न) के आसपास पहुंच गई है." अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों को इसमें निवेश करना फायदे का सौदा होता है.

इसके अलावा कच्चे तेल का संकट भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहा है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. इसलिए भी कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चालू खाता घाटे को बढ़ा सकती हैं. महंगाई बढ़ सकती है और रुपया गिर सकता है. तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों के मुनाफे को भी कम कर सकती हैं.

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क्या विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लौटेंगे?

इन्वेस्टमेंट रिसर्च और ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI से जुड़े शेयरों में तेजी का दौर खत्म हो रहा है. इसके बाद भी विदेशी निवेशकों के बड़ी संख्या में भारतीय शेयर बाजार में तुरंत लौटने की संभावना कम है. 

विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए भारत को सेमीकंडक्टर, बैटरी और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में ऐसी कंपनियां और उद्योग विकसित करने होंगे. ये सेक्टर दुनिया के दूसरे देशों की कंपनियों को टक्कर देने में सक्षम हैं. इसके अलावा, भारतीय शेयरों का महंगा वैल्यूएशन भी विदेशी निवेश को खींचने में बड़ी चुनौती है. 

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