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बाजार में आए भूचाल के बाद सोना-चांदी भी हुआ खूब सस्ता, खरीदने से पहले जान लें एक्सपर्ट की राय

फेस्टिव सीजन से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. भारतीय निवेशकों में गोल्ड-सिल्वर हमेशा निवेश के आकर्षक विकल्प रहे हैं. अगर आप सोना-चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स की राय जरूर जान लें.

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया दो महीने के निचले स्तर पर आ गया है (Courtesy: India Today)

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  • 29 सितंबर को एमसीएक्स पर दिसंबर 2026 डिलीवरी वाले सोने और चांदी के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गई, जिसमें सोने की कीमत 419 रुपये घटकर 1,46,385 रुपये और चांदी 1,092 रुपये कम होकर 2,26,350 रुपये प्रति किलोग्राम हुई।
  • अमेरिकी डॉलर के सापेक्ष रुपया दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से सोने-चांदी की मांग घट रही है, जिससे इनके दाम गिरावट पर हैं।
  • विश्लेषकों के अनुसार, सोने की कीमत में 1,54,500 रुपये के ऊपर टिकने पर तेजी देखी जा सकती है, अन्यथा कीमत 1,35,000 रुपये तक गिरने की संभावना बनी हुई है, जिससे निवेशकों को सावधानी रखनी आवश्यक है।

बाजार में चल रही गिरावट का असर सोने-चांदी की कीमतों पर भी दिख रहा है. 29 सितंबर को भी सोने-चांदी की कीमतों (Gold Silver Rate) में गिरावट देखने को मिली.  मंगलवार को शुरुआती कारोबार में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स (MCX) पर दिसंबर 2026 डिलीवरी वाले वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली. सोना 419 रुपये गिरकर 1 लाख 46 हजार 385 रुपये पर आ गया. इसी तरह एमसीएक्स पर चांदी भी 1,092 रुपये गिरकर 2,26,350 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया.

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इंटरनेशनल मार्केट (कॉमेक्स) पर सोने का फ्यूचर प्राइस करीब 0.2%  गिरकर 4,175.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं, हाजिर सोने की कीमत 0.7% बढ़कर 4,143.87 डॉलर प्रति औंस हो गईं.

सोने की कीमत में भारी गिरावट क्यों आई?

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया दो महीने के निचले स्तर पर आ गया है. डॉलर महंगा होने से दुनियाभर में सोने और चांदी के दाम बढ़ जाते हैं. इस वजह से इनकी मांग घट जाती है और भाव गिरते हैं.

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सेबी रजिस्टर्ड फर्म इंटेलीसिस वेंचर्स के फाउंडर अमित सुरेश जैन ने कहा कि डॉलर के साथ 10 साल और 30 साल अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी इसकी वजह है. सोने की कीमतों पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है. अमेरिका में 10 साल वाले बॉन्ड की यील्ड 5.25% पर पहुंच गई है. 

फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना ने भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है. इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें भी 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रही हैं. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ाने में मदद करती हैं, जिससे डॉलर में मजबूती देखने को मिल रही है. क्रूड ऑयल फिलहाल पॉजिटिव ट्रैक पर कारोबार कर रहा है. गोल्ड और सिल्वर प्राइस पर इसका भी असर पड़ रहा है. 

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एक्सपर्ट ने क्या सलाह दी?

अमित सुरेश जैन ने कहा, ‘तकनीकी संकेतों के अनुसार, मौजूदा स्तरों से 500 से 1,000 रुपये तक का उछाल संभव है. हालांकि, 1,54,500 रुपये के ऊपर टिकने के बाद ही तेजी की संभावना है.’

उनका कहना है कि सोना 1,54,500 रुपये के स्तर को पार नहीं कर पाता है, तो दोबारा दबाव बढ़ सकता है. शुरुआती गिरावट 1,45,000 रुपये तक आ सकती है. वहीं, 1,44,000 रुपये के नीचे फिसलने पर गिरावट बढ़कर 1,35,000 रुपये तक जारी रहने की आशंका है.

निवेशकों को निचले स्तर पर 1,44,000 और 1,45,000 रुपये के स्तरों पर विशेष नजर रखनी चाहिए. दूसरी ओर, तेजी की स्थिति में खरीदारी या सकारात्मक रुख केवल 1,54,500 रुपये के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर ही अपनाने की सलाह दी जा रही है.

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